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करण जौहर द्वारा ‘चिकनी चमेली’ गाने को अश्लील बुलाने पर कटरीना कैफ का पलटवार

करन जोहर के चिकनी चमेली को अश्लील बुलाने पर कटरीना कैफ नाराज़

निदेशक, निर्माता और टीवी होस्ट करन जोहर ने, जब भी महिलाओं से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं तो उन्होंने खुलकर अपने विचार सामने रखें हैं। अनुपमा चोपड़ा को हाल ही में दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उन्होंने ये कसम खा ली है कि वे कभी धर्मा की फिल्मों में कोई भी आइटम गीत नहीं रखेंगे।

आइटम गानों पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा था-“मेरी पुरानी फिल्मों में आइटम गीत होने के कारण मैंने माफ़ी मांगी थी और मुझे नहीं लगता कि मैं ये दोबारा कभी करूँगा। एक लड़की के नाचने से मुझे कोई दिक्कत नही है, वो कोई आइटम नंबर नहीं है। आइटम गीत वो होता है जिसमे महिलाओं का इस्तेमाल होता है और जिसमे मर्द उन लोगों के लिए लालसा करते हैं जैसे ‘चिकनी चमेली’ में होता है। मुझे नहीं लगता कि मैं फिर वो दोबारा कभी करूँगा। धर्मा प्रोडक्शन की किसी फिल्म में ऐसा नहीं होगा और मैं ये सुनिश्चित करता हूँ। जैसे ‘देसी गर्ल’ एक आइटम गीत नहीं है मगर ‘चिकनी चमेली’ है। और मुझे नहीं लगता मैं कभी ये करूँगा। मैं ये गीत गाते गाते बड़ा हुआ हूँ-‘खम्बे जैसी खड़ी है, लड़की है या छड़ी है’, और मुझे कभी ये एहसास ही नहीं हुआ कि इस गाने का मतलब क्या है। फिर आप अचानक ये गीत गाते हो और कहते हो-‘हे भगवान, ये कितना महिला-द्वेषी है’।

और ये कितनी खराब बात है कि हमने इसे बनाया और आमिर खान जैसे बड़े अभिनेता इस गाने पर नाचे। उन्होंने खुद मेरे शो पर इसके लिए माफ़ी मांगते हुए कहा था कि वे ऐसा फिर कभी नहीं करेंगे। हम कभी सोचते ही नहीं है कि ये किस प्रकार के शब्द हैं। अगर कोई गाना बेहद खूबसूरत तरीके से लिखा गया है तो मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं है। ठीक उसी तरह जैसे गुलज़ार साहब ने ‘ओमकारा’ फिल्म के गीत लिखे हैं। वे जबरदस्त हैं। ‘ज़बान पे लागा, लागा रे, नमक इश्क का’- काफी खूबसूरत है। यहाँ तक कि ‘बीड़ी जलईले’ भी। बात ये है कि आप उस गीत को कैसे फिल्माते हो। आपको ये ध्यान रखना चाहिए कि आप ऐसा ना करे क्योंकि काफी हद तक लोग हमसे ही प्रेरणा लेते हैं।”

मगर लगता है कि करन की ये बात कटरीना कैफ को कुछ ख़ास पसंद नहीं आई और इसलिए डीएनए को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने पलटवार करते हुए कहा-

“मुझे नहीं पता था कि ऐसा कुछ कहा गया है मगर इस मामले में मेरे विचार थोड़े अलग हैं। मुझे लगता है कि ये उसपर निर्भर करता है जो ऐसे गानों पर प्रदर्शन देता है। मेडोना को तो सब जानते ही हैं, मुझे नहीं लगता कि वो खुद को एक समान की तरह महसूस करती होंगी। मुझे नहीं लगता कि बेयोंसे जो मंच पर बिकनी पहन कर प्रदर्शन देती हैं, वो खुद को समान की तरह महसूस करती होंगी। मायने ये रखता है कि उस गीत पर नाचते वक़्त आप कैसा महसूस करते हैं। मैं आपको बता सकती हूँ कि ‘चिकनी चमेली’ करते वक़्त मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मेरा इस्तेमाल किया जा रहा है। मैंने उस गीत का खूब आनंद उठाया था। मुझे नाचते वक़्त अच्छा लगा। मुझे एक पल के लिए किसी समान की तरह या कोई मेरी तरफ बुरी नज़र से देख रहा है, ऐसा कभी नहीं लगा। एकदम भी नहीं। ऐसा कितनी बार होता है कि लोग मुझसे गानों के लिए पूछते हैं और उनका कोई मतलब नहीं होता। मैं उन्हें बिलकुल भी नहीं करती हूँ भले ही मुझे नाचना कितना भी पसंद क्यूँ ना हो। हमें ऐसे धारणा नहीं बनानी चाहिए कि हर वो गीत जिसमे एक महिला प्रदर्शन कर रही है या आनंद ले रही है, वो महिलओं का इस्तेमाल कर रही है। ये सब एंगल और लेंस पर निर्भर करता है जिससे ये देखा जा रहा है।”

अब देखना ये है कि क्या कटरीना का जवाब सुनकर करन अपनी विचारधारा में परिवर्तन ला पाएँगे या वो अपनी फिल्मों में कभी आइटम गीत ना डालने वाली बात पर अड़े रहेंगे।

About the author

साक्षी बंसल

पत्रकारिता की छात्रा जिसे ख़बरों की दुनिया में रूचि है।

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