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एचटीटीपी क्या है? मतलब, जानकारी

एचटीटीपी http in hindi

एचटीटीपी की फुल फॉर्म (http full form in hindi)

एचटीटीपी की फुल फॉर्म होती है, हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (http – hyper text transfer protocol)

एचटीटीपी क्या है? (what is http in hindi)

यह एक तरह का प्रोटोकॉल है जो की हमारे काम के लिए बहुत ही आवश्यक है। यह डाटा को वेब सर्वर (web server) और क्लाईंट सर्वर की मदद से एक जगह से दूसरी जगह भेजने में काम आता है। पूरा डॉकयुमेंट दूसरे छोटे डॉकयुमेंट से बन कर काम में आता है जैसे की लेख, लेआउट, इमेज, विडियो आदि।

एचटीटीपी 1990 में बनाया गया था जो की समय के साथ साथ अच्छा और प्रभावी बनता जा रहा है। यह हाइपर टेक्स्ट डॉकयुमेंट को वेब पर डालने के काम में आता है जैसे की फोटो, विडियो आदि को अलग अलग सर्वरों पर डाला जाता है जिससे की हम आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें। हम इसमे एचटीएमएल का भी काफी इस्तेमाल करते हैं।

एचटीटीपी के हिस्से (parts of http in hindi)

एचटीटीपी एक क्लाईंट सर्वर प्रोटोकॉल है जिसमे की एक जना सिग्नल भेजता है। ज़्यादातर समय जो उपयोगकर्ता होता है वो वेब ब्राउज़र इस्तेमाल करता है इसको चलाने के लिए। जैसे की कोई रोबोट वेब पेज पर रेंगता रहता है जिससे की सर्च इंजिन को हम आसानी से देख सकें और इस्तेमाल कर सकें।

हमारी जो कोई भी मुश्किल होती है उसे सर्वर से भेजा जाता है उसके बाद सर्वर इस मुश्किल को सुलझा देता है और फिर हमारी दुविधा वाली मुश्किल का उत्तर दे देता है। यह जो उत्तर देता है उसे हम रेसपोनस (Response) बोलते हैं।

रेसपोनस और उत्तरों में काफी संस्थाएँ आती हैं जिनहे हम प्रॉक्सि बोलते हैं। यह काफी तरह के काम करते हैं इसे कई बार यह गेटवेय और कैचे भी बोलते हैं। जैसा की हमें पता है असलियत में ब्राउज़र की गुजारिश को सही करने में काफी कम्प्युटर लगे होते हैं और उसको बहुत से सर्वर भी उसकी पमुश्किलों को सही करते हैं।

राउटर और मॉड़म की भी इसमे काफी सही भूमिका होती है जिससे की हम मुश्किलों को आसानी से सुलझा पाएँ। वेब में जो स्तरित आकार होता है यह नेटवर्क और ट्रांसपोर्ट परतों में छुपा हुआ होता है जो की इस तरह के कार्य करने में काफी सक्षम होता है।

यूजर एजेंट (user agent in hindi)

यूजर एजेंट एक तरह का औज़ार है जो की यूजर की जगह काम करता है। यह काम ज़्यादातर वेब ब्राउज़र के द्वारा किया जाता है कुछ अपवादों में यह काम इंजीनियरों द्वारा लिखे गए कोड से भी कर सकते है। वेब डेवलपर जो होते हैं वो एप्स को डिबुग भी करते हैं एप्स की मदद से। ब्राउज़र हमेशा जो भी हम साइट लिखते हैं उसको चलाने में काम आता है, हालांकि हमें यह बोलना चाहिए की सर्वर की मदद से यह सब कुछ हो पा रहा है।

एक वेब पेज को दिखने के लिए ब्राउज़र एक सिग्नल भेजता है जिससे की उस पेज से एचटीएमएल डॉकयुमेंट को चलाया जाता है। यह फिर उस फ़ाइल को पार्स करता है जिससे की यह उस पेज की स्क्रिप्ट को चलाता है, लेआउट की जानकारी को स्क्रीन पर दर्शाता है और बाकी के जो भी सोर्स होते हैं उन्हे दर्शाता है। वेब ब्राउज़र उसके बाद इन सभी साधनो को मिलाता है और फिर जो उपयोगकर्ता होता है उसे पूरा का पूरा पेज सही से दिखा देता है।

जैसे जैसे डेवलपर के द्वारा उस पेज को अपडेट किया जाता है वैसे वैसे ही सर्वर हमें भी पेज को दर्शाता है। एक वेब पेज एक हाइपर टेक्स्ट डॉकयुमेंट है। जिसका मतलब यह है की उस पेज का जो लिखा हुआ कुछ भाग है टेक्स्ट के रूप में वो लिंक्स हैं जिनहे हम वेब पेज के द्वारा चला सकते हैं। ब्राउज़र जो होता है वो सिग्नल को एचटीटीपी के रूप में बदल देता है फिर यह हमें एचटीटीपी का रेसपोनस दिखा देता है और हमें स्क्रीन पर वेब पेज दिख जाता है।

वेब सर्वर (web server in hindi)

संवाद वाले जो चैनल होते हैं उनके दूसरी तरफ एक सर्वर होता है जो की उपयोगकर्ता के द्वारा इंटरनेट पर डॉकयुमेंट को चलाने में काम में आता है।

एक सर्वर वास्तव में एक ही मशीन के रूप में काम करता है। ऐसा शायद इसलिए होता है क्योंकि यह बहुत सारे सर्वरों का मिश्रण होता है जो की डॉकयुमेंट को बनाने और सॉफ्टवेयर आदि को टेस्ट करने के काम में आता है।

यह बहुत सारे सर्वरों को होस्ट करने के काम में आता है। एचटीटीपी 1.1 के साथ यह एक ही आईपी एड्रैस को शेयर करते हैं।

प्रॉक्सि (proxy in hindi)

काफी वेब ब्राउज़र और सर्वरों के बीच काफी कम्प्युटर और मशीन होती हैं जो एचटीटीपी का संदेश पहुँचाने का काम करती हैं।

इसका आकार परतों में होता है इसी वजह से यह नेटवर्क और पारदर्शक एचटीटीपी परतों की मदद से चलते हैं जो की इसकी क्षमता में काफी सहायक होता है। जो एपलिकेशन परतों में चलते हैं उन्हे हम प्रॉक्सि कहते हैं।

यह बहुत तरह के काम करते हैं –

  • यह कैचिंग करते हैं इसमे ब्राउज़र का जो कैचे डाटा होता है वो होता है।
  • यह फ़िल्टर का काम करते हैं जिससे की वाइरस नहीं आए और कम्प्युटर पर इसकी पूरी तरह से पकड़ हो सके।
  • यह लोड को बैलेन्स करने का भी काम करता है जिससे की हम बहुत सारे सर्वरों का लोड एक साथ उठा सकें।
  • यह औथेनटीकेशन का भी काम करता है जिससे की हम संसाधनो को सही से इस्तेमाल कर पाएँ।
  • लोगिंग में भी यह काफी मदद करता है जैसे की हमे किसी साइट पर लोग इन करना है तो यह उस साइट पर लोग इन करने में काम आता है।

एचटीटीपी के कुछ पहलू (facts about http in hindi)

  • एचटीटीपी को इस तरह से बनाया गया है की यह आसान हो और इसे लोग आसानी से पढ़ पाएँ।
  • यह सॉफ्टवेयर डेवलपर द्वारा भी आसानी से उपयोग किया जाता है और नए लोगों को भी इसमे डेव्लपमेंट में आसानी होती है।
  • एचटीटीपी पर एक ही समय में एक ही कनैक्शन पर दो काम नहीं किए जाते इसका मतलब यह है की हम एक ही टैब पर दो चीज़ें सर्च नहीं कर सकते।
  • कुछ मुश्किलों को काबू में लाने के लिए एचटीटीपी ने कुछ ठोस कदम भी उठाए हैं। जैसे की एचटीटीपी में पाइपलाइन सिस्टम को इस्तेमाल करना जिससे की इसको और प्रभावी बनाया जा सके और यह अच्छे परिणाम दे।

इस विषय से सम्बंधित यदि आपका कोई सवाल या सुझाव है, तो उसे आप नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

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अभिषेक विजय

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