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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी लोकुर ने कहा कि ‘न्यायाधीशों के बीच से कोलेजियम का डर भगाना होगा’

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर का कहना है कि नवनियुक्त प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे के सामने मुख्य चुनौती न्यायाधीशों के बीच कोलेजियम के डर को दूर करने की होगी।

न्यायमूर्ति लोकुर ने ईमेल के माध्यम से आईएएनएस को बताया, “कॉलेजियम के डर को दूर करें। तबादलों के माध्यम से होने वाले निर्वासन से बचा जाना चाहिए। संवैधानिक प्राधिकारियों को जवाबदेह बनाने के लिए कई बेहतर तरीके हैं।”

17 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति के बाद बोबडे ने 18 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली।

नए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती का हवाला देते हुए, न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा कि वह जिस चुनौती का सामना करेंगे, वह विश्वास, विश्वसनीयता और विश्वास बनाए रखना होगी, जो नागरिकों को न्यायपालिका की निष्पक्षता पर विश्वास बनाए रखने में सक्षम हो।

न्यायमूर्ति लोकुर ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और विभिन्न हाईकोर्ट के प्रत्येक न्यायाधीशों से अधिक अपेक्षाएं हैं।

लोकुर से सवाल पूछा गया कि क्या प्रधान न्यायाधीश कानून के अनुसार ईमानदार निर्णय लेकर एक उदाहरण पेश कर सकते हैं? इस पर उन्होंने कहा, “यह केवल प्रधान न्यायाधीश के लिए ही नहीं है कि वह एक उदाहरण पेश करें, बल्कि यह तो सुप्रीम व हाईकोर्ट के प्रत्येक न्यायाधीश के लिए है कि वह ऐसा उदाहरण पेश करें।”

प्रधान न्यायाधीश कार्यालय को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे में लाने से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए लोकुर ने कहा, “सैद्धांतिक तौर पर पारदर्शिता बहुत अच्छी है और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सवाल यह है कि सीजेआई का कार्यालय कैसे और किस संबंध में पारदर्शी होना चाहिए।”

उन्होंने जोर दिया कि प्रत्येक स्थिति को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सावधानीपूर्वक सोचा जाना होगा, ताकि पारदर्शिता में स्थिरता स्थापित हो सके।

न्यायमूर्ति लोकुर सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले गुवाहाटी और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। उन्हें हाल ही में फिजी के सुप्रीम कोर्ट में अनिवासी पैनल का न्यायाधीश भी नियुक्त किया गया है।

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