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    Aquatic ecosystem in hindi

    पानी के अंदर पौधों और जीव जंतुओं के समुदाय निवास करते हैं, उनको जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (aquatic ecosystem) कहा जाता है। खारेपन के आधार पर इनको निम्नलिखित भागों में विभाजित किया गया है:

    मीठा पानी पारिस्थितिकी तंत्र (FreshWater Ecosystem):- यह भूभाग पर पाया जाने वाला पानी का वह स्रोत है जिसमे सदा वाष्पीकरण प्रक्रिया होती रहती है और उसका खारापन (5 ppt से कम) मात्रा में रहता है। इसके दो प्रकार हैं:- (i) ठहरा हुआ जल पारिस्थितिकी तंत्र जैसे कि तालाब, झील आदि और (ii) बहता हुआ जल पारिस्थितिकी तंत्र जैसे नदी, झरना आदि।

    समुद्री (Marine) पारिस्थितिकी तंत्र:- इनमें खारेपन की मात्रा समुद्र की जल जितना (35 ppt) या उससे ज्यादा रहता है, जैसे कि उथला हुआ समुद्र, खुला महासागर आदि।

    नुनखरा (Brackish) जल पारिस्थितिकी तंत्र:- इनका खारापन 5 से 35 ppt के बीच रहता है जैसे कि ज्वारनदमुख (estuaries), मैन्ग्रोव क्र दलदल, जंगल की पानी आदि।

    जलीय जीवाणु (Aquatic Organisms)

    जिस जलीय भाग में जीवाणु अवतरित होते हैं, उस आधार पर उनको निम्नलिखित जोन में वर्गीकृत किया गया है:

    • Neuston:- इस प्रकार के जीव हवा और पानी की अंतरफलक (interface) पर निवास करते हैं, जैसे कि पानी के सतह पर बहते हुए पौधे।
    • पेरिफाइटोन:- यह वे जीव हैं जो पानी की एकदम नीचे कीचड़ से निकलने वाली पदार्थ या जड़ सहित पौधों के तनों या पत्तों से लिपटे रहते हैं जैसे कि डंडल रहित शैवाल
    • प्लवक (Plankton):- सूक्ष्म बहते हुए जीव जैसे कि शैवाल, डायटम, प्रोटोज़ोआ, लार्वा आदि प्लवक कहलाते हैं। इस वर्ग में सूक्ष्म पौधे जैसे कि शैवाल (algae) एवं जीव जैसे कि crustacean, प्रोटोजोआ आदि आ जाते हैं। इन पौधों का स्थानांतरण पानी की धाराओं तक सीमित रहता है।
    • Nekton:- इस वर्ग में वे जीव आते हैं जो पानी की धारा को सह या उसे पार कर सकते हैं, जैसे कि जैविक कीड़े, कई मछली, व्हेल आदि।
    • Benthos: इस वर्ग में वे जीव आते हैं जो समुद्र के निचले सतह की बिलकुल पास पाए जाते हैं।

    जलीय वास के उत्पादकता को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Aquatic Habitats)

    सूर्य की रौशनी और ऑक्सीजन जलीय आवासों को प्रभावित करने वाले सबसे प्रमुख कारक हैं।

    सूर्य की रौशनी

    जितनी गहराई होती है, वैसे वैसे सूर्य की रौशनी का प्रवेश कम होता जाता है। जितनी गहराई तक सूर्य की रौशनी पहुँच पाती है, उस हिसाब से यह पता चल पाता है कि पौधों का वितरण कैसे होगा। मिट्टी सहित पानी के कारण पानी पंकिल (turbid) हो जाता है। रौशनी एवं पौधों के वितरण की आधार पर जलीय वासों को प्रकाशी (photic) और अप्रकाशी (aphotic) जोन में विभाजित किया गया है।

    घुला हुआ ऑक्सीजन

    मीठे पानी की स्रोत में भार के हिसाब से 10 ppm (parts per million) रहता है। हवा में ऑक्सीजन की मात्रा की हिसाब से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग 150 गुना कम रहता है। घुले हुए ऑक्सीजन हवा-पानी सतह या पानी की जीवों की श्वशन प्रणाली के द्वारा पानी से निकल जाते हैं। तापमान भी पानी में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा को प्रभावित करता है। गर्म पानी में ऑक्सीजन नहीं घुलता। इसके कारण पानी में चीजें जल्दी गलने लगती हैं।

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