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अर्थशास्त्र

वेतन की परिभाषा, प्रकार, वेतन निर्धारण प्रारूप कैसे होता है ?

वेतन wage in hindi

वेतन की परिभाषा (definition of wage in hindi)

श्रमिकों को अपने कौशल एवं कार्य से योगदान के बदले नियोक्ता या कंपनियों द्वारा जो प्रतिफल या पुरूस्कार मिलता है उसे वेतन कहते हैं। यह श्रमिकों को उनकी सेवाओं के बदले नियमित तौर पर मिलता है।

वेतन के प्रकार (type of wages in hindi)

वेतन दो प्रकार का होता है :

  1. दैनिक वेतन
  2. मासिक वेतन

1. दैनिक वेतन (daily wage in hindi)

श्रमिकों को मिलने वाले दैनिक वेतन से अभिप्राय है जब श्रमिकों को उनके काम के बदले हर दिन वेतन मिलता हैं। ऐसा मुख्यतः उन श्रमिकों को मिलता है जोकि कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार काम करते हैं जैसे किसी मकान के निर्माण में। ऐसे श्रमिकों को दैनिक रूप में मजदूरी देनी पड़ती है एवं इनका वेतन बहुत कम होता है।

ऐसे श्रमिक मुख्यतः शारीरिक काम करते हैं। यह एक जगह पर ज्यादा दिन काम नहीं करते हैं यानी काम ख़त्म होते ही ये दूसरी जगह काम ढूंढते हैं।

2. मासिक वेतन (monthly wage in hindi)

मासिक वेतन का मतलब होता है जब श्रमिकों को उनके काम के बदले हर महीने वेतन दिया जाता है। ये श्रमिक दैनिक मजदूरी वाले श्रमिकों से ज्यादा कुशल होते हैं एवं इन्हें मुख्यतः शारीरिक काम नहीं करना होता हैं। ये लोग कंपनियों में काम करते हैं जाहाँ इन्हें उन्नत काम करना होता है।

वेतन निर्धारण प्रारूप (wage determination in hindi)

जैसा की हम जानते हैं की श्रम बाज़ार में दो शक्क्तियाँ होती है : मांग एवं आपूर्ति जोकि वेतन का एवं मजदूरी की मात्रा का निर्धारण करती हैं। इसके अलावा कुछ संगठन भी होते हैं जो श्रमिकों के हित में काम करते हैं एवं उनको उनका हव दिलाने के लिए लड़ते हैं।

अतः वेतन के निर्धारण में दो कारक होते हैं :

  1. मांग और आपूर्ति शक्तियां
  2. श्रमिक संघ(Labor Union)

1. मांग और पूर्ती से वेतन का निर्धारण :

मांग और पूर्ती से निम्न प्रकार से वेतन निर्धारण होता है :

श्रम बाजार की मांग से अभिप्राय है कंपनियों द्वारा किसी कोई काम को करवाने के लिए जब श्रमिक की ज़रुरत होती है तो यां उनके द्वारा ममांग होती है। वे विभिन्न कार्यों के लिए विभिन्न वेतन देते हैं।

श्रम बाजार की आपूर्ति से अभिप्राय है वे सभी लोग जोकि वर्तमान समय में एवं वेतन दर पर काम करने के लिए तैयार हैं एवं अपने कौशल का प्रयोग करके नियोक्ता के प्रति अपना योगदान देना चाहते हैं।

श्रम बाज़ार में मांग और आपूर्ति

ऊपर चित्र में जैसा की आप देख सकते हैं मांग एवं पूर्ती की शक्तियां किस प्रकार श्रम बाज़ार में वेतन एवं मात्र को प्रभावित करती हैं। यदि श्रम की मांग अधिक बढ़ जाती है एवं पूर्ती कम होती है तो इससे वेतन में बढ़ोतरी हो जाती है लेकिन यदि पूर्ती की मात्र अधिक होती है एवं ज़रुरत या मांग कम होती है तो इससे वेतन घट जाता है।

2. श्रमिक संघों द्वारा वेतन निर्धारण :

labor union

मांग और पूर्ती के अलावा यह भी एक कारक होता है जिससे श्रमिकों का वेतन निर्धारित किया जाता है। यदि कोई नियोक्ता या कंपनिया एक श्रमिक को उसके काम के हिसाब से वेतन नहीं दे रही है तो ये संघ उस कंपनी के खिलाफ कार्यवाही करते हैं एवं श्रमिक को उसका हक दिलाते हैं।

ऐसे संघों का मुख्य कार्य श्रमिकों के हितों की रक्षा करना होता है। इनके द्वारा श्रमिकों के न्यूनतम वेतन का निर्धारण होता है। इनके पैमानों को विभिन्न कंपनियों द्वारा श्रमिकों को वेतन देने के लिए पालन किया जाता है।

इस लेख से सम्बंधित यदि आपके पास कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

About the author

विकास सिंह

विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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