रविवार, सितम्बर 22, 2019
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क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या मामले की सुनवाई फ़ास्ट ट्रैक पर चलाने की मांग की

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आदर्श कुमार
आदर्श कुमार ने इंजीनियरिंग की पढाई की है। राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कई वेबसाइट पर स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। द इन्डियन वायर पर वो राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते हैं।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह अयोध्या मामले में सुनवाई तेजी से करे, अगर सबरीमाला मसले में ऐसा हो सकता है, तो यह लंबे समय से लंबित मामले को भी हल करने के लिए किया जा सकता है।

सोमवार को यहां अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 15 वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मैं अपनी व्यक्तिगत क्षमता से सर्वोच्च न्यायालय में अपील करता हूं कि वह राम जन्मभूमि मुद्दे के त्वरित निपटारे के लिए मामले को फास्ट-ट्रैक अदालत की तरह सुने।

जब सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला मंदिर मामले पर तुरंत अपना फैसला दे सकता है, तो राम जन्मभूमि मुद्दा पिछले 70 वर्षों से लंबित क्यों है? उन्होंने कहा।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एमआर शाह, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। “हमें बाबर की पूजा क्यों करनी चाहिए?” प्रसाद ने पूछा।

संविधान की एक प्रति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “राम, कृष्ण के साथ-साथ अकबर का भी उल्लेख है लेकिन बाबर का कोई उल्लेख नहीं है … लेकिन अगर हम देश में इस तरह की चीजों के बारे में बात करते हैं, तो एक अलग तरह का विवाद उठ खड़ा होता है।”

केंद्रीय मंत्री ने भविष्य में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा प्रणाली लाने की भी बात की। उन्होंने अधिवक्ता परिषद के सदस्यों से अपील की कि वे यह सुनिश्चित करें कि गरीबों और जरूरतमंद लोगों से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई हो।

अनवरी सुप्रीम कोर्ट 4 जनवरी 2019 से अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू करने वाला है। यह मामला मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।

सरकार की कोशिश है कि 2019 से पहले इस मामले में फैसला आ जाए। क्योंकि सरकार पर सहयोगियों और हिंदूवादी संगठनों की तरफ से मंदिर निर्माण के लिए क़ानून बनाने का दवाब बढ़ रहा है।

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