बोइंग भारत में बनाएगी एफ/ए-18 सुपर हॉरनेट

बोइंग एरोस्पेस कम्पनी, भारत की हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड व प्राईवेट सेक्टर कम्पनी महिंद्रा डिफ़ेंस सिस्टम ने बोइंग के एफ/ए-18 सुपर हॉरनेट लड़ाकू विमान बनाने के लिए करार किया है।

यह करार गुरुवार को डिफेंस एक्स्पो में इन कम्पनियों के बीच किया गया।

बोईंग के भारतीय अधिकरण के प्रमुख के अनुसार हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलौर में एक नई आधुनिक फैसिलिटी बनाई जाएगी जिसमें सभी नवीनतम तकनीकी सुविधाएं होंगीं। इसी फैसिलिटी में एफ/ए-18 सुपर हॉरनेट का निर्माण होगा।

विशेषतायें

एफ/ए सुपर हॉरनेट अमेरिकी सेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में से एक है।

यह दो इंजन वाला मल्टी रोल फाइटर जेट है। इसकी अधिकतम गति 1915 किलोमीटर प्रति घण्टा है। तथा बिना इंधन भराए यह 3,334 किमी तक उड़ सकता है।

यह चौथी पीढ़ी का एक मल्टीरोल लडाकू विमान है, इसे वायुसेना के अतिरिक्त नौसेना भी इस्तेमाल कर सकती है।

हालांकि बेंगलौर में तैयार होने वाले केंद्र में अन्य विमान भी बनाये जाएंगे। साथ ही इस केंद्र को अमय तरीकों से भी इस्तेमाल में लाया जा सकेगा।

इसके अलावा एच.ए.एल इसे अपनी मध्यम लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए भी प्रयोग कर सकेगा।

एच. ए. एल भारत की एकलौती कम्पनी है जो लड़ाकू बिमानों का निर्माण करती है। व महिंद्रा भारत की एकलौती ऐसी कम्पनी है जो वाणिज्यिक विमानों का निर्माण करती है। महिंद्रा के द्वारा बनाये गए विमान वर्टमान में 31 देशों में इस्तेमाल किये जाते हैं।

एच. ए. एल भारतीय वायुसेना के लिए कई प्रमुख विमान बना चुकी है। तेजस व लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर ध्रुव उनमें से एक हैं।

करार की वजह

यह करार करने से पहले बोइंग कम्पनी ने काफी शोध किया। मध्यम लड़ाकू विमानों को श्रेणी के विमान आयात करने के लिए वायु सेना की आवश्यक शर्त थी कि निर्माता कम्पनी भारत की किसी कम्पनी के साथ जॉइंट वेंचर में रहे।

ऐसे में बोइंग कम्पनी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का रास्ता तलाश एक नई लीक रच रही है।

बोइंग के अलावा विमान क्षेत्र की प्रमुख कम्पनियां जैसे लॉकहीड मार्टिन जास भी भारतीय कम्पनियों के साथ समझौते मे हैं। लॉकहीड मार्टिन ने टाटा व जास ने अडानी समूह के साथ जॉइंट वेंचर बनाये हैं।

फायदे

बोइंग कम्पनी का यह करार भारतीय विमान निर्माण क्षेत्र के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को इससे शोध के क्षेत्र में फायदा होगा व नवीनतम तकनीक पर काम करने का मौका मिलेगा।

इसके साथ रोजगार का सृजन भी होगा जो मेक इन इंडिया का प्रमुख टारगेट था।

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