Sat. Oct 1st, 2022
    hard water and soft water in hindi


    साबुन के साथ आसानी से झाग देने वाला जल मृदु एवं कठिनाई से झाग देने वाला जल कठोर होता है। कठोर जल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। वास्तव में, यह कुछ लाभ प्रदान कर सकता है क्योंकि यह खनिजों में समृद्ध है और संभावित Toxic धातु आयनों जैसे- लेड और तांबे की घुलनशीलता को कम करता है।

    हालांकि, कठोर जल बॉयलर में  उपयोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि उसे उबालने पर बॉयलर में लवणों (Salts) की पपड़ी जम जाने के कारण अधिक ऊष्मा व्यय होती हैं। यह कपड़े धोने तथा खाना पकाने के लिए भी योग्य नहीं होता। ऐसे मामलों में, पानी मृदु करने के तरीकों का उपयोग किया जाता है।

    जल की कठोरता का कारण (Causes of Hardness of water in hindi):

    द्विसंयोजी या बहु संयोजी आयनों की उच्च सांद्रता (concentration) जल की कठोरता का कारण है।

    जल की कठोरता मुख्य रुप से उसमें घुले हुए कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के बाई कार्बोनेट, क्लोराइड, सल्फेट एवं नाइट्रेट लवणों लवणों के कारण होती है। जल के बहाव के दौरान ये लवण जमीन से जल में  एकत्रित हो जाते हैं।

    जल की कठोरता के प्रकार (Types of hardness of water in hindi):

    जल की कठोरता दो प्रकार की होती हैं-

    1. अस्थाई कठोरता (temporary hardness):

    यह जल में उपस्थित कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट लवणों के कारण होती हैं। इस प्रकार की कठोरता जल को उबालने (Boiling) या चूना (Lime) डालने या, Na₂CO₃ (सोडियम कार्बोनेट) मिलाकर उबालने से खत्म हो जाती है क्योंकि ऐसा करने से केल्सियम तथा मैग्नीशियम आयन कार्बोनेट के रूप में अलग हो जाते हैं।

    Ca(HCO3)2(aq) → CO2(g) + H2O(l) + CaCO3(s)
    Ca(HCO3)2 + Ca(OH)2 → 2CaCO3 + 2H2O

    2. स्थायी कठोरता (permanent hardness):

    यह जल में उपस्थित कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के सल्फेट ,नाइट्रेट तथा क्लोराइड लवणों के कारण होती है। स्थाई कठोरता उबालने से या चूना डालने से दूर नहीं होती है।

    स्थाई कठोरता दूर करने के लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है:

    • सोडियम कर्बोनेट द्वारा (by sodium carbonate)
    • परम्यूटिट द्वारा (By permutit)
    • कार्बनिक आयन विनिमय द्वारा (By organic ion exchanger)
    • केलगन द्वारा (By Calgon)

    कठोर तथा मृदु जल वर्गीकरण (Hard and soft water classification):

    एक सिंगल-स्केल सही ढंग से पानी की कठोरता का वर्णन नहीं कर सकता क्योंकि कठोरता का व्यवहार पानी मे खनिज की उपस्थिति, pH और तापमान जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है।

    यू.एस. भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण पानी को कठोर और मृदु पानी में वर्गीकृत करने के लिए Measurement की निम्नलिखित श्रेणियों का उपयोग करता है:

    hard and soft water difference in hindi

    कठोर जल का प्रभाव (Effects of Hard water in hindi):

    जैसा कि बताया जा चुका है कठोर जल वह जल है जिसमें केल्सियम तथा मैग्नीशियम के आयन की अधिकता होती है।

    पानी की सतह पर पाए पर पाए जाने वाले जल की कठोरता कम होती है परंतु जैसे-जैसे यह जल सतह के नीचे जाता है इसमें आयन घुलते जाते हैं और पानी कठोर होता जाता है। कठोर जल के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं-

    • कठोर जल का स्वास्थ्य पर प्रभाव (hard water effects on health in hindi):

    कठोर जल का स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं होता है लेकिन अपच संबंधी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    • कठोर जल का बालों पर प्रभाव (hard water effects on hair in hindi):

    कठोर जल से बाल धोने पर वह रूखे तथा बेजान बेजान हो जाते हैं। उनकी सही से सफाई ना होने पर बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं।

    • कठोर जल का कपड़ों पर प्रभाव (hard water effects on clothes in hindi):

    कठोर जल से कपड़े धोने पर कपड़े चमक खो देते हैं और कुछ समय में भद्दे लगने लगते हैं।

    • कठोर जल का पौधों पर प्रभाव (hard water effects on plants in hindi):

    कठोर जल पौधों के लिए भी अनुपयुक्त होता है। पत्तों पर यदि यह पानी पड़ जाता है तो उनके छिद्र बंद हो जाते हैं। पत्ते आधे हरे आधे सूखे से लगते हैं और धीरे-धीरे झड़ जाते हैं।

    पत्तों के नष्ट होते ही पूरा पौधा सूख जाता है। यदि पौधा जीवित भी रहता है तो उस की ग्रोथ रुक जाती है । कठोर जल पौधों पर सीधा टॉक्सिक प्रभाव भी डालता है।

    इस विषय से सबंधित आपके यदि कोई सवाल या सुझाव हैं, तो आप नीचे कमेंट के जरिये हमसे पूछ सकते हैं।

    11 thoughts on “मृदु जल एवं कठोर जल में अंतर”
      1. Khathor jal yaa mradu jal, jal ki koi category nhi hai. Bs usme different compound ki presence ke karan unhe hard aur soft me classify kiyaa gya hai. Agr hm un compounds ko hata paye to vahi hard, soft bn jata hai. Inhe hatane ka kayi method hai, jo ki different compound ki presence hone pr different hote hai. Inka brief discrimination uper article me ‘जल की कठोरता के प्रकार’ ke andar kiya gya hai. Jyda jankari ke liye un method ko Google pe search kre

      1. वैसे तो कठोर जल एवं मृदु जल देखने में एक सामान लगते हैं लेकिन जब साबुन का इन पानी इस्तेमाल किया जाता है तो मृदु जल में साबुन अधिक झाग बनाता है एवं कठोर जल में साबुन इतने झाग पैदा नहीं कर पाता है। दोनों के बीच में अंतर अंतर देखने का यही सबसे आसान तरीका है।

    1. कठोर जल पीने से क्या होता है? क्या ये साधारण पानी जैसा होता है?

      1. Ha ,kathor jal dikhne me saman hi hote me pine par koi koi khas effact nahi hota par ahik matra me payjal ke rup me use karne par ye haddiyo me tanav ,active performance me kami ,jaisi problem aksar dekhi jati hain

    2. jal mein aisi kyaa cheez hoti hai jo kam hone par jal mridu ho jaata hai or zyaada hone par jal kathor ho jaata hai??

    3. Agar hum mridu jal ki jagah kathor jal ko peeyenge to Kya hamaare koi beemari ho jaayegi? Kya koi harm ful effect hoga?

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