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संख्या पद्धति गणित में क्या है? सूत्र, इतिहास

संख्या पद्धति number system in hindi

संख्या पद्धति क्या है? (number system in hindi)

संख्या पद्धति संख्याओं को व्यक्त करने के लिए लिखने की पद्धति है। यह मैथमेटिकल नोटेशन है जो कि एक सेट के संख्याओं को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है। किसी भी संख्‍या को निरूपित करने के लिए एक विशेष संख्या पद्धति का प्रयोग किया जाता हैं।

प्रत्‍येक संख्या पद्धति में प्रयोग किए जाने वाले अंक या अंको के समूह से उसको दर्शाया जाता हैं। किसी भी संख्‍या में अंको (Digits) की स्थिति दायीं से बायीं ओर गिनी जाती हैं।

आदर्श रूप में, एक संख्या पद्धति:

  • संख्याओं के एक उपयोगी सेट को व्यक्त करता है।
  • संख्याओं की बीजगणितीय और अंकगणितीय संरचना को बताता है।

गणित में संख्या पद्धति (number system in maths in hindi)

1. प्राकृतिक संख्यायें (Natural numbers)-

संख्याओ 1,2,3,4,5,……..आदि को प्राकृतिक संख्याएं कहते हैं। स्पष्ट है कि प्राकृतिक संख्याएं अनगिनत होती हैं। प्राकृतिक संख्याओं के सेट {1,2,3,4,5….} को N से व्यक्त किया जाता है।

साधारण भाषा में कहें तो जिन संख्याओं का प्रयोग गिनने के लिए किया जाता है प्राकृतिक संख्याएं कहलाती हैं। अतः ‘0’ इनमें शामिल नहीं है।

प्राकृतिक संख्याओं के गुण (properties of natural numbers in hindi)

  1. दो प्राकृतिक संख्याओं का योगफल सदैव प्राकृतिक संख्या ही होता है।
    उदाहरण – 4 + 5 = 9 एक प्राकृतिक संख्या है।
  2. दो प्राकृतिक संख्याओं का घटाव एक प्राकृतिक संख्या हो यह जरूरी नहीं है।
    उदाहरण : 8 – 4 = 4 एक प्राकृतिक संख्या है जबकि 5 – 6 = -1 एक प्राकृतिक संख्या नहीं है।

इसी प्रकार दो प्राकृतिक संख्याओं का गुणनफल एक प्राकृतिक संख्या ही होता है जबकि भागफल एक प्राकृतिक संख्या हो यह जरूरी नहीं है।

2. पूर्णांक (Integers in hindi):

पूर्णांक (Integers) वास्तविक संख्याओं का सेट होता है जिनमें प्राकृतिक संख्याएं,उनके धनात्मक प्रतिलोम (additive inverse) तथा 0 शामिल है। इसमें फ्रैक्शनल संख्याएं (fractional numbers) शामिल नहीं है। इन्हें Z से प्रदर्शित करते हैं।

उदाहरण- {…..-3,-2,-1,0,1,2,3…..} पूर्णांक संख्याओं का सेट है। इनमें 4.56, 6.76…आदि संख्या शामिल नहीं है।

पूर्णांक के गुण (properties of integers in hindi)

  1. पूर्ण अंक संख्याओं का योगफल, घटाव तथा गुणनफल एक पूर्णांक ही होता है।
    उदाहरण : -5 + 4 = -1; 4 – 4 = 0 तथा 5 × 6 = 30 सभी पूर्णांक ही है।
  2. इनका भागफल एक पूर्णांक हो, यह जरुरी नहीं है।
    उदाहरण: 30/6 = 5 एक पूर्णांक है जबकि 4/5 = 0.8 नहीं।

3. परिमेय संख्याएं (Rational numbers in hindi):

परिमेय संख्याएं वें संख्याएं होती हैं जिन्हें दो पूर्णांक के अनुपात के रूप  में व्यक्त किया जा सकता है।
उदाहरण: 1/3 और – 5/6 दोनों परिमेय संख्याएं हैं।

परिमेय संख्या का सूत्र:

सभी पूर्णांक z, परिमेय संख्याएं होते हैं क्योंकि इन्हें z/1 के रुप मे लिखा जा सकता है।

  • परिमेय संख्याओं का योग,अंतर, गुणनफल तथा भागफल एक परिमेय संख्या ही होती है। (जबकि 0 से विभाजित ना किया जाये)

4. अपरिमेय संख्याएं (Irrational numbers in hindi):

एक अपरिमेय संख्या एक संख्या है जिसे किसी भी पूर्णांक p और q के लिए p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। अपरिमेय संख्याओं में दशमलव विस्तार होते हैं जो न तो समाप्त होते हैं और न ही आवर्ती (periodic) बन पाते हैं।

उदाहरण: √2 =1.41421356237309… एक अपरिमेय संख्या है क्योंकि √2 का विस्तार करने पर इसके दशमलव के बाद के अंक  ना तो समाप्त हो रहे हैं और ना ही उनकी पुनरावृत्ति रही है।

इसी प्रकार,
π (pi), π=3.14159265358979…
e=2.71828182845904… भी अपरिमेय संख्याएं हैं।

5. वास्तविक संख्याएं (Real numbers in hindi):

वास्तविक संख्याएं,सभी परिमेय संख्याएं तथा अपरिमेय संख्याओं का सेट है। साधारण शब्दों में बोलें तो संख्या रेखा पर सभी संख्याएं वास्तविक संख्याएं हैं। इसे R से प्रदर्शित किया जाता है।

6. सम्मिश्र संख्याएं (complex numbers in hindi):

सम्मिश्र संख्याएँ (complex number)  वास्तविक संख्याएं  का विस्तार है। किसी वास्तविक संख्या में एक  काल्पनिक भाग जोड़ देने से सम्मिश्र संख्या बनती है। सम्मिश्र संख्या के काल्पनिक भाग के साथ i जुड़ा होता है जो निम्नलिखित सम्बन्ध को संतुष्ट करती है:

i2 = −1, i4 = 1 आदि।

किसी भी सम्मिश्र संख्या को a + bi, के रूप में व्यक्त किया जा सकता है जिसमें a और b दोनो ही वास्तविक संख्याएं हैं। a + bi में a को वास्तविक भाग तथा b को काल्पनिक भाग कहते हैं।
उदाहरण3 + 4i एक सम्मिश्र संख्या है।

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शुभम खरे

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