सिम्बा के अभिनेता सोनू सूद ने फिल्म की सफलता के बाद अपने माता-पिता के नाम लिखी एक भावुक सी चिट्ठी

सिम्बा के अभिनेता सोनू सूद ने फिल्म की सफलता के बाद अपने माता-पिता के नाम लिखी एक भावुक सी चिट्ठी

रोहित शेट्टी निर्देशित फिल्म “सिम्बा” दर्शको को बहुत पसंद आ रही है और शायद यही कारण है कि फिल्म अभी भी सिनेमाघरों में बनी हुई है। फिल्म की कामयाबी देख कर अभिनेता सोनू सूद काफी भावुक हो गए हैं। उन्होंने अपने माता-पिता के लिए एक चिट्ठी लिखी है जिसमे उन्होंने उनका धन्यवाद किया है। इंस्टाग्राम पर साझा की इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि वे उन्हें कितना याद करते हैं।

सोनू जिन्होंने फिल्म में दूर्वा रानाडे नाम के विलन का किरदार निभाया था, उन्होंने सोशल मीडियाके जरिये लिखा-“आज जब मुझे मेरी नयी फिल्म की कामयाबी के लिए इतने प्यार और सम्मान भरे बधाई के कॉल आते हैं तो एक ऐसा कॉल है जिसको मैं सबसे ज्यादा याद करता हूँ। आप दोनों का कॉल। ऐसा कॉल जो मेरी हर छोटी सी उपलब्धियों पर भी आता था। आज सबकुछ आप दोनों के बिना अधूरा लगता है।”

“सिम्बा” ने दो हफ्तों में ही 212.43 करोड़ रूपये की कमाई कर ली है। अभी भी सिनेमाघरों में वे अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ रही है।

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Miss u Mom n Dad ❤️❤️

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45 वर्षीय अभिनेता ने 2016 में अपने पिता शक्ति सागर सूद को खो दिया और उनकी माँ का निधन वर्ष 2007 में हो गया। चिट्ठी में उन्होंने खेद व्यक्त किया कि उनके माता-पिता उनकी सफलता का आनंद नहीं ले सकते। “शुरुआती वर्षों में जब मैं क्राफ्ट सीखने की कोशिश कर रहा था, मुझे आपके प्रेरक कॉल और वो प्रेरक चिट्ठी याद हैं, जो मेरे पास अभी भी हैं। समय बहुत तेज़ी से उड़ गया। सफलता मिली, लेकिन जिनके लिए मैंने इतने सालों तक कड़ी मेहनत की, वे इसे नहीं जी पाए। कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं एक बेटे के रूप में असफल रहा।”

आगे और कड़ी मेहनत का वादा कर, सोनू ने चिट्ठी को खत्म करते हुए लिखा-“कभी कभी मैं सोचता हूँ कि काश मैं ये और पहले हासिल कर पाता। मुझे मांफ करना माँ और पापा। जब भी कामयाब होता हूँ आपको याद करता हूँ। जब भी असफल होता हूँ आपको याद करता हूँ। मैं आपको गर्व महसूस करवाने के लिए अभी भी कड़ी मेहनत करूँगा। आप जहां भी हों, खुश रहें और मुझे पता है कि जो सफलता मुझे अब मिल रही है आप ही के कारण मिल रही है।”

“सिम्बा” अंदाज़ में चिट्टी के अंत में उन्होंने लिखा-“माँ और पिता के पास होने से, ज़िन्दगी माइंड-इच-ब्लोइंग होती।”

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