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    सेनाप्रमुख बिपिन रावत

    जैसा कि जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र में पाकिस्तान की दिक्कत बढ़ती जा रही है, सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को आतंकवादी संगठनों में शामिल होने वाले युवाओं को एक कठोर चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें या तो वापसी करनी चाहिए नहीं तो सेना उनपर कठोर कार्यवाही करने पर मजबूर होगी। आतंकवादी संगठनो में भर्ती हुए युवाओ से अपील करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि उन्हें आत्मसमर्पण करने और बंदूक छोड़ने का अवसर दिया जा रहा है।

    “आतंकवादी संगठनो में शामिल होना युवाओ के लिए अपनी आयु को काम करने जैसा है। इसलिए हम आपको आत्मसमर्पण करने और बंदूक छोड़ने का अवसर दे रहे हैं। यदि लोग अब भी अहिंसा को नहीं छोडते तो सेना के पास आखरी विकल्प उन पर कारवाही करना ही रह जायेगा। सेना प्रमुख ने यह बयान सेना अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञों सरकार और पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को  ‘Changing Contours of Internal Security in India: Trends and Responses’. नामक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुई कहा।

    केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में अपने नीतिओ को ले कर असफल रही है ऐसा बयान जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्ला ने दिया था। जब सेना प्रमुख जनरल रावत को इस बयान पर टिपण्णी करने के लिए कहा गया तो उन्होंने केंद्र और आतंकवादियों के बीच सीधी बातचीत से इंकार कर दिया। हालाँकि, उन्होंने कश्मीरी अलगाववादियों से सरकार के इंटरलोक्यूटर दिनेश्वर शर्मा के साथ बातचीत करने का आग्रह किया, जिन्हें राज्य के सभी हितधारकों के साथ बात चीत करने का काम सौंपा गया है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत कहते हैं, भारत भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा को ले के चौकस है।

    उन्होंने कहा कि अगर कश्मीरी अलगाववादी सरकार के इंटरलोक्यूटर के साथ बात करना नहीं चाहते तो इसमें सरकार का कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा, “इंटरलोक्यूटर का काम लोगो से बात करना वह हर किसी के लिए खुला है जो उससे बात करना चाहता है। हम अप्रत्यक्ष वार्ता कर रहे हैं, अगर वे (अलगाववादी) बात नहीं करना चाहते हैं, तो हम क्या कर सकते हैं?

    इस बीच, पंजाब में सुरक्षा चिंताओं के मुद्दे को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में विद्रोह को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे बाहरी बलों के खिलाफ पूर्ण कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा, “पंजाब के मुख्यमंत्री चिंतित हैं और सीधी कार्रवाई कर रहे हैं ताकि हिंसा फिर से फैल न सके। बाहरी लोग कोशिश करेंगे लेकिन पंजाब के लोग उन्हें ऐसा करने नहीं देंगे।”

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