फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट डील से सरकार को मिलेगा करोड़ों रूपए का टैक्स

हाल ही में अमेरिकी कंपनी वालमार्ट नें फ्लिप्कार्ट को 16 अरब डॉलर में खरीदा था। इस डील में वालमार्ट नें फ्लिप्कार्ट का एक बड़ा हिस्सा अपने नाम किया था।

इस बारे में अब भारतीय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि उसनें वालमार्ट से इस डील में लगने वाले टैक्स की जानकारी देने को कहा है। डिपार्टमेंट नें इसके लिए कंपनी को 15 दिनों का समय दिया है।

सरकार की ओर से बुधवार को इस डील को मंजूरी दी गयी है।

हालाँकि फ्लिप्कार्ट (सिंगापुर में रजिस्ट्रेशन) और वालमार्ट दोनों ही कंपनियां विदेश में पंजीकृत हैं, इसके बावजूद इस डील पर टैक्स लगेगा, क्योंकि फ्लिप्कार्ट का 50 फीसदी से ज्यादा कारोबार भारत में है। इनकम टैक्स एक्ट में इसका प्रावधान सेक्शन 9 में किया गया है।

इसका मतलब यह है कि कुछ निवेशकों को इसके जरिये टैक्स भरना होगा।

आपको बता दें कि फ्लिप्कार्ट में कई ऐसे देश और विदेशी निवेशक हैं, जो अपना हिस्सा बेचने जा रहे हैं और इसके बदले में भारी राशि कमाएंगे। इसके लिए इन्हें कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।

ऐसे में इस डील में पहले वालमार्ट टैक्स देगा। उसके बाद जिन लोगों को पैसे मिलेंगे, वे उसपर भी टैक्स देंगें। ऐसे में इस डील से सरकार को लगभग 2 अरब डॉलर का टैक्स मिल सकता है।

फ्लिप्कार्ट की ओर से कहा गया है कि कंपनी नें पहले ही टैक्स से सम्बंधित जानकारी जमा कर दी है और अधिकारी उसकी जांच कर रहे हैं।

इस प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी नें बताया, “हम वालमार्ट से आग्रह करते हैं कि वे डील होने के 15 दिनों के भीतर टैक्स सम्बन्धी जानकारी जमा कराएं। यदि कंपनी इस समय-सीमा के भीतर कोई जानकारी नहीं देती है, तो डिपार्टमेंट को उनसे संपर्क करना होगा।”

इस बारे में वालमार्ट की ओर से कहा गया है कि वह सभी नियमों का पालन करते हुए ही बिजनेस करना चाहती है। कम्पनी नें कहा, “हम भारतीय टैक्स अधिकारीयों के साथ मिलकर काम करेंगे और उनके सभी सवालों का जवाब देंगें।”

फ्लिप्कार्ट के सभी निवेशकों में से सॉफ्टबैंक सबसे बड़ा निवेशक है और उसे ही सबसे ज्यादा टैक्स देना होगा। आपको बता दें कि इस डील के होने के बाद सॉफ्टबैंक को उसके हिस्से में लगभग 2.5 अरब डॉलर मिलेंगे।

आपको बता दें कि सॉफ्टबैंक नें पिछले साल अगस्त में ही फ्लिप्कार्ट में निवेश किया था। ऐसे में उसपर शोर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा, जो लगभग 43 फीसदी होता है।

ऐसे में कंपनी को लगभग 4300 करोड़ रूपए टैक्स में देने होंगें।

टैक्स अधिकारी हालाँकि अभी तक सॉफ्टबैंक से इस बारे में साफ़ तौर पर बातचीत नहीं कर पाए हैं।

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