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रजनीकांत की जीवनी

Rajinikanth Biography

रजनीकांत भारतीय फिल्मो के बहुत लोकप्रिय अभिनेता हैं। उन्होंने ना केवल हिंदी फिल्मो में अपने अभिनय को दर्शाया है बल्कि उन्होंने तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, अंग्रेजी और बंगाली फिल्मो में भी अभिनय किया है। रजनीकान्त को एक अभिनेता के साथ साथ एक निर्माता, निर्देशक और लेखक के रूप में भी जाना जाता है। दक्षिण भारत में रजनीकान्त की लोकप्रियता बहुत है। वहां लोग उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं।

रजनीकान्त के द्वारा अभिनय किए गए फिल्मो की बात करे तो उन्होंने ‘बालू जेनु’, ‘गायत्री’, ‘आमे कथा’, ‘किलाडी किट्टू’, ‘प्रिया’, ‘धर्मा युद्धम’, ‘टाइगर’, ‘बिल्ला’, ‘काली’, ‘जॉनी’, ‘गरजनि’, ‘रंगा’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘थाई वीडू’, ‘मेरी अदालत’, ‘गंगवा’, ‘आतंक ही आतंक’, ‘बुलंदी’, ‘रा.वन’, ‘लिंगा’, ‘काला’, ‘रोबर्ट’, ‘2.o’ जैसी फिल्मो में अपने अभिनय अभिनय को दर्शको के बीच पेश किया है।

राजनीकन्ता के अभिनय की वजह से उन्होंने जनता के प्यार के साथ साथ कई सारे अवार्ड्स को भी अपने नाम किया है। इसके अलाव भी रजनीकान्त को भारतीय सिनेमा में उनके द्वारा दिए गए योगदान की वजह से कई सारे सम्मानों से नवाज़ा जाता रहा है।

रजनीकांत का प्रारंभिक जीवन

रजनीकान्त का जन्म 12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था। उन्होंने मराठी परिवार में जन्म लिया था। उनके पिता का नाम ‘रामोजी राओ गायकवाड़’ था और वह पेशे से पुलिस कांस्टेबल थे। उनकी माँ का नाम ‘जीजाबाई’ था जो घर परिवार को सम्हालने का काम करती थीं। रजनीकान्त के दो बड़े भाई हैं और एक बड़ी बहन हैं। उनके भाइयो के नाम ‘सत्यनारायण राओ’ और ‘नागेश्वर राओ’ है और उनकी बहन का नाम ‘अस्वथ बालुभाई’ है।

रजनीकान्त का असली नाम ‘शिवजी रओ गायकवाड़’ है जिसे उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले बदल कर ‘रजनीकान्त’ किया था। रजनीकान्त ने अपने स्कूल की पढाई ‘आचार्य पाठशाला’, बसवनगुडी, बैंगलोर और ‘विवेकानंद बालक संघ’ से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने ‘एम. जी. आर. फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट’, तमिल नाडु से अभिनय में डिप्लोमा हासिल किया था।

व्यवसाय जीवन

रजनीकान्त का फिल्मो का शुरुआती दौर

राजनीकन्त ने अपने अभिनय की शुरुआत साल 1975 से की थी। उनकी पहली फिल्म तमिल फिल्म थी जिसका नाम ‘अपूर्वा रागंगाल’ था। इस फिल्म में उन्होंने ‘पांडियां’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘के. बालाचंदर’ थे।

साल 1976 में रजनीकान्त ने सबसे पहले फिल्म ‘कथा संगमा’ में अभिनय किया था। यह एक कन्नड़ फिल्म थी जिसके निर्देशक ‘पुट्टाना कनगल’ थे। इस फिल्म में रजनीकन्त ने ‘कोंडाजी’ नाम का किरदार अभिनय किया था। उसी साल रजनीकान्त को फिल्म ‘मूंडरू मुड़ीचु’ और ‘बालू जेनु’ में भी देखा गया था।

साल 1977 से साल 1980 तक रजनीकान्त ने कई फिल्मो में अभिनय किया था जिनमे से कुछ के नाम ‘आवरगल’, ‘चिलकाम्मा चिपिंडु’, ‘भुवना ओरु केलवी कुरी’, ‘कुमकुमा रक्षे’, ‘आमे कथा’, ‘गलती संसार’, ‘किलाडु किट्टू’, ‘आईराम जनमंगल’, ‘माथु तप्पड़ मागा’, ‘मंगोड़ी माइनर’, ‘भैरवी’, ‘मुल्लूम मालरूम’, ‘ठप्पीदा थैला’, ‘प्रिया’, ‘धर्मा युद्धम’, ‘टाइगर’, ‘बिल्ला’, ‘काली’, ‘जॉनी’, ‘इल्लम उन कैरासी’, ‘मुरत्तु कलाई’ हैं।

साल 1981 की शुरुआत राजनीकान्त ने फिल्म ‘थी’ के साथ किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘आर. कृष्णामूर्ति’ थे। इस फिल्म में उन्होंने ‘राजशेखर’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘थिल्लू मुल्लू’ में अभिनय किया था, जिसमे उन्होंने ‘चंद्रन’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘के बालचन्द्रा’ थे।

इसके बाद उसी साल राजनीकान्त ने फिल्म ‘गरजनि’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘सी. वि. राजेंद्रा’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘विजय’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इस फिल्म को दर्शको ने इतना पसंद किया था की फिल्म को तमिल के साथ साथ मलयालम और कन्नड़ भाषा में भी रिलीज़ किया गया था।

रजनीकान्त का फिल्मो का बाद का सफर

साल 1982 में रजनीकान्त ने फिल्म ‘पोक्किरी राजा’ में अभिनय किया था जिसके निर्देशक ‘एस. पि. मुथुरमन’ थे। इस फिल्म में रजनीकान्त ने ‘राजा’ और ‘रमेश’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘रंगा’, ‘पुथुकविथै’ और ‘एन्को केत्ता कुरल’ में भी अभिनय किया था। उसी साल फिल्म ‘नांदरी, मीनदुम वरूगा’ में रजनीकान्त ने अतिथि की भूमिका को दर्शाया था।

साल 1983 की बात करे तो उस साल रजनीकान्त ने ‘पायुम पुलि’ में अभिनय किया था। इस फिल्म में उन्होंने ‘भरनी’ नाम के किरदार को दर्शाया था। फिल्म के निर्देशक ‘एस. पि. मुथुरमन’ थे। इसके बाद रजनीकान्त ने फिल्म ‘अँधा कानून’ में अभिनय किया था। यह फिल्म उनकी पहली हिंदी फिल्म थी और फिल्म में उन्होंने ‘विजय कुमार सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘तटिनेनी रामा राओ’ थे।

उसी साल रजनीकान्त को फिल्म ‘थाई विदु’ में अभिनय करते हुए देखा गया था जिसके निर्देशक ‘आर थ्यागारंजन’ थे। फिल्म में राजनीकान्त ने ‘राजू’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘जीत हमारी’ में भी अभिनय किया था। इस फिल्म में भी उनके किरदार का नाम ‘राजू’ ही था।

साल 1984 की शुरुआत रजनीकान्त ने फिल्म ‘मेरी अदालत’ के साथ की थी। इस फिल्म में उन्होंने ‘अशोक’ नाम के किरदार को दर्शाया था और फिल्म के निर्देशक ‘ए. टी. रघु’ थे। इसके बाद उसी साल रजनीकान्त को फिल्म ‘कई कोडुक्कुम कई’ में देखा गया था जिसके निर्देशक ‘जे. महेंद्रन’ थे। इस फिल्म में उन्होंने ‘कालीमुथु’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

उसी साल रजनीकान्त ने फिल्म ‘गंगवा’ में भी अभिनय किया था जिसके निर्देशक ‘राजशेखर’ थे। इस फिल्म में उनके किरदार का नाम भी ‘गंगवा’ था। फिल्म ‘एथे नासवल’, ‘जॉन जानि जनार्दन’, ‘नल्लावनुक्कु नलंवन’ और ‘नान महान अल्ला’ में भी रजनीकान्त को अभिनय करते हुए देखा गया था।

साल 1985 और साल 1986 में रजनीकान्त ने ‘नान सीगप्पू मणिथन’, ‘महागुरु’, ‘वफादार’, ‘न्यायम मेरे चेप्पाली’, ‘श्री राघवेन्द्रा’, ‘गिरफ्तार’, ‘यार?’, ‘बेवफाई’, ‘नान आदिमाई इल्लै’, ‘भगवान दादा’, ‘असली नक़ली’, ‘दोस्ती दुश्मनी’ और ‘मावीरन’ जैसी फिल्मो में अभिनय किया था।

साल 1987 में सबसे पहले रजनीकान्त को फिल्म ‘डाकू हसीना’ में देखा गया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘अशोक राओ’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘मंगल सिंह’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘इन्साफ कौन करेगा’ में देखा गया था जहाँ उनके किरदार का नाम ‘विक्रम सिंह’ था।

उसी साल रजनीकान्त ने फिल्म ‘मणिथन’, ‘उत्तर दक्षिण’, ‘मनातील उरुठि वेंदुम’ और ‘ओरकवलं’ में अपने अभिनय को दर्शको ने बीच दर्शाया था।

साल 1988 में रजनीकान्त ने साल की शुरुआत फिल्म ‘तमाचा’ के साथ की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘रमेश अहूजा’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘विक्रम प्रताप सिंह’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘गुरु शिष्या’ में देखा गया था जिसके निर्देशक ‘एस. पि. मुथुरमन’ थे। फिल्म में रजनीकान्त ने ‘राजा’ उर्फ़ ‘गुरु’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

रजनीकान्त ने इसी साल अपना डेब्यू अंग्रेजी फिल्मो में भी किया था। उनकी अंग्रेजी फिल्म का नाम ‘ब्लूडस्टोन’ था जिसके निर्देशक ‘द्विट एच. लिटिल’ थे। फिल्म में रजनीकान्त ने ‘श्याम सबु’ नाम के किरदार को दर्शाया था। यह फिल्म रजनीकान्त ने पहली और आखरी अंग्रेजी फिल्म थी।

साल 1989 में रजनीकान्त ने फिल्म ‘राजधि राजा’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘आर. सुंदरराजन’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘राजा’ और ‘चिन्नारासु’ नाम का किरदार अभिनय किया था। रजनीकान्त ने हिंदी फिल्म ‘गैर कानूनी’ में एक अतिथि किरदार दर्शाया था जिसका नाम ‘आज़म खान’ था।

इसके बाद उन्हें फिल्म ‘सिवा’ में देखा गया था जहाँ उन्होंने ‘सिवा’ उर्फ़ ‘टाइगर’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इसके बाद उसी साल रजनीकान्त को फिल्म ‘राजा चिन्ना रोजा’, ‘माप्पिला’, ‘भ्रष्टाचार’ और ‘चाल बाज़’ में भी अभिनय को दर्शाते हुए देखा गया था।

रजनीकान्त का फिल्मो का सफल सफर

साल 1990 की शुरुआत भी रजनीकान्त ने फिल्म ‘पनक्कारन’ के साथ की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘पि. वासु’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘मुथु’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘पेरिया इडाथु पिल्लई’ और ‘अठिसाया पैरवी’ में भी अपने अभिनय को दर्शाया था।

साल 1991 और साल 1992 में रजनीकान्त ने ‘धर्मा दुरई’, ‘हम’, ‘फरिश्ते’, ‘खून का क़र्ज़’, ‘फूल बने अंगारे’, ‘नात्तुक्कु ओरु नलवन’, ‘थलापति’, ‘मन्नान’, ‘त्यागी’, ‘अन्नामलाई’ और ‘पांडियन’ जैसी फिल्मो में अपने अभिनय को दर्शाया था।

साल 1993 में उन्होंने फिल्म ‘इंसानियत का देवता’ में सबसे पहले अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘के. सी. बोकड़िआ’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘अनवर’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘यजमान’ में देखा गया था जहाँ उन्होंने ‘वानवार्यान’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘आर. वि. उदयकुमार’ थे।

उसी साल रजनीकान्त ने फिल्म ‘उज़हैप्पाली’ और ‘वल्ली’ नाम की फिल्म में भी अभिनय किया था।

साल 1994 की शुरुआत रजनीकान्त ने फिल्म ‘वीरा’ के साथ की थी। इस फिल्म के निर्देशक ‘सुरेश क्रिस्सना’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘मुथुवीरापन’ नाम के किरदार को दर्शाया था। साल 1995 की शुरुआत उन्होंने फिल्म ‘बाशाह’ के साथ किया था। इस फिल्म के निर्देशक भी ‘सुरेश क्रिस्सना’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘मणिकम’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

इसके बाद उस साल उन्होंने फिल्म ‘पेदारायडु’ में अभिनय किया था, जहाँ उन्होंने ‘पेदारायडु’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘आतंक ही आतंक’ और ‘मुथु’ में देखा गया था।

साल 1995 से साल 1999 तक रजनीकान्त ने तीन ही फिल्मो में अभिनय किया था जिनका नाम ‘भाग्य देबता’, ‘अरुणाचलम’ और ‘पादयप्पा’ था।

साल 2000 में भी उन्होंने एक ही फिल्म में अभिनय किया था जिसका नाम ‘बुलंदी’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘तटिनेनी रामा राओ’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘गजराज ठाकुर’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

साल 2002 में भी उन्होंने केवल फिल्म ‘बाबा’ में ही अभिनय किया था जिसके निर्देशक ‘सुरेश क्रिस्सना’ थे। फिल्म में रजनीकान्त ने ‘बाबा’ नाम के किरदार को दर्शाया था और साथ ही ‘महावतार बाबाजी’ नाम के किरदारों को अपनी आवाज़ दी थी।

साल 2005 और साल 2007 में रजनीकान्त ने एक एक फिल्म में ही अभिनय किया था। उन फिल्मो के नाम ‘चंद्रमुखी’ और ‘शिवजी’ है। दोनों ही फिल्मो को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और साथ ही बॉक्स ऑफिस में भी बेहतरीन कमाई के साथ फिल्मो को ब्लॉकबस्टर फिल्मो की सूजी में दर्ज किया गया था।

साल 2008 में रजनीकान्त ने फिल्म ‘कुसेलन’ में कैमिओ किरदार दर्शाया था। इसके बाद उसी साल उन्हें फिल्म ‘कथानायकूड़ु’ में भी कैमिओ किरदार को दर्शाते हुए देखा गया था।

साल 2010 की बात करे तो उस साल रजनीकान्त ने फिल्म ‘एंथिरन’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘एस. शंकर’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘वसीगरन’ और ‘चिट्टी’ नाम के किरदारों को दर्शाया था। यह फिल्म हिंदी भाषा में ‘रॉबर्ट’ नाम से रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और फिल्म ने ब्लॉकबस्टर कमाई की थी।

साल 2011 में रजनीकान्त ने हिंदी फिल्म ‘रा.वन’ में ‘चिट्टी’ नाम का ही एक कैमिओ किरदार दर्शाया था। साल 2014 में रजनीकान्त ने फिल्म ‘लिंगा’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘के. एस. रविकुमार’ थे और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘राजा लिंगेश्वरं’ उर्फ़ ‘लिंगा’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

साल 2016 में उन्होंने फिल्म ‘कबाली’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘पा. रंजीत’ थे और फिल्म में उन्होंने ‘कबालीश्वरन’ उर्फ़ ‘कबाली’ नाम के किरदार को दर्शाया था। यह फिल्म भी दर्शको को बहुत पसंद आई थी। साल 2017 में रजनीकान्त को फिल्म ‘सिनेमा वीरान’ में देखा गया था। यह फिल्म एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म थी।

साल 2018 में रजनीकान्त ने दो फिल्मो में अभिनय किया था। इनमे से पहली फिल्म का नाम ‘काला’ था जिसके निर्देशक ‘पा. रंजीत’ थे। फिल्म में रजनीकान्त ने ‘करिकालन’ उर्फ़ ‘काला’ नाम के किरदार को दर्शाया था। इसके बाद उसी साल की उनकी दूसरी फिल्म का नाम ‘2.0’ था, जिसके निर्देशक ‘एस. शंकर’ थे। फिल्म में रजनीकान्त ने ‘वसीगरन’, ‘चिट्टी’ और ‘कुट्टी चिट्टी’ नाम के किरदारों को दर्शाया था।

साल 2019 में रजनीकान्त ने फिल्म ‘पेटा’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘कार्तिक सुब्बाराज’ थे और फिल्म में ‘रजनीकान्त’ ने ‘काली’ उर्फ़ ‘पेटा वेलन’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

रजनीकान्त के आगे आने वाले फिल्मो की बात करे तो उन्हें फिल्म ‘दरबार’ में देखा जाएगा। इस फिल्म के निर्देशक ‘आर ए मुरुगादॉस’ हैं और फिल्म में रजनीकान्त ने ‘आदित्य अरुणाचलम’ नाम के किरदार को दर्शाया था।

पुरस्कार और उपलब्धियां

रजनीकान्त ने अपने अभिनय की वजह से अभी तक 40 से भी अधिक अवार्ड्स को अपने नाम किया था। उनमे से कुछ की जानकारी निचे मौजूद है।

  • साल 1984 में फिल्म ‘नलवानिकु नलवन’ के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1988 में फिल्म ‘ब्लूडस्टोन’ के लिए ‘बेस्ट एचीवर’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1991 में फिल्म ‘थलापति’ के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1993 में फिल्म ‘वल्ली’ के लिए ‘बेस्ट स्टोरी राइटर’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 1995 में फिल्म ‘बाशाह’ और ‘मुथु’ के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ का अवार्ड मिला था।
  • साल 2000 में ‘पद्मा भूषण’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
  • साल 2007 में ‘राज कपूर’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
  • साल 2016 में ‘पद्मा विभूषण’ अवार्ड से सम्मानित किया था।

रजनीकांत का निजी जीवन

रजनीकान्त के लव लाइफ की बात करे तो उन्होंने सबसे पहले अभिनेत्री ‘सिल्क स्मिता’ को डेट लिया था। सिल्क से अलग होने के बाद, रजनीकान्त ने गाईका ‘लता’ को डेट करना शुरू किया था। लता और रजनीकान्त ने 26 फरवरी 1981 को एक दूसरे से शादी की थी। रजनीकान्त और लता की दो बेटियां हैं जिनका नाम ‘ऐश्वर्या’ और ‘सौंदर्या’ है।

रजनीकान्त के पसंदीदा चीज़ो की बात करे तो उन्हें खाने में मसाला डोसा बहुत पसंद है। रजनीकान्त के पसंदीदा अभिनेता अमिताभ बच्चन, कमल हासन और सैल्वेस्टर स्टैलोन हैं। अभिनेत्रियों में उन्हें रेखा और हेमा मालिनी पसंद हैं। रजनीकान्त का पसंदीदा रंग काला है और उनकी पसंदीदा फिल्म ‘वीरा केसरी’ है।

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