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हाउज़ द जोश? जब निर्देशक आदित्य धर को मिला “उरी” के सिग्नेचर डायलाग को बदलने का सुझाव

'उरी' को 'प्रोपेगंडा फिल्म' बुलाये जाने पर निर्देशक आदित्य धर ने कहा-'मैं कुछ नहीं कर सकता'

इस साल की शुरुआत में दर्शको को एक आल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म के साथ साथ आल टाइम ब्लॉकबस्टर डायलाग भी मिला जो सदा दर्शको के दिलों में रहेगा। आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म “उरी:द सर्जिकल स्ट्राइक” का डायलाग ‘हाउज़ द जोश?’ न केवल आम जनता ने दोहराया बल्कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषणों में कहा था।

मगर ऐसा भी वक़्त था जब आदित्य, अभिनेता विक्की कौशल के कहने पर इस लाइन को बदलने वाले थे। स्क्रीनराइटर एसोसिएशन के प्रोग्राम ‘वार्तालाप’ में अनुभवी स्क्रीनप्ले राइटर रोबिन भट्ट से बात करते हुए आदित्य ने बताया-“हमने सबसे पहले म्यांमार अनुक्रम के दौरान ‘हाउज़ द जोश?’ की शूटिंग की। कैमरा शुरू होने से दो मिनट पहले, विक्की मेरे पास आया और मुझे लाइन बदलने के लिए कहा क्योंकि उसे लगा कि कहीं ‘फील’ नहीं आ रहा है। मैंने समझाने की कोशिश की कि अपनी टीम को प्रेरित करने के लिए सेना के कमांडर ऐसे ही बात करते हैं, तो चलो इसे आजमाए।”

उन्होंने आगे कहा-“मुझे याद है कि जब विक्की ने पहली बार उस लाइन को कहा था, तो हमारी टीम के 30 सदस्यों के उस लाइन को सुनने के बाद रौंगटे खड़े हो गए थे।”

तो इस लाइन के पीछे की कहानी क्या है?

आदित्य ने याद किया-“जब मैं एक छोटा लड़का था तब मैं अपने दोस्तों के साथ दिल्ली में आर्मी क्लब जाता था। एक पूर्व आर्मी ऑफिसर हुआ करते थे, जो हम सभी बच्चों को एक कतार में खड़े होने के लिए कहते और हमसे पूछते थे- ‘हाउज़ द जोश?’। खेल था, एक-एक करके, सभी बच्चों को जवाब देना होगा- ‘हाई, सर’। जो कोई भी इसे सबसे जोर से और सबसे अच्छा कहेगा उसे चॉकलेट मिलेगा। ज्यादातर मैं चॉकलेट जीता करता था।”

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#SendMeBackSaturday!! From today onwards, every few days I will be posting few throwback pictures from our URI shoot. The idea is to make you all see what we all saw, felt and did while making this film. This particular picture was taken while we were shooting Myanmar Surgical Strike. It was the first action sequence we shot for URI. Because of some bad planning on the very first day itself everything went really slow and we lost a lot of time. In films like in a lot of other professions Time is Money. So as the director of the film I felt the mistake was all mine, I didn’t plan it well. I was feeling really guilty as I had no right to waste my producers money No Matter What!! That day itself I promised myself, whatever happens I will not waste even a single moment while shooting this or any other film of mine, ever! It was one of the biggest learning of my life. This sequence was Physically one of the most difficult sequences to shoot. We were in a dense Jungle, It was exceptionally cold and it was raining continuously and there was muck all around and in all that we had to pull off some really dangerous blasts and gun fires. Over that because of budget constraints we had decided that we will shoot only single takes for each shot. Basically whatever could go wrong was going wrong! But surprisingly even with all the stress and immense workload not even a single person ever complaint or looked tired or worn out, day in and day out everyone was putting their blood and sweat into this film (I really can’t explain in words the kind of energy URI had). And eventually we all somehow managed to pull this beast of an action sequence off in total of just 4 days. Thankfully it turned out to be one of the best action sequence in the entire film. And all this was possible because of my mad, crazy, persistent, tenacious young team of actors, HOD’s and crew members. Thank you Team Uri. 🙏 #URIShootDiary

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जैसा कि फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से समान रूप से सराहना मिली है, यह पूछे जाने पर कि क्या किसी निर्माता ने उनसे दोबारा ऐसी फिल्म बनाने के लिए संपर्क किया है, आदित्य ने कहा-“हां … ट्रेंडिंग क्या है इसके आधार पर बॉलीवुड कार्य करता है। एक बार एक रोम-कॉम हिट हो जाए, लोग दर्जनों रोम-कॉम बनाना शुरू कर देंगे। अगर एक युद्ध फिल्म हिट होती है, तो लोग बहुत सी बनाना शुरू कर देंगे। जब मैंने उरी बनाई तो युद्ध फिल्म वर्तमान समय के व्यावसायिक रूप से सफल जॉनर नहीं था।”

उन्होंने कहा-“अब जब हर कोई युद्ध और भारतीय सेना पर फिल्में बनाना चाहता है, तो मैं कुछ अलग करूंगा और एक नया चलन शुरू करूंगा और एक नई चुनौती पेश करूंगा। जब मैं कहानी लिखना शुरू करता हूँ, तो मैं इसके दो, तीन साल आगे का सोचता हूँ।”

 

About the author

साक्षी बंसल

पत्रकारिता की छात्रा जिसे ख़बरों की दुनिया में रूचि है।

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