आर्मी चीफ बिपिन रावत: पीओके से पहले जम्मू और कश्मीर के मुद्दों पर ध्यान देना है जरूरी

सेनाप्रमुख बिपिन रावत

बुधवार को आर्मी चीफ बिपिन रावत ने कहा-“भारत को पहले एकीकृत दृष्टिकोण की मदद से जम्मू और कश्मीर में होने वाली दिक्कतों जैसे ‘संकर युद्ध’ जो सीमा भर से फैलाया जा रहा है, सुलझाना चाहिए वजाय पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर(पीओके) को हथियाने की जिसकी इस्लामाबाद ने बड़ी चालाकी से कश्मीरी पहचान को मिटाने के लिए जनसांख्यिकीय ही बदल दी।”

आर्मी चीफ ने कहा कि भारत पूरे कश्मीर को लेकर सही दावा करती है और पीओके को भी उन्हें नहीं भूलना चाहिए। मगर अभी अपने वाले कश्मीर के ऊपर, सुरक्षा और सरकारी एजेंसियो के प्रयास और साथ ही साथ पाकिस्तान की तरफ से फैलाई गयी कट्टरता, भावना और झूटी बातो का भारत के उदार जनतंत्र वाली बेहतर कथा से प्रचार प्रसार करके पूरा नियंत्रण करना चाहिए।

उन्होंने कहा-“दूसरी तरफ दिक्कत ये है कि पाकिस्तान ने बड़ी चालाकी से पीओके की जनसँख्या बदल दी है, गिलगित बलिस्तान……. हमे नहीं पता कि जो लोग यहाँ आकर रह रहे हैं, वे असल कश्मीरी हैं या पंजाबी,……. कश्मीरी पहचान को पाकिस्तान की तरफ से काफी चालाकी से मिटा दिया गया है।”

बिपिन रावत, आईडीएसए के, 21वी सदी की ‘संकर संघर्ष’ की चुनौतियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की ‘करतारपुर कॉरिडोर‘ वाली पहल को किसी चीज़ से बिना जोड़े एक अलग नज़र से देखना चाहिए और भारत सरकार की बातो को ध्यान में रखना चाहिए कि आतंकवाद और बातचीत दोनों साथ साथ नहीं चल सकते।

लेक्चर के दौरान, उन्होंने कहा कि भारत भी ‘संकर युद्ध’ का शिकार है, जिसपे आजादी के समय से ही सोचे समझे, नियमित और अनियमित तरीको से विरोधी जनसँख्या और आधारिक संरचना पर हमले होते रहे हैं वजय सैन्य क्षमताओं के।

रावत ने कश्मीर में चलने वाली पथरबाज़ी और स्कूल बंद को ‘संकर युद्ध’ का हिस्सा बताते हुए कहा -“पाकिस्तान ने 1947-48 के जम्मू और कश्मीर ऑपरेशन्स से ही लगातार अनियमित चीज़े कायम रख रखी हैं, 1965 का युद्ध,……कारगिल दुर्गति, सब ‘संकर युद्ध’ के उदाहरण हैं। पूरा विश्व जानता है कि पाकिस्तान में लगने वाले आतंकी प्रशिक्षण शिविर को वहा की सरकारी एजेन्सिया ही पैसे देती हैं।”

मगर भारत एक विस्तारवादी देश ना होने के नाते, अपने पडोसी मुल्को के साथ शांति चाहता है और प्रतिशोध में आकर ऐसा कोई भी अपमानजनक ‘संकर युद्ध’, पाकिस्तान में अशांति लाने के लिए नहीं करेगा। असल में, वे सक्रिय ‘आक्रामक-रक्षात्मक’ रणनीति के तहत खुद को बचाएगा।

कश्मीरी युवाओ के ऊपर बात करते हुए बिपिन रावत ने कहा-“यहाँ के युवाओ को कट्टरता की भावनाओं में धकेला जा रहा है जिसके चक्कर में वे ऐसे अपराध करते हैं। उन्हें सड़को से बाहर निकालना पड़ेगा और पथरबाज़ी जैसी संस्कृति से पीछे छुड़ाना होगा।”

अपनी बात को ख़तम करते हुए उन्होंने कहा कि इंडिया के पास ज्यादा सैन्य क्षमता है। 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक की तरह वो इस बार भी सीमा पार जाकर अपनी ताकत दिखा सकता है मगर उन्हें ऐसे ‘मैट्रिक्स की वृद्धि’ सोच समझ के करनी होगी क्योंकि ऐसे कदम उठाने से बड़ी घटना भी हो सकती है।

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