रविवार, जनवरी 19, 2020

2002 गुजरात दंगा में मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

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आदर्श कुमार
आदर्श कुमार ने इंजीनियरिंग की पढाई की है। राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कई वेबसाइट पर स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। द इन्डियन वायर पर वो राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते हैं।

2002 गुजरात दंगे में एसआईटी द्वारा नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट देने के खिलाफ ज़किया जाफरी द्वारा दायर की है याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवम्बर को सुनवाई करेगा। ज़किया जाफरी पूर्व कांग्रेस संसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं।

2002 में गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में प्रधान मंत्री मोदी और कई अन्य लोगों को दी गई क्लीन चिट को देखते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने पिछले साल जकीया जाफरी द्वारा उठाई गई याचिका को खारिज कर दिया था और मामले में आगे की जांच के लिए उन्हें उच्च न्यायलय जाने का निर्देश दिया था।

28 फ़रवरी 2002 को गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसाइटी में उन्मादी भीड़ ने कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत 68 लोगों की हत्या कर दी थी।

मार्च 2008 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी द्वारा जाफरी के आरोपों की जांच की गई।

2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान एसआईटी ने नरेंद्र मोदी से 9 घंटे तक पूछताछ की थी। बाद में इस पुरे मामले में नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दे दी गई थी।

मोदी समेत 59 अन्य लोगों को क्लीनचिट देते हुए एसआईटी ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी कि मोदी या अन्य के खिलाफ कोई ऐसे सबूत नहीं मिले हैं जिससे उन्हें दोषी ठहराया जा सके।

9 फरवरी 2012 को जकिया जाफरी ने एक एनजीओ कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के साथ मोदी को क्लीनचिट दिए जाने के खिलाफ निचली अदालत में एक याचिका दायर की थी।

दिसंबर 2013 में निचली अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट को बरक़रार रखा था। उसके बाद जाफरी और सीतलवाड़ ने  गुजरात उच्च न्यायलय का रुख किया था।

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