दा इंडियन वायर » विदेश » ताइवान नें की अमेरिका से एफ-16 विमान और एम-1 टैंक खरीदने की तैयारी, चीन नें दिया कड़ा जवाब
विदेश

ताइवान नें की अमेरिका से एफ-16 विमान और एम-1 टैंक खरीदने की तैयारी, चीन नें दिया कड़ा जवाब

ताइवान की राष्ट्रपति

ताइवान को खुद के भूभाग में शामिल करने के लिए चीन का दबाव ताइपे पर बढ़ता ही जा रहा है। ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन के मुताबिक “अपनी सैन्य क्षमताओं में वृद्धि के लिए अमेरिका से एफ-16 विमान और एम 1 टैंक को खरीदने के लिए ताइवान ने वांशिगटन के पास एक अर्जी दाखिल की है।”

अमेरिका से लेंगे हथियार

हाल ही में अमेरिकी रक्षा ख़ुफ़िया विभाग ने रेखांकित किया कि क्षेत्रीय संघर्षों से लड़ने के लिए चीन अपनी सेना में सुधार कर कर आधुनिक बना रहा है। अमेरिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग लम्बे समय से अपने भूभाग में ताइवान का एकीकरण करना चाहता है। चीनी सेना में आधुनिकरण ताइवान की आज़ादी की घोषणा पर रोक लगाना है।

सीएनएन के मुताबिक ताइवान की राष्ट्रपति ने कहा कि “अमेरिकी हथियार हमारी जमीनी और हवाई क्षमताओं में वृद्धि करेंगे, सैन्यकरण को मज़बूत करेंगे और विश्व को अमेरिका की ताइवान की रक्षा के वचन को प्रदर्शित करेंगे।”

चीन ने इसका विरोध किया हैं। चीनी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि “वह अमेरिका का ताइवान को हथियार बेचने और अमेरिकी सेना का ताइवान से संपर्क रखने के सख्त खिलाफ है। ताइवान का मसला चीन के आंतरिक मामलों से सम्बंधित है। चीन के मूल हितो की चिंता और चीनी जनता का राष्ट्रीय सम्बन्ध, बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देता है।”

आज़ादी से ही आज़ाद था ताइवान

ताइवान और चीन का नक्शा
ताइवान और चीन का नक्शा

ताइवान को चीन अपने संप्रभु क्षेत्र का भाग मानता है, जबकि द्वीप साल 1948 के गृह युद्ध के दौरान चीन से आज़ाद हो गया था। ताइवान या चीनी गणराज्य ने खुद को हमेशा एक स्वतंत्र देश के तौर पर बरक़रार रखा है।

ताइवान की राष्ट्रपति ने कहा कि “चीन ने मेरे नए साल के सम्बोधन में चीनी गणराज्य की मौजूदगी की वास्तविकता का सामना कर लिया होगा।”

वर्तमान में ताइवान सरकार पूरी तरह से आत्मनिर्भर, लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई व खुद का संचालन करने वाली है। ताइवान की अर्थव्यवस्था व मुद्रा चीन से संबंधित नहीं है। कानूनी और वीजा दृष्टिकोण से भी देखा जाए तो ताइवान में आने वाले लोगों को यहां का वीजा लेना पड़ता है न कि चीन का। ताइवान व चीन के वीजा नियम अलग-अलग है।

सम्बंधित: क्या ताइवान चीन का हिस्सा है?

ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान से मांगी मदद

ताइवान की राष्ट्रपति नें इस दौरान अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान से मदद मांगते हुए कहा है कि तीनों देश पैसिफिक इलाके में चीन के प्रभुत्व को कम करने के लिए ताइवान की मदद करें।

एबीसी न्यूज़ के मुताबिक राष्ट्रपति साई नें कहा है कि पैसिफिक और दक्षिण चीन सागर इलाके में चीन से कई देशों के मतभेद हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान मुख्य देश हैं।

उन्होनें कहा कि ये देश ताइवान की मदद कर सकते हैं और चीन को नियंत्रण में रख सकते हैं।

जाहिर है दक्षिणी चीन सागर में आये दिन चीन और अमेरिका के बीच संघर्ष चलता रहता है। जापान नें भी कई बार चीन की शिकायत वैश्विक मंचों पर की है। ऑस्ट्रेलिया नें भी अपनी संप्रभुता को लेकर चिंता जाहिर की है।

ऐसे में ताइवान को लगता है कि यदि ये तीनों देश ताइवान की मदद करते हैं, तो चीन का प्रभाव इस इलाके में कम हो सकता है।

चीन ने दिया जवाब

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग

ताइवान द्वारा अमेरिका से हथियार और टैंक खरीदने पर जब चीनी विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया, तो उनके प्रवक्ता भड़क गए।

उनसे सवाल पूछा गया कि ताइवान की राष्ट्रपति अमेरिका से नए टैंक और फाइटर जेट खरीदने की बात कर रही हैं और आपका इसपर क्या कहना है?

इसपर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग नें कहा कि ताइवान की ‘राष्ट्रपति’ को नहीं हैं। उन्होनें कहा कि साई इंग-वेन ताइवान की नेता हैं और ‘राष्ट्रपति’ के पद को चीन नें मान्यता नहीं दी है।

उन्होनें आगे कहा कि इस प्रकार के सवाल कई बार पूछे जाते हैं और मैं बार-बार यही जवाब देता हूँ कि चीन ताइवान द्वारा किसी भी प्रकार के हथियार खरीदने का विरोध करेगा।

उन्होनें कहा कि चीन नें इस बारे में अमेरिका से भी शिकायत की है कि वे ताइवान से सम्बन्ध ना रखें।

उन्होनें कहा कि अमेरिका को समझना चाहिए कि यह मुद्दा चीनी नागरिकों के लिए कितना नाजुक है और यह चीन की एकता का उल्लंघन है।

चीन नें आगे कहा कि पैसिफिक इलाके में शान्ति स्थापित करने के लिए अमेरिका को ताइवान से सभी सम्बन्ध तोड़ने होंगे और चीन से इस मसले को सुलझाना होगा।

चीन नें आगे कहा कि शीत-युद्ध जैसी मानसिकता दोनों देशों के लिए ठीक नहीं है।

जाहिर है डोनाल्ड ट्रम्प के शासन में अमेरिका और ताइवान पहले से काफी नजदीक आये हैं। डोनाल्ड ट्रम्प नें पैसिफिक इलाके और दक्षिणी चीन सागर में चीन के प्रभुत्व को नियंत्रण में रखने के लिए इस इलाके में मौजूद देशों से रिश्ते मजबूत करने शुरू कर दिए हैं।

इससे पहले ट्रम्प वियतनाम, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान जैसे देशों से चीन के विरुद्ध योजना बना चुके हैं।

अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत समय-समय पर हिन्द महासागर और दक्षिणी चीन सागर में सैन्य परिक्षण करते रहते हैं जिससे वे चीन को यह सन्देश देते रहते हैं कि इस इलाके में चीन मनमानी नहीं कर सकता है।

About the author

कविता

कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

Add Comment

Click here to post a comment

फेसबुक पर दा इंडियन वायर से जुड़िये!