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सुनील दत्त की जीवनी

Sunil Dutt Biography

सुनील दत्त भारतीय फिल्मो के एक मशहूर अभिनेता हैं। उन्होंने अपने अभिनय की वजह से कई सारे भारतियों का प्यार पाया था। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के उन अभिनेताओं में गिना जाता है जो बहुत ही सुलझे हुए और सफल अभिनेता रह चुके हैं। सुनील दत्त ना केवल एक अभिनेता के रूप में जाने जाते थे बल्कि वह एक राजनेता, निर्देशक और निर्माता के रूप में भी जाने जाते हैं।

सुनील दत्त द्वारा अभिनय किए गए फिल्मो की बात करे तो उन्होंने ‘कुंदन’, ‘राजधानी’, ‘मदर इंडिया’, ‘इंसान जाग उठा’, ‘हम हिंदुस्तानी’, ‘मैं चुप रहूँगा’, ‘आज और कल’, ‘मुझे जीने दो’, ‘आम्रपाली’, ‘गौरी’, ‘ज्वाला’, ‘भाई भाई’, ‘हीरा’, ’36 घंटे’, ‘नागिन’, ‘काला आदमी’, ‘सलाम मेमसाहब’, ‘फासले’, ‘है मेरी जान’, ‘फूल’, ‘मुन्ना भाई एम. बी. बी. एस’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘ओम शांति ओम’ जैसी फिल्मो में अपने अभिनय को दर्शको को बीच पेश किया था।

सुनील दत्त ने ना केवल अपने अभिनय की वजह से लोकप्रियता पाई है और कई अवार्ड्स को अपने नाम किया है, बल्कि हिंदी सिनमे में दिए अपने योगदान की वजह से उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित भी किया गया है।

सुनील दत्त का प्रारंभिक जीवन

सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1930 को खुर्द गांव, पंजाब में हुआ था। उन्होंने एक पंजाबी परिवार में जन्म लिया था। सुनील दत्त के पिता का नाम ‘दीवान रघुनाथ दत्त’ था और उनकी माँ का नाम ‘कुलवंती देवी दत्त’ था। सुनील के एक भाई थे और एक बहन थीं। उनके भाई का नाम ‘सोम दत्त’ है जो पेशे से एक अभिनेता ही थे और बहन का नाम ‘राज रानी बलि’ है।

सुनील ने अपने स्कूल की पढाई पंजाब से ही पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने ‘जय हिन्द कॉलेज’ मुंबई से अपने ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की थी। सुनील का जन्म पंजाब में हुआ था लेकिन कुछ समय बाद उनके परिवार ने लखनऊ जाने का फैसला लिया था। इसके बाद सुनील ने मुंबई आने का फैसला लिया था और मुंबई में आने के बाद ही उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढाई खत्म की थी।

सुनील दत्त का दिहांत 25 मई 2005 को बांद्रा, मुंबई के हुआ था और उस समय उनकी उम्र 75 वर्षीय थी। सुनील का दिहांत दिल का दोरा पढ़ने की वजह से हुआ था और उस समय वो अपने घर पर ही थे।

व्यवसाय जीवन

सुनील दत्त का फिल्मो का शुरुआती सफर

सुनील दत्त ने अपने व्यवसाय जीवन की शुरुआत एक रेडियो जॉकी के रूप में की थी। उनकी उर्दू भाषा में पकड़ काफी अच्छी थी जिसकी वजह से उन्हें एशिया के सबसे पुराने रेडियो चैनल ‘रेडियो सीलोन’ में काम करने का मौका मिला था।

सुनील दत्त ने अपने अभिनय के व्यवसाय की शुरुआत साल 1955 से की थी। उनकी पहली फिल्म का नाम ‘रेलवे प्लेटफार्म’ था जिसमे उन्होंने ‘राम’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘रमेश सैगल’ थे। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘कुंदन’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘सोहरब मोदी’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘अमृत’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

साल 1956 की शुरुआत सुनील दत्त ने फिल्म ‘किस्मत का खेल’ के साथ की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘किशोर साहू’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘प्रकाश वर्मा’ नाम का किरदार अभिनय किया था। उस साल की उनकी दूसरी फिल्म का नाम ‘एक- ही- रास्ता’ था जिसके निर्देशक ‘बी. आर. चोपड़ा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘अमर’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

साल 1957 में सुनील दत्त ने एक सुपरहिट फिल्म में अभिनय किया था। इस फिल्म का नाम ‘मदर इंडिया’ था जिसके निर्देशक ‘मेहबूब खान’ थे। इस फिल्म में सुनील ने ‘बिरजू’ नाम का किरदार अभिनय किया था जो की एक नकारात्मक किरदार था। फिल्म में नरगिस, सुनील, राजेंद्रा और राज ने मुख्य किरदारों को दर्शाया था। उसी साल सुनील ने फिल्म ‘पायल’ में ‘मोहन’ नाम के किरदार को भी दर्शाया था।

साल 1958 से साल 1960 तक सुनील ने फिल्म ‘साधना’, ‘इंसान जाग उठा’, ‘दीदी’, ‘सुजाता’, ‘उसने कहा था’, ‘हम हिन्दुस्तानी’, ‘एक फूल चार काटें’ और ‘दुनियां झुकती है’ में अभिनय किया था। इन सभी फिल्मो में से कुछ फिल्मो को दर्शको ने पसंद किया था और एक दो फिल्मो को फ्लॉप फिल्मो की सूचि में शामिल होना पड़ा था।

साल 1961 में सुनील को एक ही फिल्म में देखा गया था। उस फिल्म का नाम ‘छाया’ था जिसके निर्देशक ‘हृषिकेश मुख़र्जी’ थे। फिल्म में सुनील ने ‘अरुण’ और ‘कवी रही’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

सुनील दत्त का फिल्मो का बाद का सफर

साल 1962 में सुनील ने सबसे पहले फिल्म ‘मैं चुप रहूँगा’ में अभिनय किया था। फिल्म में सुनील के किरदार का नाम ‘कमल कुमार’ था और फिल्म के निर्देशक ‘ए. भीमसिंघ’ थे। इसके बाद उसी साल सुनील को फिल्म ‘झूला’ में देखा गया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘के. शंकर’ थे फिल्म में सुनील ने ‘डॉ. अरुण’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

साल 1963 में सुनील ने सबसे पहले फिल्म ‘आज और कल’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘वसंत जोगलेकर’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘डॉ. संजय’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इसके बाद सुनील को फिल्म ‘ये रिश्ते हैं प्यार के’ में देखा गया था। इस फिल्म में सुनील ने ‘अनिल कुमार जी. साहनी’ नाम का किरदार अभिनय किया था और फिल्म के निर्देशक ‘आर. के. नय्यर’ थे। फिल्म में मुख्य किरदारों को सुनील दत्त और लीला नायडू ने अभिनय किया था।

इसके बाद उसी साल सुनील ने फिल्म ‘मुझे जीने दो’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘मोनी भट्टाचार्य’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘ठाकुर जरनैल सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में अपने अभिनय की वजह से सुनील ने ‘बेस्ट एक्टर’ का अवार्ड भी प्राप्त किया था। साल का अंत सुनील ने फिल्म ‘गुमराह’ के साथ किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘बी. आर. चोपड़ा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘राजेंद्रा’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

साल 1964 में सुनील ने फिल्म ‘यादें’ में अभिनय किया था जिसमे उन्होंने खुद ही निर्देशक और निर्माता का काम भी किया था। फिल्म में उनके किरदार का नाम ‘अनिल’ था। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘ग़ज़ल’ में भी अभिनय किया था। इस फिल्म में सुनील ने अभिनेत्री मीना कुमारी के साथ मुख्य किरदार को दर्शाया था और सुनील के किरदार का नाम ‘एजाज़’ था।

साल 1965 में सुनील ने फिल्म ‘वक़्त’ के साथ उस साल की शुरुआत की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘यश चोपड़ा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘एडवोकेट रवि’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म के बाद उस साल की सुनील की दूसरी फिल्म का नाम ‘खानदान’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘ए. भीमसिंघ’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘गोविंदा शंकर लाला’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

साल 1966 से साल 1970 तक सुनील ने कुल 17 फिल्मो में अभिनय किया था। उन सभी फिल्मो में से जो फिल्म बॉक्स ऑफिस में सफल फिल्मो की सूचि में दर्ज हुई हैं उनका नाम ‘मेरा साया’, ‘मिलन’, ‘मेहरबान’, ‘पड़ोसन’, ‘गौरी’, ‘चिराग’, ‘भाई भाई’ और ‘हमराज़’ है। इसके आलावा बाकी सभी फिल्मो को दर्शको ने बिलकुल पसंद नहीं किया था।

साल 1971 में सबसे पहले सुनील ने फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में अभिनय किया था। इस फिल्म में सुनील ने खुद निर्देशक और निर्माता की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनके किरदार का नाम ‘शेरा सिंह’ था और फिल्म में मुख्य किरदार को वहीदा रेहमान और सुनील दत्त ने दर्शाया था। इसके बाद उसी साल सुनील ने फिल्म ‘ज्वाला’ में भी अभिनय किया था जिसके निर्देशक ‘एम. वि. रमन’ थे।

साल 1972 की शुरुआत सुनील ने फिल्म ‘ज़मीन आसमान’ के साथ की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘ए. वीरप्पन’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘रवि’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल सुनील ने फिल्म ‘ज़िन्दगी ज़िन्दगी’ में भी अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘तपन सिन्हा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘डॉ सुनील’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

साल 1973 की सुनील की पहली फिल्म ‘मन जीता जग जीता’ थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘बी. एस. थापा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘बग्गा डाकू’ और ‘बघेल सिंह’ नाम के किरदारों को दर्शाया था। यह फिल्म सुनील की पहली पंजाबी फिल्म थी। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘हीरा’ में अभिनय किया था जिसके निर्देशक ‘सुल्तान अहमद’ थे। फिल्म में सुनील के किरदार का नाम भी ‘हीरा’ ही था।

सुनील दत्त का फिल्मो का सफल सफर

साल 1974 में सुनील ने फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ में ‘सूरज’ और ‘जॉनी’ नाम के किरदारों को दर्शाया था। इस फिल्म में भी सुनील ने नकारात्मक किरदार अभिनय किया था। इसके बाद उसी साल सुनील को फिल्म ‘कोरा बदन’, ‘दुःख भंजन तेरा नाम’, ’36 घंटे’ में अभिनय किया था। इसी के साथ उस साल की सुनील की सुपरहिट फिल्म का नाम ‘प्राण जाए पर वचन ना जाए’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘एस. अली राजा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘राजा ठाकुर’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

साल 1975 से लेकर साल 1980 तक का सफर सुनील दत्त का बहुत सफल सफर रहा था। इन सालो की सुनील की सुपरहिट फिल्मे ‘उम्र क़ैद’, ‘नागिन’, ‘पापी’, ‘लड़की जवान हो गई’, ‘चरणदास’, ‘आखरी गोली’, ‘काला आदमी’, ‘डाकू और जवान’, ‘मुक़ाबला’, ‘जानी दुश्मन’, ‘शान’ और ‘एक गुनाह और सही’ थीं।

साल 1982 में सुनील ने फिल्म ‘बदले की आग’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘राजकुमार कोहली’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘लखन’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल सुनील को फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में देखा गया था। इस फिल्म में सुनील ने खुद ही निर्देशक और निर्माता की भूमिका दर्शाई थी।

साल 1984 में सबसे पहले सुनील ने फिल्म ‘लैला’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘सावन कुमार’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘धर्मराज सिंह’ और ‘ठाकुर पृथ्वीराज सिंह’ नाम के किरदारों को दर्शाया था। उस साल की सुनील की दूसरी रिलीज़ फिल्म ‘राज तिलक’ थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘राजकुमार कोहली’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘जय सिंह’ नाम के किरदार को दर्शाया था। साल 1985 में सुनील ने एक ही फिल्म में अभिनय किया था। उस फिल्म का नाम ‘फासले’ था और फिल्म में सुनील ने ‘विक्रम’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

साल 1986 में सुनील ने फिल्म ‘कला धंदा गोरे लोग’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘संजय खान’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘गौरी शंकर’ और ‘माइकल’ नाम के किरदार को दर्शाया था। साल 1987 में सुनील ने फिल्म ‘वतन के रखवाले’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘टी. रमा राओ’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘जेलर सूरज प्रकाश’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

साल 1991 में सुनील ने फिल्म ‘कुर्बान’ के साथ साल की शुरुआत की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘दीपक बाहरी’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘पृथ्वी सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इसके बाद सुनील ने फिल्म ‘प्रतिज्ञाबद्ध’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘रवि चोपड़ा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘पास्कल’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

साल 1993 में सुनील को फिल्म ‘क्षत्रिय’ में देखा गया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘जे. पि. दत्ता’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘महाराज भवानी सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इसके बाद उसी साल सुनील ने फिल्म ‘परंपरा’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘यश चोपड़ा’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘ठाकुर भवानी सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। उस साल का अंत सुनील ने फिल्म ‘फूल’ के साथ किया था जहाँ उनके किरदार का नाम ‘बलराम चौधरी’ है।

सुनील ने साल 2003 में एक बार फिर लगभग 10 सालो बाद अपनी वापसी फिल्मो में की थी। इस बार सुनील अपने बेटे की फिल्म ‘मुन्ना भाई एम बी बी एस’ में अभिनय करते हुए दिखाई दिए थे। फिल्म के निर्देशक ‘राजकुमार हिरानी’ थे और फिल्म में सुनील ने ‘हरी प्रसाद शर्मा’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

पुरस्कार और उपलब्धियां

  • साल 1963 में फिल्म ‘मुझे जीने दो’ के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1965 में फिल्म ‘खानदान’ के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1968 में ‘पद्म श्री’ के अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
  • साल 1995 में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था।
  • साल 1998 में ‘राजीव गाँधी नेशनल सद्भावना अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था।
  • साल 2000 में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था।

सुनील दत्त का निजी जीवन

सुनील दत्त को पहली नजर में ही अभिनेत्री ‘नरगिस’ से प्यार हो गया था। सुनील ने नरगिस से धीरे धीरे अपने प्यार का इज़हार करना शुरू किया था और आखिर कार नरगिस ने भी क़ुबूल किया था की उन्हें भी सुनील से प्यार है। दोनों ने 11 मार्च 1958 को एक दूसरे से शादी की थी। उन दोनों का एक बेटा है और दो बेटियां हैं।

बेटे का नाम ‘संजय दत्त’ है जो पेशे से एक अभिनेता हैं। उनकी बड़ी बेटी का नाम प्रिय दत्त है और छोटी बेटी का नाम ‘नम्रता दत्त’ हैं। सुनील दत्त की पसंदीदा अभिनेत्री ‘नरगिस’ हैं। सुनील को खाने में ‘दम चिकन’ बहुत पसंद है।

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