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G-7 Summit 2022: जलवायु से सबंधित भारत के प्रदर्शन पर किया गया दावा – “कितना हक़ीक़त, कितना फ़साना?”

PM Modi at G-7 Summit

PM Modi at G-7 Summit:- जर्मनी के मुनीच में दुनिया के 7 सबसे सम्पन्न अर्थव्यवस्थाओं के समूह G-7 के शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने हिस्सा लिया जहाँ प्रधानमंत्री का स्वागत जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शोलज ने की।

न्यूज एजेंसी ANI ने एक वीडियो पोस्ट किया जहाँ PM मोदी से अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन, कनाडा के जस्टिन ट्रेड्यू आदि बड़े गर्मजोशी से मिले।

PM Modi @ G-7 Summit: मुख्य बातें

G-7 Summit
G-7 Summit में एक सत्र को सम्बोधित करते PM मोदी (तस्वीर साभार : Mint)

PM Modi ने इस शिखर सम्मेलन के एक सत्र में, जो जलवायु, ऊर्जा व स्वास्थ्य पर आधारित था, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जलवायु के प्रति भारत का निश्चय उसके प्रदर्शन से साफ़ झलकता है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत ने गैर-जीवाश्म (Non Fossil)  स्त्रोतों पर 40%  ऊर्जा-निर्भरता लक्षित समय (target) से 9 साल पहले ही हासिल कर लिया है। उन्होंने आगे कहा कि, यद्यपि कि दुनिया की 17% आबादी भारत मे निवास करती है, तथापि दुनिया मे कुल कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान महज 5% है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि यह एक भ्रांति है कि गरीब देश पर्यावरण को ज्यादा क्षति पहुँचाते हैं। हिंदुस्तान का हज़ारों सालों का इतिहास इस विचारधारा को ख़ारिज करती है।

बता दें कि पर्यावरण व जलवायु से इतर G-7 की बैठक में मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध , खाद्य सुरक्षा तथा आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होनी है जहाँ यह अपेक्षित है कि G-7 के समूह देश, खासकर अमेरिका, रूस से तेल आयात पर प्रतिबंध की घोषणा कर सकते हैं।

कितना हक़ीक़त, कितना फ़साना….?

खैर, मुद्दे पर वापस लौटते हैं कि जो मोदी ने भारत की पर्यावरण के प्रति निश्चय को लेकर G-7 Summit के मंच से जो कहा, वह कितना हक़ीक़त है और कितना फ़साना…. PM मोदी के अनुसार भारत का जलवायु के प्रति निश्चय उसका प्रदर्शन बोलता है।

हाल ही में प्रकाशित विश्व पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (Environment Performance Index) 2022 के अनुसार भारत दुनिया के 180 देशों में सबसे निचले पायदान पर है। अब अगर इस रिपोर्ट को मानें तो PM Modi ने जो कहा, क्या वह पूरा झूठ है?? जवाब है- नहीं।

प्रधानमंत्री ने जो कहा वह अर्धसत्य है। उन्होंने भारत के प्रदर्शन की बस उतनी ही तस्वीर खींची जो G-7 Summit जैसे एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कूटनीति के लिहाज से उचित है। उन्होंने G-7 के मंच से उन तमाम देशों को एक आईना दिखाया है जो भारत चीन जैसे विकासशील देशों पर कार्बन उत्सर्जन का आरोप लगाते रहते हैं।

PM मोदी ने G-7 Summit के मंच से स्पष्ट किया कि हमने वादा किया था, वह पूरा कर हैं और निर्धारित समय से पहले ही पूरा कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि फिर भारत पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक में फिसड्डी क्यों है?

दरअसल भारत को अगर अपने तरक्की के उस आयाम को छूना है जिसका सपना PM मोदी समेत तमाम भारतवासी देख रहे हैं, तो पर्यावरण व जलवायु सम्बंधी कदम जिसकी चर्चा मोदी ने की है, वह काफी नहीं है।

हक़ीक़त यही है कि भारत को ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को किसी भी तरह तेजी से कम करना होगा। यही बात पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI 2022) में भी है कि भारत जिस दर से कदम उठा रहा है, इस रफ्तार से 2050 तक भी ग्रीनहाउस गैसों को लेकर ” नेट जीरो इमिसन ( Net Zero Emission)” को हासिल नहीं कर सकता।

पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (EPI) येल और कोलंबिया विश्विद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा प्रकाशित की जाने वाली एक विश्वसनीय रिपोर्ट है जो दुनिया के 180 देशों के सरकारों द्वारा दिये गए आंकड़ों के आधार पर उन देशों के प्रदर्शन को विश्लेषित करता है।

इन आंकड़ों में प्रमुखता से जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय जन-स्वास्थ, जैव-विविधता, आदि सहित कुल 40 नियामकों को सम्मिलित किया जाता है।

इसलिए इस रैंकिंग में भारत का नीचे से टॉप करना इस बात की तरफ़ इशारा कर रहा है कि सरकार पानी की गुणवत्ता व हवा की स्वच्छता, जैव विविधता, और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को उस गंभीरता से नहीं ले रही है जितनी वक़्त की जरूरत है।

भारत,नाइजीरिया आदि देश जो इस सूची में नीचे स्थित हैं, उन्हें अतिशीघ्र अपने अर्थव्यवस्था में कार्बन उत्सर्जन की मात्रा को कम करने की आवश्यकता है। इसके लिये इन देशों को लंबे समय के लिए एक समावेशी वैज्ञानिक पारिस्थितिक-पुनर्वास ( Large-Scale Long-Term Inclusive Scientific Ecological Restoration) की आवश्यकता है।

दरअसल भारत वैश्विक स्तर पर कुल  ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 6.8% योगदान देता है जिसे कम करने की आवश्यकता है। क्योंकि बेतहाशा बढ़ती आबादी के कारण जंगलों के सफाया होने से कार्बन-पृथक्करण (Carbon Sequestration) की प्रक्रिया अवरुद्ध हुई है; वहीं उसी आबादी कि बढ़ती मांगों के कारण फैक्ट्रीज व वाहनों से उत्सर्जित प्रदूषकों की मात्रा दिन ब दिन बढ़ती जा रही है।

अतः, G-7 Summit के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने जो कहा, वह “कितना हकीकत है और कितना फ़साना” – यह आप तय करें लेकिन इतना जरूर है कि कूटनीति के लिहाज़ से पश्चिमी देशों को एक आईना जरूर दिखाया है।

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Saurav Sangam

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