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कादर ख़ान की जीवनी

Kader Khan Biography

कादर खान हिंदी फिल्मो के बहुत ही प्रसिद्ध अभिनेता हैं। उन्होंने अपनी पहचान ना केवल एक अभिनेता के रूप में ही बनाई है बल्कि उन्हें एक बेहतरीन कॉमेडियन और स्क्रीनराइटर के रूप में भी जाना जाता है। कादर और अभिनेता गोविंदा की जोड़ी को सबसे लोकप्रिय जोड़ी जाना जाता था और उन दोनों की हर एक फिल्म ने बॉक्स ऑफिस में अपना नाम सफल फिल्मो की सूचि में दर्ज किया है।

कादर खान द्वारा अभिनय किए गए फिल्मो की बात करे तो उन्होंने ‘दाग’, ‘ज़माने से पूछो’, ‘भोला भाला’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘कार्बनि’, ‘नसीब’, ‘कालीआ’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘राज महल’, ‘चोर पुलिस’, ‘सरफ़रोश’, ‘स्वर्ग से सुन्दर’, ‘घर घर की कहानी’, ‘राजा बाबू’, ‘कुली नंबर 1’, ‘जुदाई’, जुड़वाँ’, ‘घरवाली बाहरवाली’, ‘हसींना मान जायगी’, ‘अखियों से गोली मारे’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘रंगीला राजा’ जैसी कई और हिट फिल्मो में अभिनय किया है।

कादर खान ने अपने अभिनय की वजह से कई सारे अवार्ड्स को अपने नाम किया है। कादर को हिंदी सिनेमा में दिए गए उनके योगदान की वजह से कई सारे सम्मानों से सम्मानित भी किया गया है।

कादर ख़ान का प्रारंभिक जीवन

कादर खान का जन्म 22 अक्टूबर 1937 को काबुल, अफगानिस्तान में हुआ था। कादर ने एक मुस्लिम परिवार में जन्म लिया था और वो पकिस्तान के निवासी थे। कादर के पिता का नाम ‘अब्दुल रेहमान खान’ था जो पेशे से एक मौलवी थे। उनकी माँ का नाम ‘इक़बाल बेगम’ था और वह घरेलु काम किया करती थीं। कादर के तीन भाई थे जिनका नाम ‘शम्स उर रेहमान’, ‘फज़ल रेहमान’ और ‘हबीब उर रेहमान’ था। कादर के तीनो भाई कादर की जन्म से पहले ही गुजर गए थे। कादर के जन्म के बाद उनके परिवार ने मुंबई में रहने का फैसला किया था।

कादर ने अपने स्कूल की पढाई ‘ए मुन्सिपलिटी स्कूल’, मुंबई से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने ‘इस्माइल युसूफ कॉलेज’, मुंबई से अपने ग्रेजुएशन की पढाई पूरी की थी। कादर ने इंजीनियर के विषय में मास्टर्स की डिग्री भी प्राप्त की है। कादर ने हिंदी फिल्मो में अपने अभिनय की शुरुआत साल 1971 से की थी। उन्होंने हिंदी सिनेमा में 300 से भी अधिक फिल्मो में अभिनय किया था।

कादर खान का दिहांत 31 दिसंबर 2018 को हुआ था और तब उनकी उम्र 81 वर्ष की थी। कादर अपने आखरी समय में कनाडा में अपने बेटे ‘सरफ़राज़ खान’ के साथ थे। वो वहाँ अपना इलाज़ कराने गए थे। कादर की मौत ‘सुप्रानुक्लेयर पल्सी’ नाम की बीमारी की वजह से हुई थी। इस बीमारी में शरीर धीरे धीरे काम करना बंद कर देता है, जिसकी वजह से दिमाग भी सुन्न हो जाता है।

व्यवसाय जीवन

कादर खान का फिल्मो का शुरुआती दौर

कादर खान ने अपने अभिनय की शुरुआत साल 1973 में की थी। इससे पहले उन्होंने साल 1971 में फिल्म ‘फर्ज आई इस्लाम’ में एक कथावाचक की भूमिका को दर्शाया था। इसके बाद अगले कुछ सालो तक कादर ने लगातार कई फिल्मो में अभिनय किया था जैसे साल 1974 में ‘सगीना’, ‘गूँज’, ‘दिल दीवाना’, साल 1975 में फिल्म ‘अनाड़ी’, साल 1976 में फिल्म ‘ज़माने से पूछो’, ‘अदालत’, ‘बैरंग’, और साल 1977 में फिल्म ‘खून पसीना’, ‘मुक्ति’, ‘परवरिश’, ‘अगर… इफ़’ और ‘चोर सिपाही’ में कई सारे किरदारों को दर्शाया था।

साल 1979 की बात करे तो उस साल कादर ने फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘राकेश कुमार’ थे और फिल्म में कादर ने ‘मुखिया बाबा’ नाम का किरदार अभिनय किया था। उस फिल्म में कादर ने अमिताभ बच्चन और रेखा के साथ अभिनय किया था।

साल 1980 की बात करे तो उस साल कादर को सबसे पहले फिल्म ‘धन दौलत’ में देखा गया था। इस फिल्म में उन्होंने एक कैमिओ किरदार दर्शाया था। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘दो और दो पांच’ में भी अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘राकेश कुमार’ ही थे और फिल्म में कादर ने अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और हेमा मालिनी के साथ मुख्य किरदार को दर्शाया था। फिल्म में कादर के किरदार का नाम ‘जगदीश अंकल’ था।

कादर खान का फिल्मो का बाद का सफर

इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘लूटमार’ और ‘ज्योति बने ज्वाला’ नाम की दो सफल फिल्मो में अभिनय किया था। इन दोनों ही फिल्मो में उन्होंने सहायक किरदार को दर्शाया था और फिल्म को दर्शको ने ठीक ठाक पसंद किया था।

साल 1981 में कादर ने फिल्म ‘नसीब’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘मनमोहन देसाई’ थे और फिल्म में कादर ने ‘रघुबीर सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में मुख्य किरदारों को अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, हेमा मालिनी, रीना रॉय, किम, कादर और प्राण ने अभिनय किया था।

उसी साल कादर ने फिल्म ‘याराना’, ‘शक्का’, ‘फिफ्टी फिफ्टी’, ‘गहरे ज़ख्म’, ‘कालिआ’, ‘वक़्त की दीवार’, ‘राज़’ जैसी बड़ी फिल्मो में अभिनय किया था।

साल 1982 की बात करे तो उस साल कादर ने फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ में अभिनय। फिल्म के निर्देशक ‘नरेन्द्र बेदी’ थे और फिल्म में कादर ने ‘रामलाल शर्मा’ और ‘सेठ मनहोरीलाल’ नाम के किरदारों को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल कादर ने फिल्म ‘बदले की आग’ में भी अभिनय किया था। इस फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था।

उसी साल उन्होंने फिल्म ‘फ़र्ज़ और खून’ और ‘जीओ और जीने दो’ में अभिनय किया था। फिल्म ‘फ़र्ज़ और खून’ के निर्देशक ‘के. रघुवेन्द्र राओ’ थे और फिल्म में कादर ने ‘नागराज’ का किरदार अभिनय किया था। उसके बाद फिल्म ‘जीओ और जीने दो’ में कादर के किरदार का नाम ‘डाकू शेर सिंह’ था। इस फिल्म के निर्देशक का नाम ‘श्याम रल्हन’ था।

साल 1983 में भी कादर ने कुछ हिट फिल्मो में अभिनय किया था। उन फिल्मो के नाम ‘मंगल पांडेय’, ‘हिम्मतवाला’, ‘जानी दोस्त’, ‘मवाली’, ‘कुली’ और ‘चोर पुलिस’ हैं। इन सभी फिल्मो में से सबसे लोगप्रिय फिल्म ‘कुली’ को माना जाता है, जिसमे कीदार ने अमिताभ बच्चन के साथ अभिनय किया था। इस फिल्म में कादर के किरदार का नाम ‘ज़फर खान’ था और फिल्म में उन्होंने नकारात्मक किरदार अभिनय किया था।

साल 1984 में कादर को फिल्म ‘घर एक मंदिर’ में देखा गया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘के. बापाइआ’ थे और फिल्म में कादर ने ‘सेठ धरम दास’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में मुख्य किरदारों को शशि कपूर, मिथुन चक्रबोर्ती, शक्ति कपूर, मौशमी और कदर खान ने अभिनय किया था।

उसी साल की कुछ और हिट फिल्मो के नाम ‘हैसियत’, ‘जॉन जानी जनार्दन’ और ‘मेरा फैसला’ था जिसमे कादर ने अभिनय किया था।

साल 1985 की शुरुआत कादर ने फिल्म ‘मेरा जवाब’ में ‘इंस्पेक्टर अजय’ के किरदारों को दर्शाते हुए की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘एन. एस. राज भारत’ थे और फिल्म में कादर के साथ जैकी श्रॉफ और मिनाक्षी सेशाद्री ने मुख्य किरदारों को दर्शाया था।

उसी साल कादर को फिल्म ‘सरफ़रोश’ में देखा गया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘दसारी नारायण राओ’ थे और फिल्म में कादर ने ‘धर्माधिकारी’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इस फिल्म में जीतेंदर और श्रीदेवी ने मुख्य किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल कादर को फिल्म ‘बलिदान’, ‘मास्टरजी’, ‘वफादार’, ‘गिरफ्तार’, ‘चार महारथी’ और ‘आज का दौर’ जैसी फिल्मो में देखा गया था।

साल 1986 की शुरुआत कादर ने फिल्म ‘दिलवाले’ के साथ की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘के. मुराली मोहन राओ’ थे और फिल्म में कादर ने ‘सेवकरन सीतापुरी’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में मिथुन के साथ अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने अभिनय किया था। इसके बाद उसी साल कादर फिल्म ‘स्वर्ग से सूंदर’ में अभिनय करते हुए दिखे थे। इस फिल्म में उन्होंने ‘मिलावत राम’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

उसी साल कादर फिल्म ‘नसीहत’ में अभिनय करते हुए दिखे थे। इस फिल्म में उन्होंने ‘मोहन लाल’ नाम के किरदार को दर्शाया था और फिल्म के निर्देशक ‘अरविंद सेन’ थे। इसके बाद कादर सुपरहिट फिल्म ‘सुहाग’ में भी अभिनय करते हुए दिखे थे। इस फिल्म के निर्देशक ‘के रघुवेन्द्र राओ’ थे और फिल्म में कादर ने ‘मास्टर जी’ का किरदार दर्शाया था।

साल 1987 और साल 1988 की बात करे तो दो सालो में कादर ने कुल 48 फिल्मो में अभिनय किया था। उनमे से कुछ फिल्मो में कादर ने कैमिओ किरदार दर्शाया था तो कुछ में उन्होंने सहायक किरदारों को दर्शाया था। उन सभी फिल्मो में से जो फिल्मो बॉक्स ऑफिस में हिट लिस्ट में शामिल हुई थीं उनका नाम ‘शहनशा’, ‘घर घर की कहानी’, ‘वक़्त की आवाज’, ‘बीवी हो तो ऐसी’, ‘साज़िश’, ‘प्यार मोहब्बत’, ‘इन्तेक़ान’, ‘मर मिटेंगे’ और ‘खून भरी मांग’ था।

साल 1989 में भी कादर को फिल्म ‘गैर कानूनी’, ‘दोस्त’, ‘काला बाज़ार’, ‘मजबूर’, ‘पराया घर’, ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ और ‘वर्दी’ में अभिनय करते हुए देखा गया था।

साल 1990 की कादर की सुपर हिट फिल्म का नाम ‘शानदार’ था जिसके निर्देशक ‘विनोद देवन’ थे। इस फिल्म में कादर ने ‘राइ बहादुर अर्जुन चौरसिआ’ नाम का किरदार अभिनय किया था। फिल्म में मुख्य किरदारों को मिथुन और मिनाक्षी ने अभिनय किया था।

उसी साल कादर एक और ब्लॉकबस्टर फिल्म का हिस्सा बने थे जिसका नाम ‘घर हो तो ऐसा’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘कल्पतरु’ थे और फिल्म में कादर ने ‘बजरंगी’ और ‘बजरंगी के पिता’ का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में मुख्य किरदारों को अनिल कपूर और मिनाक्षी सेषादारी ने अभिनय किया था और कादर फिल्म में सहायक किरदार दर्शा रहे थे।

साल 1991 में कादर ने फिल्म ‘साजन’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘लौरेंस डि’सूज़ा’ थे और फिल्म में कादर ने ‘राजीव वर्मा’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में मुख्य किरदारों को संजय दत्त, माधुरी दीक्षित और सलमान खान ने अभिनय किया था।

उसी साल कादर को कुछ और फिल्मो में देखा गया था जिनका नाम ‘सपनो का मंदिर’, ‘इंद्रजीत’, ‘यारा दिलदारा’ और ‘घर परिवार’ था।

कादर खान का फिल्मो का सफल सफर

साल 1992 में कादर ने कुल 22 फिल्मो में अपने अभिनय को दर्शाया था। उनमे से जो फिल्मो को बॉक्स ऑफिस में सफल फिल्मो की सूचि में दर्ज किया गया था, उनका नाम ‘वंश’, ‘बोल राधा बोल’, ‘अंगार’, ‘घर जमाई’, ‘दौलत की जंग’, ‘नागिन और लुटेरा’ और ‘इन्साफ की देवी’ था। बाकी सभी फिल्मो को बॉक्स ऑफिस में फ्लॉप फिल्मो की सूचि में दर्ज किया गया था।

साल 1994 की बात करे तो उस साल कादर ने अभिनेता गोविंदा के साथ फिल्म ‘राजा बाबू’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘डेविड धवन’ थे और फिल्म में कादर ने ‘किशन सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में कादर के साथ गोविंदा और करिश्मा कपूर ने मुख्य किरदार को दर्शाया था। फिल्म दर्शको को बहुत पसंद आई थी।

इसके बाद उसी साल कादर ने फिल्म ‘पहला पहला प्यार’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘मनमोहन सिंह’ थे और फिल्म में कादर ने ‘धरम पाल’, ‘स्ट्रीटसाइड वेंडर’ और ‘ग्रोसर’ का किरदार अभिनय किया था।

साल 1995 में कादर ने ‘फिल्म कुली नंबर 1’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘डेविड धवन’ थे और फिल्म में कादर ने ‘चौधरी होशियारचंद शिकारपुर बकुलवाला’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में कादर ने गोविंदा, करिश्मा कपूर और शक्ति कपूर के साथ मुख्य किरदार को दर्शाया था।

साल 1996 में भी कादर ने अभिनेता गोविंदा के साथ फिल्म ‘छोटे सरकार’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘विमल कुमार’ थे और फिल्म में कादर ने ‘जगमोहन’ और ‘ए सी पी चंद्र बेदी’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में कादर और गोविंदा के साथ अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने अभिनय किया था।

साल 1997 से साल 2000 कादर ने कई हिट फिल्मो में अभिनय किया था। उन फिल्मो के नाम ‘जुदाई’, ‘जुड़वा’, ‘हीरो न. 1’, ‘ज़मीर’, ‘मिस्टर और मिसेस खिलाडी’, ‘आंटी न. वन’, ‘मर्द’, ‘दूल्हे राजा’, ‘बड़े मियां छोटे मियां’, ‘राजाजी’, ‘दुल्हन हम ले जायेंगे’, ‘कुंवारा’, ‘धड़कन’ थे।

साल 2002 की सुपरहिट फिल्म का नाम ‘अखियों से गोली मारे’ था जिसके निर्देशक ‘हरमेश मल्होत्रा’ थे। फिल्म में कादर, रवीना टंडन और गोविंदा की जोड़ी को देखा गया था। फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस में अपना नाम सफल फिल्मो की सूचि में दर्ज किया था।

साल 2004 में कादर खान ने फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ में अभिनय किया था। उस फिल्म के निर्देशक ‘डेविड धवन’ थे और फिल्म में कादर ने ‘मिस्टर ओ. बी. दुग्गल’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इस फिल्म में कादर ने सलमान खान, अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा और अमरीश पूरी के साथ अभिनय किया था।

साल 2005 से साल 2015 तक कादर ने कई फिल्मो में काम किया था लेकिन उनमें से कुछ चुनिंदा फिल्मो को ही दर्शको ने पसंद किया था। बाकी सभी फिल्मो को दर्शको ने ना पसंद किया था और फिल्मो को फ्लॉप फिल्मो की सूचि में दर्ज होना पड़ा था।

साल 2016 में कादर ने फिल्म ‘अमन के फ़रिश्ते’ में अभिनय किया था। इस फिल्म में उन्होंने ‘कर्नल रनजीत’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इसके बाद साल 2017 में उन्होंने फिल्म ‘मस्ती नहीं सस्ती’ में अभिनय किया था।

कादर की अगली फिल्म साल 2019 में आई थी जिसमे उन्होंने अपने सबसे पसंदीदा जोड़ीदार गोविंदा के साथ एक छोटा सा किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘सिकंदर भारती’ थे। यह फिल्म साल 2018 में ही अपनी स्कूटिंग पूरी कर चुकी थी और ये कादर की अंतिम फिल्म थी।

पुरस्कार और उपलब्धियां

  • साल 1982 में फिल्म ‘मेरी आवाज़ सुनो’ के लिए ‘बेस्ट डायलॉग’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1991 में फिल्म ‘बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी’ के लिए ‘बेस्ट कॉमेडियन’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1993 में फिल्म ‘अंगार’ के लिए ‘बेस्ट डायलॉग’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 2013 में ‘साहित्य शिरोमनि अवार्ड्स’ से सम्मानित किया गया था।
  • साल 2019 में ‘पद्मा श्री’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

कादर ख़ान का निजी जीवन

कादर खान ने साल 1970 में शादी की थी। उनकी पत्नी का नाम ‘हाजरा खान’ है और दोनों के 3 बेटे हैं। कादर के सबसे बड़े बेटे का नाम ‘कुद्रूस खान’ है जो पेशे से एयरपोर्ट में सिक्योरिटी ऑफिसर हैं। उनके दूसरे बेटे का नाम ‘सरफ़राज़ खान’ है जो पेशे से एक अभिनेता हैं। उनके तीसरे और सबसे छोटे बेटे का नाम ‘शाहनवाज़ खान’ है जो पेशे से अभिनेता और निदेशक हैं।

कादर खान के पसंदीदा चीज़ो की बात करे तो उनके पसंदीदा अभिनेता अमिताभ बच्चन हैं। कादर के पसंदीदा निर्देशक मनमोहन देसाई और प्रकाश महरा हैं। कादर का पसंदीदा रंग घूसर है। कादर और अभिनेता अमिताभ बच्चन एक समय पर बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे लेकिन निजी कुछ बातो की वजह से उन दोनों ने एक दूसरे से बात करनी छोड़ दी थी। कादर और अमिताभ ने एक साथ कई हिट फिल्मो में अभिनय किया था।

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