पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र करें कार्रवाई, बलूचिस्तान के प्रदर्शनकारियों ने की मांग

बलूचिस्तान

बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने बुधवार संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन का आयोजन किया और पाकिस्तानी आर्मी द्वारा बलोचिस्तान में किये जा रहे अत्याचारों को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

बलोच वौइस् एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में पाकिस्तानी सुरक्षा विभागों के अपराधों को प्रदर्शित किया गया है और सेना पर आरोप पर आरोप लगाया कि वे बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं का अपहरण और बर्बर हत्या कर रहे हैं।

ANI के मुताबिक बीवीए के प्रमुख मुनीर मंगल ने कहा कि “हम संयुक्त राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं और पाकिस्तान में मानवधिकार उल्लंघन के दूत बनना चाहते हैं। दुर्भाग्यवश बलोच आवाम सेना का अत्याचार झेल रही है, हमारी पहचान खतरे में हैं और हमारी जमीन पर अतिक्रमण किया जा चुका है।”

उन्होंने कहा कि हम अंतर्राष्ट्रीय संघठन से अत्याचार से पीड़ित आवाम की मदद के लिए एक अलहदा किरदार निभाने का अनुरोध करना चाहेंगे। यहां पर एक ऐसे देश कानूनों का उल्लंघन कर रहा है जो यूएन का सदस्य है।”

एक अन्य प्रदर्शनकारी नादिरा कादरी बलोच ने कहा कि चीनी की करोड़ो की परियोजना चीन पाक आर्थिक गलियारे की शुरुआत के बाद सेना का अत्याचार काफी हद तक बढ़ गया है। सीपीईसी को रोकिए क्योंकि यह बलोच नागरिकों की हत्या होगी और हम यूएन से आग्रह करने चाहेंगे कि अपनी संधियों और कन्वेंशन का इस्तेमाल कर बलोच नागरिकों की सहायता करें।”

उन्होंने कहा कि बलोच नागरिक मछली की तरह जल के लिए तरस रहे हैं। पीने वाले सभी जल संसाधनों पर चीनी कंपनियों ने अपना आधिपत्य स्थापित कर रखा है। हमारे बच्चे भूख और प्यास से मर रहे हैं।”

नाइला ने कहा कि हम यूएन से मांग करना चाहेंगे कि इसमे हस्तक्षेप करे और यूएन की निगरानी टीम को यहां के हालातों का जायजा लेने भेजे। बलोचिस्तान से एक बड़ी संख्या में लोग गायब है। कथित तौर पर उन्हें कारावास में प्रताड़ित किया जा रहा है। इसमे से काफी लोगो को सुरक्षा विभागों द्वारा मारे जाने का संदेह भी है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के नागरिक खुद को पाकिस्तान के अन्याय और अत्याचारों से दबा हुआ मानते हैं। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सोमवार को व्यापार स्तर पर प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में बच्चे, महिलायें व वृद्ध’ हमें न्याय चाहिए’ और ‘बलोच के गुम व्यक्तियों की रिहाई’ के नारे लगा रहे थे।

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