Wed. Oct 5th, 2022
    युवाओं में बढ़ती हार्ट-अटैक की समस्या

    Heart Attacks In Young People: जिंदगी की घड़ी को आज से कुछ 5-7 साल पहले घुमाएं तो साधारण मान्यता यही थी कि हार्ट-अटैक की समस्या बुजुर्गों और उम्रदराज लोगों तक ही सीमित थी। लेकिन आज अगर अपने चारों तरफ़ ही नज़र घुमाकर देखिये तो पाएंगे कि यह तो वर्षों पुरानी बात है।

    पिछले आधा-एक दशक में हार्ट-अटैक की समस्या युवाओं के बीच भी तेजी से बढ़ी है और अचानक ही यह विचार बदल गया है। यहाँ युवा वर्ग से मेरा मतलब 40 साल से कम उम्र वाले आयुवर्ग से है।

    कल भारतीय जनता पार्टी की नेत्री सोनाली फोगाट का हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह मात्र 42 साल की थीं।अदाकार सिद्धार्थ शुक्ला, डेनिश फुटबॉलर क्रिस्टियन एरिक्सन से लेकर अभी बीजेपी नेता सोनाली फोगाट तक ऐसे कई बड़े नाम हैं जो समय से काफी पहले ही हार्ट-अटैक का शिकार हुए और इनमें से कुछ तो दुनिया को अलविदा कह गए।

    आज से कुछ साल पहले यह माना जाता था कि अपवादों को छोड़ दें तो 40 साल से कम उम्र में हार्ट अटैक की समस्या तो नहीं हो सकती; लेकिन आज 25% हार्ट-अटैक के शिकार व्यक्ति 40 से कम उम्र का है। (संदर्भ: इंडियन हार्ट असोसिएशन रिपोर्ट)

    NDTV.COM के एक रिपोर्ट के मुताबिक, 40 साल से कम उम्र के व्यक्तियों में भी एक और भयावह तथ्य यह है कि 20-30 साल आयुवर्ग के लोगों के बीच यह समस्या लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है। इसी रिपोर्ट के अनुसार, इन आयुवर्ग के लोगों में 2002-2016 के बीच हार्ट-अटैक की समस्या 2%प्रति वर्ष की दर से बढ़ी है जो कि चिंताजनक स्तर पर है।

    सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ है कि हार्ट-अटैक की समस्या इतनी तेजी से अचानक बढ़ गयी? यह कोई कोरोना या मलेरिया जैसी महामारी तो है नहीं फिर क्यों अब न सिर्फ बुजुर्ग बल्कि कम उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं?

    इसी जवाब को खंगालने के दौरान इंटरनेट पर कई एक्सपर्ट की राय और बिलासपुर रेलवे डिवीज़न हॉस्पिटल के चिकित्सकों से बात करने पर जो बात है सामने आई-  आज के युवाओं की “सो कॉल्ड कूल या चिल वाली लाइफस्टाइल”..

    बिलासपुर डिविजन रेलवे हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर श्री ए. के. झा बताते हैं कि मुख्यतः 6 वजहें हैं जो आजकल के युवाओं को हार्ट-अटैक के लिए आसान शिकार बनाती हैं।

    1. आज के युवाओं का जीवनचर्या और जीवनशैली
    2. शराब, सिगरेट आदि का अतिव्यसन
    3. जरूरत से ज्यादा वजन ( तथा Obesity)
    4. तनाव (Career, Love life आदि के कारण)
    5. डायबिटीज
    6. शारीरिक परिश्रम से दूरी

    जीवनचर्या और जीवनशैली एक ऐसा आयाम है जो हमारे जीवन की गति और दिशा दोनों निर्धारित करती है। “So Called Cool & Chilled Lifestyle” जो बंद AC कमरों के अंदर रहने वाले लोग दिन भर फोन और WiFi के तरंगों के शिकार हो रहे हैं। लोगों के खान पान में भी काफी बदलाव आया है। फ़ास्ट फूड तथा जंक फ़ूड कल्चर ने आज के युवाओं को जकड़ कर रखा है।

    बचा वक़्त PubG जैसे वीडियो गेम में उलझे रहने से बाहर की दुनिया से एकदम संबंध खत्म हो जा रहे हैं। नतीजतन छोटी-छोटी बात पर आज का युवा मानसिक तनाव और अन्य संबंधित विकार का शिकार हो रहा है।

    करियर की संभावना, माता पिता का अपने बच्चों के प्रति तुलनात्मक रवैया तथा इस से जुड़ा सामाजिक दवाब के साथ-साथ  भारत मे प्रोपोज़, ब्रेक-अप और पैच-अप जैसे प्रेम-सम्बंधो के नए रूप ने आये दिन युवाओं को स्ट्रेस और हाइपरटेंशन का शिकार बनाया है।

    इन सब से इतर, यह किसी से छुपी बात नहीं है कि भारत दुनिया का “डायबिटीज कैपिटल” बन गया है। हर उम्र के लोग तेजी से डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं जो खून का हृदय में प्रवाह को अचानक रोक देने के लिए अधिकतम मामलों में जिम्मेदार है।

    बची-खुची कसर भारत के शहरों में प्रदूषण से पूरी हो जाती है। प्रदूषण से मेरा मतलब सिर्फ हवा प्रदूषण नहीं बल्कि ध्वनि प्रदूषण या खाने पीने की चीजों में मिलावट, बायो-एकुमुलेसन (Bio Accumulation), बायो-मैग्निफिकेसन (Bio Magnification) आदि सब से है।

    कुल मिलाकर पिछले 2 दशकों में हमने तरक्की तो खूब की है लेकिन अपने युवाओं को जीने के लायक एक अच्छा माहौल नही तैयार कर पाए हैं। नतीजतन आज का युवा तनाव, डायबिटीज, अतिव्यसन आदि का शिकार हो रहा है।

    शेष, आज के युवाओं ने भी अपनी जीवनशैली से हार्ट-अटैक जैसी बीमारी को आमंत्रण देने में कोई कसर नही छोड़ी है।नतीजतन, “डायबिटीज कैपिटल” कहलाने वाला यह देश हार्ट-अटैक कैपिटल बनने के दरवाजे पर खड़ा है।

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