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    ईरान तेल आयात भारत

    अमेरिकी प्रतिबंधों को किनारे रखते हुए भारत ने ईरान के साथ तेल सौदा जारी रखने की इच्छा जताई है। भारत ने ईरान से 1.25 मिलियन टन कच्चे तेल के निर्यात के लिए समझौता किया है जिसका भुगतान भारत डॉलर की बजाए रूपए में करेगा।

    सूत्रों के मुताबिक इंडियन आयल कोऑपरेशन और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल ने ईरान के साथ तेल आयात का सौदा किया है।

    अमेरिकी सैभव माइक पोम्पिओ ने पिछले माह भारत को आगाह किया था यदि नई दिल्ली ईरान के साथ सौदेबाज़ी जारी रखती है तो उन्हें भी प्रतिबंधों की मार झेलनी होगी। सूत्रों के मुतबिक आईओसी इस वर्ष तेहरान से नौ मिलियन टन तेल का आयात करेगी।

    अमेरिका के ईरान पर दूसरे दौर के प्रतिबन्ध 4 नवंबर से लागू हो जायेंगे। नतीजतन नवंबर के पश्चात् भुगतान डॉलर की बजाय किसी अन्य मुद्रा में करना होगा।

    ईरान ने रूपए में कीमत अदा करने के लिए रज़ामंदी दे दी है। रूपये का उपयोग ईरान भारत से निर्यात हो रहे दवाइयों और खाद्य सामग्रियों के भुगतान के लिए करेगा।

    भारत की रणनीति के मुताबिक नई दिल्ली तेहरान से इस वर्ष 25 मिलियन तेल का आयात करेगा। अलबत्ता इस आंकड़े में कुछ कमी आ सकती है क्योंकि रिलायंस जैसी कम्पनी ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया है. इसके अलावा नायरा एनर्जी ने भी आयत शून्य कर दिया है।

    अमेरिका ने ईरान के साथ साल 2015 में हुई परमाणु संधि से वांशिगटन को बाहर निकल दिया था और ईरान पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। फिलहाल भारत ईरान को यूरो में कीमत चुका रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारत ईरान को तेल आयात के बदले खाद्य सामग्री मुहैया निर्यात करेगा। हालाँकि तेल की पूर्ण अदाएगी रूपए में की जा सकती है।

    इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। साल 2010-11 में पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद तेहरान सातवें स्थान पर आ गया था। 27.2 मिलियन तेल आयात करके ईरान तीसरे पायदान पर आ गया है।

    ईरान ने तेल खरीदने के 60 दिन बाद तक भुगतान करने के लिए कहा है। तेल के निर्यात के पूरी जिम्मेदारी ईरानी विक्रेता की होगी। ग्राहक देश तक सामान पहुंच जाने के बाद भुगतान किया जा सकता है।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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