आर्थिक रूप से कमजोर तबके को 10 फीसदी आरक्षण देने वाला बिल लोकसभा में पास

लोकसभा

एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में यूनियन कैबिनेट से पारित होने के अगले ही दिन आर्थिक रूप से असमर्थ लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण बिल को लागू करने वाला संविधान संशोधन बिल लोक सभा में दो तिहाई बहुमत के साथ पास हो गया। बिल के समर्थन में 323 वोट पड़े जबकि विरोध में सिर्फ 3 वोट पड़े।

124वां संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पेश होने के बाद शाम 5 बजे इस पर बहस शुरू हुई और रात के 10 बजे तक विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बिल के पक्ष और विपक्ष में तर्क दिए। शुरू में मीडिया में ये खबर आई कि ये बिल सिर्फ सवर्णों के लिए है लेकिन सरकार के मंत्री थावरचंद गहलोत ने बिल पेश करते हुए ये साफ़ किया कि ये आर्थिक आरक्षण है ना कि धार्मिक या जातीय। उन्होंने कहा कि इस आरक्षण में हिन्दू के अलावा मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध सभी धर्म के आर्थिक रूप से अक्षम लोगों के लिए है।

बिल पेश करने के बाद वित्त मंत्री ने इस बिल से जुडी विपक्ष की सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया। जब विपक्ष ने सवाल उठाये कि आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट की तय सीमा 50 फीसदी से अधिक होने के कारण ये बिल कोर्ट में नहीं टिक पायेगा क्योंकि पहले भी ऐसा हो चूका है तो जेटली ने कहा पहले के बिल कोर्ट में इसलिए खारिज हो जाते थे क्योंकि वो एक अध्यादेश के रूप में लागू होते थे लेकिन ये बिल कोर्ट में खारिज न हो इसलिए संविधान में संशोधन किया जा रहा है।

कांग्रेस ने बिल पेश करने के वक़्त पर सवाल उठाये। कांग्रेस की तरफ से बोलते हुए दीपेन्द्र हुडा ने कहा कि सरकार सत्र के आखिरी दिन ये बिल ले कर आई है इसलिए सरकार की नियत पर सवाल खड़े होते हैं। हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस इस बिल का स्वागत करती है।

समाजवादी पार्टी की तरफ से बोलते हुए धर्मेन्द्र यादव ने मांग की कि आबादी के अनुपात में सरकार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था करे। उन्होंने भी बिल को समर्थन देने की घोषणा की। बीजू जनता दल, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर ने भी पिल के पक्ष में मतदान किया।

राष्ट्रीय जनता दल ने इस बिल को धोखा बताते हुए बिल का विरोध किया।

संसद में संविधान संशोधन बिल पर गंभीर चर्चा के दौरान हलके फुल्के क्षण भी आये। भाजपा की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी और इण्डिया के सांसद रामदास अठावले जब बोलने के लिए उठे तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए एक कविता सुनाई जिससे संसद में ठहाके गूँज उठे।

लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में इस बिल को पेश किया जाएगा। राज्यसभा में सरकार के पास नंबर नहीं है ऐसे में वहां उसे कांग्रेस को मनाने में परेशानी आ सकती है।

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