सोमवार, फ़रवरी 17, 2020

सीपीईसी के जरिये चीन पाकिस्तान के भूभाग पर चाहता है नियंत्रण: अमेरिकी विद्वान

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

अमेरिकी विद्वान नें चीन-पाकिस्तान की सीपीईसी योजना के बारे में कहा कि “चीन के लिए सीपीईसी परियोजना अपनी सेना को मज़बूत करने के लिए एक भू-रणनीतिक संपत्ति है और पाकिस्तान इस कपट संधि में चीन के साथ सभी बलोच नागरिकों को मारने पर तुला हुआ है ताकि बलूचिस्तान और उसके संसाधन चीनी शोषण के लिए मुक्त हो जाए।”

सीपीईसी एक भू-रणनीतिक परियोजना

चीन-पाक आर्थिक गलियारे में बीजिंग ने 62 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह गलियारा पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रान्त को चीन के शिनजियांग शहर से जोड़ेगा। अमेरिकी बुद्धिजीवी सी. क्रिस्टीन फेयर ने कहा कि “पाकिस्तान इस परियोजना के लिए एक बड़े कर्ज के गड्ढे में गिरता जा रहा है जो सिर्फ अमीरों के लिए ही फायदेमंद होगी। हमें अंदाज़ा भी नहीं है कि सीपीईसी की असल कीमत क्या है।”

श्रीलंका को मजबूरन अपनी सम्प्रभुता सौंपी पड़ी

क्रिस्टीन नें ANI को कहा कि “यह प्रोजेक्ट्स प्रतिद्वंदता के लिए नहीं स्थापित किया गया है, बल्कि चीन ने लागत तय की और पाकिस्तान ने कर्ज ले लिया है। पाकिस्तान चीन के साथ सभी बलोच नागरिकों को मारने के लिए मिला हुआ है ताकि बलोचिस्तान और उसके संसाधन का शोषण चीन के लिए आसान हो जाए।”

अन्य देशों ने चीन के शोषण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “चीन ने मलेशिया और श्रीलंका के साथ क्या किया। यह प्राइवेट खजानो से प्राइवेट जेबो तक धन पंहुचने  मार्ग है। श्रीलंका के साथ क्या हुआ, दरअसल उन्हें चीनियों के हाथों अपनी क्षेत्रीय सम्प्रभुता और हबनटोटा बंदरगाह सौंपना पड़ा था।”

उन्होंने कहा कि “यह आर्थिक गलियारा नहीं है। आर्थिक गलियारे के लिए आर्थिक व्यवहार्य होना बेहद जरुरी है लेकिन यहां कुछ भी नहीं है। इसकी लागत ग्वादर से शिनजियांग तक आवाजाही से छह गुना अधिक है। अगर आप नक्शा देखेंगे तो मालूम होगा कि ग्वादर से पहले कराची जाना होगा और फिर उत्तर की तरफ, तो सीधे कराची की तरफ चीजों को क्यों नहीं मोड़ा गया है। यह कोई आर्थिक तुक नहीं बनता है। मेरे जैसे विद्वानों के मुताबिक यह भू रणनीतिक परियोजना है। चीन ग्वादर पर सैन्यकरण करना चाहता है।”

भारत- पाक संघर्ष चाहता है चीन

अमेरिकी बुद्धिवजीवी ने कहा कि “चीन द्वारा मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी की सूची में शामिल करने से अड़ंगा लगाने के पीछे मकसद भारत-पाक के बीच मे विवाद को जारी रखना है। यह चौथी दफा है जब चीन ने ऐसा किया है। मेरे ख्याल से काफी लोगों ने उम्मीद जताई थी कि पुलवामा आतंकी हमले और बालाकोट में जवाबी कार्रवाई चीन को भड़काने के लिए काफी है। पुलवामा और मुंबई आतंकी हमला तुलनात्मक नहीं है।”

उन्होंने कहा कि इसके पीछे का कारण “पाकिस्तान को चीन का लक्ष्य भारत के साथ संघर्ष के लिए पाकिस्तान को उकसाना है। लेकिन चीन दोनों मुल्कों का युद्ध नहीं चाहता है, क्योंकि अगर जंग होती तो चीन कभी पाकिस्तान का साथ नहीं देता और यह चीन को बेनकाब कर देता। चीन के नजरिये से आतंकी समूहों से कोई गंभीर परिणाम नहीं होगा क्योंकि लेट और जेईएम पाकिस्तान का अच्छी तरह से प्रतिनिधित करते हैं।”

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