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    रुसी और चीनी सैनिक

    वेनेजुएला इस वक्त बुरे आर्थिक और राजनीतिक दौर से गुजर रहा है। चीनी सैनिकों का एक समूह रविवार को वेनेजुएला की सरजमीं पर पंहुच गया है। यह बीजिंग और कराकास के बीच सहयोग के तहत किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के 120 सैनिक वेनेजुएला के मार्गरिटा द्वीप पर मानवीय सहायता और सैन्य उपकरणों को लेकर पंहुचे थे।

    https://twitter.com/I30mki/status/1112578904835981312

    हाल ही में रूस सैनिकों का एक समूह वेनेजुएला की सरजमीं पर सैन्य हेलीकाप्टर प्रशिक्षण सुविधा की स्थापना के लिए तैनात हुआ था। अमेरिकी सांसदों और डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने रूस की काफी आलोचनाएं की थी और तत्काल सैनिकों को वेनेजुएला से हटाने की मांग की थी।

    अमेरिकी राज्य सचिव माइक पोम्पिओ ने 28 मार्च को ट्वीट कर कहा कि “मादुरो ने #वेनेजुएला से दूर रहने की नसीयत दी थी जबकि वह खुद क्यूबा और रूस से सैनिकों की टुकड़ी मंगवा रहा है, ताकि वह और उसके सहयोगी वेनुजुएला को लूटते रहे। वेनेजुएला के संस्थानों के लिए अब अपनी सम्प्रभुता को बचाने के लिए खड़े होने का वक्त है। रूस और क्यूबा, #हैंड्स ऑफ वेनुजुएला, यानी वेनुजुएला से दूर रहे रूस और क्यूबा।”

    रुसी और चीनी सेना की तैनाती अमेरिकी प्रशासन के खिलाफ एकजुट होकर ताकत का दम भरते दिखेंगे। वेनुजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका सत्ता बर्खास्त करना चाहता है और विपक्षी नेता जुआन गुइदो को सत्ता पर बैठना चाहता है।

    राष्ट्रपति मादुरो को सेना, रूस, चीन व दर्जनों अन्य राष्ट्रों का समर्थन प्राप्त है। वेनेजुएला आधुनिक दौर के सबसे बड़े आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। यह महंगाई ने रिकॉर्ड तोड़ एक करोड़ फीसदी उछाल मारी है। हाल ही में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कोलंबिया और ब्राज़ील से आने वाली मदद को रोकने के लिए सीमा पर के नजदीक शहरों पर नाकेबंदी कर दी थी।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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