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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा: ‘ईरान परमाणु वार्ता अनिश्चित काल तक नहीं चल सकती’

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को कहा कि ईरान के साथ परमाणु वार्ता “अनिश्चित काल तक नहीं चल सकती” लेकिन वाशिंगटन वार्ता जारी रखने के लिए “पूरी तरह से तैयार” था।

अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से एक परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए विश्व शक्तियों के साथ ईरान की बातचीत में शामिल है, जिसने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर थोड़ी रोक-थाम और सीमाओं के बदले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से कुछ राहत दी है।

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2018 में परमाणु समझौते को एकतरफा तौर से खारिज कर दिया था और ईरान पर दंडात्मक प्रतिबंध लगा दिए थे।

विदेश मंत्री ब्लिंकन ने गुरुवार को कुवैत के दौरे के दौरान कहा कि, “हम कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन यह प्रक्रिया अनिश्चित काल तक नहीं चल सकती। हम यह देखना चाहते हैं कि ईरान क्या करने के लिए तैयार है या नहीं करने के लिए तैयार है। क्या ईरान वार्ता जारी रखने के लिए वियना लौटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।”

उन्होंने आगे कहा कि, “हमने स्पष्ट रूप से अपने अच्छे विश्वास और परमाणु समझौते के पारस्परिक अनुपालन पर लौटने की इच्छा का प्रदर्शन किया है। गेंद ईरान के पाले में है और हम देखेंगे कि क्या वे अनुपालन में वापस आने के लिए आवश्यक निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।”

वाशिंगटन को समझौते में वापस लाने के लिए ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी की सरकार अप्रैल से वियना में प्रमुख शक्तियों के साथ बातचीत कर रही है। लेकिन जब तक वह अगले महीने की शुरुआत में निर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को सत्ता नहीं सौंप देते तब तक कोई समझौता संभव नहीं लगता।

इब्राहिम रईसी एक अति रूढ़िवादी नेता हैं लेकिन उन्होंने परमाणु वार्ता के लिए समर्थन यह तर्क देते हुए व्यक्त किया है कि ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने की आवश्यकता है। ईरान का अति-रूढ़िवादी खेमा अमेरिका पर गहरा अविश्वास करता है। इसी खेमे ने 2015 के परमाणु समझौते पर हसन रूहानी और उनकी सरकार की बार-बार आलोचना की है।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने बुधवार को समझौते से अमेरिका के हटने और उसके नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि अनुभव ने दिखाया है कि “पश्चिम पर भरोसा करने से काम नहीं चलता।” इब्राहिम रईसी ने कहा है कि उनकी सरकार “राष्ट्रीय हितों की गारंटी” वाली वार्ता का समर्थन करेगी लेकिन वार्ता के लिए बातचीत की अनुमति नहीं देगी।

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आदित्य सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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