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    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लोकपाल की नियुक्ति के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दायर करने के लिए दिया दो हफ्ते का समय

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई के लिए 5 जजों की एक बेच का गठन कर दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इस बेंच की अध्यक्षता करेंगे, जिसमे जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड भी शामिल होंगे।

    न्यायालय द्वारा जारी एक नोटिस में कहा गया है कि खंडपीठ 10 जनवरी को सुबह 10.30 बजे सुनवाई के लिए मामला उठाएगी। यह 30 सितंबर, 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसने विवादित 2.77 एकड़ जमीन को निर्मोही अखाड़ा संप्रदाय, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, उत्तर प्रदेश, और रामलला में तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया गया था।

    4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले में आगे के की सुनवाई 10 जनवरी को होगी और नयी पीठ का गठन किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ 14 अपीलों पर सुनवाई कर रही है। पिछले साल 29 अक्टूबर को अदालत ने मामले की सुनवाई टालते हुए जनवरी के पहले सप्ताह की नयी तारीख तय किया था। अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा दायर की गई तत्काल सुनवाई की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

    अक्टूबर में जब सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए सुनवाई की अगली तारीख दी थी कि कोर्ट के पास इस मूदे से भी ज्यादा जरूरी मुद्दे हैं तो संसद में क़ानून के जरिये मंदिर निर्माण की मांग जोर पकड़ने लगी थी। लोकसभा चुनाव से 6 महीने पहले सुनवाई तलने से अच्च्नक अयोफ्ह्या एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आगया और संघ परिवार के साथ साथ साधू संतों ने भी धर्म संसद कर के सरकार पर मंदिर निर्माण के लिएय क़ानून बनाने का दवाब डालना शुरू कर दिया।

    भाजपा की सहयोगी शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की अयोध्या यात्रा ने ये जाहिर कर दिया कि चुनावी साल में मंदिर एक बार फिर मुख्य मुद्दा बनने जा रहा है लेकिन 1 जनवरी 2019 को अपने इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने ये कह कर साड़ी अटकलों पर विराम लगा दिया कि जब तक मामला कोर्ट में है सरकार अध्यादेश लाने नहीं जा रही।

    By आदर्श कुमार

    आदर्श कुमार ने इंजीनियरिंग की पढाई की है। राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कई वेबसाइट पर स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। द इन्डियन वायर पर वो राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते हैं।

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