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    महाराष्ट्र सरकार ने कम कीमतों पर फसल बेचने को मजबूर प्याज किसानों की राहत के लिए 150 करोड़ रुपये के राहत कोष की मंजूरी दी है।

    महाराष्ट्र के विपणन विभाग के प्रधान सचिव के अनुसार सरकार ने फैसला किया है कि 1 नवम्बर से 15 दिसंबर के बीच प्याज बेचने वाले प्याज किसानो को 200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले से राज्य के 22 लाख किसानों को फायदा होने की उम्मीद है। करीब 75 लाख मीट्रिक तन प्याज की फसल इस मुवाबजे के अंतर्गत आएगी।

    महाराष्ट देश में प्याज उत्पादन में अग्रणी राज्य है। उत्पादन अधिक हो जाने के कारण किसानों अपनी फसल बहुत कम दाम पर बेचने को मजबूर हो गए हैं। हाल ही में तीन राज्यों में हुए भाजपा को नुकसान का मुख्य कारण किसानों की नाराजगी को ही माना जा रहा है। कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ़ करने की घोषणा की थी जिसका उसे जबरदस्त फायदा मिला और उसने तीन राज्यों में भाजपा की सरकार पलट दी।

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    लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए किसानों के लिए कई योजनाओं शुरू करने की कोशिश की जा रही है। महाराष्ट्र सरकार का ये फैसला उसी दिशा में एक कदम है।

    भारतीय राजनीति में प्याज का अलग महत्त्व है। प्याज ने कई बार सरकारों को बदला है। 13 दिसंबर को नासिक जिले के सताना शहर में दो किसानों ने सड़कों पर प्याज का ढेर लगा दिया था क्योंकि उन्हें फसल की सही कीमत नहीं मिल पा रही थी। डॉ किसानो रविंदर बिरारी और प्रशांत महाजन ने ये कदम तब उठाया जब उन्हें 1.5 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा था जबकि फसल के उत्पादन में उन्हें 9 रुपये प्रति किलो की लागत आई थी।

    एक अन्य परेशान किसान ने 750 किलो प्याज बेचने के बाद  1,046 रुपये की आमदनी हुई तो उसने ये रकम प्रधानमंत्री राहत कोष में मनीऑर्डर कर दिया था।

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    By आदर्श कुमार

    आदर्श कुमार ने इंजीनियरिंग की पढाई की है। राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ कर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कई वेबसाइट पर स्वतंत्र लेखक के रूप में काम किया है। द इन्डियन वायर पर वो राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लिखते हैं।

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