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संवेग तथा उसके संरक्षण का सिद्धांत

संवेग संरक्षण सिद्धांत law of conservation of momentum in hindi

संवेग क्या है? (What is momentum in hindi?)

हम यह तो जानते ही हैं कि यदि कोई बहुत विशाल वस्तु हो, तो उसे हिला पाना अत्यंत कठिन है। जैसे अगर सड़क के किनारे कोई ट्रक खड़ा हो, तो उसे हिलाने के लिए बहुत ताकत चाहिए, क्योंकि वह भारी है।

बंदूक से निकली एक छोटी सी गोली भी आघात कर सकती है। उसे रोक पाना भी मुश्किल है। उसका आकार तो ट्रक की तुलना में कुछ नहीं। परंतु उसकी गति बहुत तेज़ है।

इन दोनों बातों से यह समझ आता है कि इन दोनों वस्तुओं के पास कुछ तो है जो दोनों में समान है-वो है संवेग।
संवेग दो चीजों पर निर्भर करता है-
1) भार (मास ‘m’)
2) वेग (वेलोसिटी ‘v’)

इसे ‘P’ से सूचित किया जाता है।
P = mv

संवेग संरक्षण सिद्धान्त (Law of conservation of momentum in hindi)

यदि किसी पृथक व्यवस्था (आइसोलेटेड सिस्टम) में दो पिंड टकराएँ, तो उस व्यवस्था का कुल संवेग टकराव के पहले तथा टकराव के बाद संरक्षित (conserved) रहेगा।

टकराव के पहले अगर दोनों पिंडों के वेग v1 और V1 है तथा टकराने के बाद v2 और V2, तब
mv1 + MV1 = mv2 + MV2
जहाँ m और M दोनों पिंडों के वज़न हैं।

क्योंकि संवेग एक वेक्टर मात्रा है, यह परिमाण (मैग्नीट्यूड) तथा दिशा (डायरेक्शन) दोनों में संरक्षित रहता है।

मान ले की एक फुटबॉल खिलाड़ी पूर्व की ओर 50kmph की गति से दौड़ रहा है और दूसरा खिलाड़ी पश्चिम की ओर 60kmph से दौड़ रहा है और यदि दोनों टकरा जाएँ, तो दोनों मिलके पश्चिम की ओर 10kmph से जाएँगे। इस तरह संवेग संरक्षित रहेगा।

यह अत्यंत आवश्यक है कि व्यवस्था पृथक रहे। यदि कोई बाहरी बल होगा, तो सेंटर ऑफ मास एक गति नहीं चलेगा और संवेग संरक्षित नहीं रहेगा।

संवेग संरक्षण कानून का तर्कसंगत प्रमाण (Logical proof of the law of conservation of momentum)

न्यूटन के समावेदन (मोशन) के तीसरे कानून से हम यह तो जानते ही हैं कि हर क्रिया की एक समान परिमाण की, पर विपरीत प्रतिक्रिया होती है। (every action has an equal and opposite reaction)

क्रिया में लगने वाला बल ‘F’ उस वस्तु के भार ‘m’ तथा उसके त्वरण (acceleration ‘a’) का गुणनफल होता है।

तो यदि वस्तु1 ‘ma’ बल लगाएगी, तो वस्तु2 ‘ – ma ‘ बल लगाएगी। यांनी –
m1a1= – m2a2 —- (1)
अब ‘a’ वेग का ( वेलोसिटी ) का समय के साथ बदलाव होता है –
a = ∆v/t —- (2)

जितनी देर वस्तु1 बल लगाएगी, उतनी ही देर वस्तु2 भी बल लगाएगी। यानी वस्तु1 तथा वस्तु2 एक जितने समय ही एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे। इसलिए समीकरण ( equation ) में दोनों तरफ से t को हटा सकते हैं।

ऐसा करने पर, हमे यह मिलेगा –

जो कि संवेग संरक्षण का सिद्धान्त है।

निष्कर्ष (Conclusion)

इससे यह निष्कर्ष भी निकलता है कि संवेग बनता या नष्ट नहीं होता। उसका बस एक पिंड से दूसरे पिंड में स्थानांतरण हो जाता है।

ऐसा हमे तब देखने मिलता है जब कोई गाड़ी किसी दीवार से भिड़ जाती है। गाड़ी तो रुक जाती है, परंतु दीवार भी वही रहती है। ऐसे में गाड़ी का संवेग नष्ट नहीं होता। बल्कि वह दीवर के अणुओं और धरती में समा जाता है और धरती उस दिशा में और तेज़ी से घूमती है।

इस विषय से सम्बंधित यदि आपका कोई सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

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अनुश्री कनोडिया

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