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ऑक्टोपस फार्मिंग ‘अनैतिक, पर्यावरण की दृष्टि से खतरनाक’

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लंदन, 12 मई (आईएएनएस)| शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनिया भर में तटवर्ती जल क्षेत्र में ऑक्टोपस फॉर्म बनाने की योजना नैतिक रूप से अक्षम्य व पर्यावरणीय रूप से खतरनाक है। शोधकर्ताओं ने निजी कंपनियों, शैक्षिक संस्थानों व सरकारों से इन उपक्रमों के लिए धन न देने की अपील की है।

गार्जियन की रविवार की रपट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि ऑक्टोपस की खेती करने के लिए, उन्हें खिलाने के लिए बड़ी संख्या में मछलियों व घोंघा (शेलफिश) को पकड़ने की जरूरत होगी। इससे धरती के समुद्री जीवन पर दबाब बढ़ेगा, जो पहले से ही खतरे में है।

न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय की प्रोफेसर जेनिफर जैक्वेट की अगुवाई वाले समूह ने तर्क दिया कि ऑक्टोपस अत्यधिक बुद्धिमान, जिज्ञासु प्राणी होते हैं।

जैक्वेट ने गार्जियन के संडे सप्लीमेंट, ऑब्जर्वर से कहा, “हम 21वीं सदी में कोई कारण नहीं देखते कि जटिल जानवर को बड़े पैमाने पर भोजन के स्रोत के रूप में देखा जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “ऑक्टोपस मछली और शेलफिश खाते हैं और उनके लिए बड़ी मात्रा में भोजन की आपूर्ति से खाद्य श्रंखला पर दबाव पड़ेगा। इसे लगातार जारी नहीं रखा जा सकता है। ऑक्टोपस फार्मिग नैतिक व पारिस्थितिक रूप से अनुचित है।”

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पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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