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मर्द को दर्द नहीं होता बनी ताइवान में भारत की सबसे बड़ी फिल्म, भारत में सिनेमाघरों ने रिलीज़ करने से किया इनकार

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मर्द को दर्द नहीं होता‘ को ताइवान में 55 स्क्रीन्स में रिलीज़ किया गया है जो ताइवान में अबतक रिलीज़ हुई किसी भी भारतीय फिल्म के लिए सबसे ज्यादा स्क्रीन काउंट है।

और इसके साथ ही एक बड़ी खबर यह है कि भारत में इनॉक्स मूवीज ने फिल्म को रिलीज़ करने से मना कर दिया है। वे फिल्म को रिलीज़ करने के बदले में कुछ पैसे मांग रहे हैं।

आपको बता दें कि ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी‘ के साथ रिलीज़ की जा रही है और ऐसे में दोनों फिल्मों में स्क्रीन काउंट बट जाएंगे। अक्षय कुमार बॉलीवुड के जाने-माने सुपरस्टार हैं और दूसरी फिल्म नए कलाकारों को लेकर बनाई गई है। इसलिए कुछ सिनेमाघरों के मालिक ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ के रिलीज़ के बदले में पैसे मांग रहे हैं।

उन्हें डर है कि यदि जनता ‘केसरी‘ देखना पसंद करेगी और ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ देखने कोई नहीं आया तो ऐसे में उन्हें नुक्सान उठाना पड़ सकता है।

फिल्म भारत से ज्यादा विदेशों के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है।

‘मर्द को दर्द नहीं होता’ ऐसे लड़के की कहानी है जिसे एक रेयर बिमारी के चलते दर्द का एहसास नहीं होता है। उसके शरीर में पानी की कमी न हो इसलिए वह वाटर बैग अपने कंधे पर लेकर घूमता है।

फिल्म का ट्रेलर शुरू होता है जिसमें अभिमन्यू कहते हैं कि, “हर माइंडब्लोइंग कहानी के पीछे न कुछ बहुत ही बुरे निर्णय होते हैं। वो कहते हैं न मर्द को दर्द नहीं होता, ऐसा क्यों? मैं बता सकता हूँ।” फिल्म में राधिका मदन शानदार एक्शन सीन करती नज़र आएंगी।

वसन बाला द्वारा निर्देशित और रोन्नी स्क्रूवाला द्वारा प्रोड्यूस की जा रही यह फिल्म 21 मार्च 2019 को रिलीज़ होने वाली है।

दूसरी तरफ इसी फिल्म के साथ रिलीज़ हो रही ‘केसरी’ की बात करें तो फिल्म में अक्षय और परिणीति चोपड़ा मुख्य भूमिका में हैं।

फिल्म कमांडर हवलदार ईशर सिंह (अक्षय द्वारा निबंधित) की कहानी के बारे में बात करती है, जिसने 10,000 अफगानों के खिलाफ 21 सिखों की एक सेना का नेतृत्व किया था। इसे सारागढ़ी की लड़ाई कहा जाता था, जिसे भारत के इतिहास में अब तक लड़ी गई सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक के रूप में जाना जाता है।

लड़ाई 1897 में लड़ी गई थी। इक्कीसवीं जाट सिख सैनिकों ने ब्रिटिश भारत की सेना का बचाव किया था जो सारागढ़ी चौकी पर तैनात थी, जो कि एक चट्टानी रिज पर स्थित थी। सेना ने उत्तरी-पश्चिमी सीमा प्रांत (अब खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान) में अफगानों के पश्तून ओरकजई आदिवासियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के बाद इसे काफी अच्छे रिव्यु मिल रहे और इसे अक्षय कुमार का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया जा रहा, ऐसे में यह देखना मज़ेदार होगा कि ‘मर्द को दर्द नहीं होता‘ अक्षय कुमार की इस शानदार फिल्म के आगे टिक पाएगी या नहीं।

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About the author

साक्षी सिंह

Writer, Theatre Artist and Bellydancer

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