प्रतिबंधों से रियायतों से बावजूद, परिचालन और वित्तीय समस्याओं से जूझ रहा चाहबार बंदरगाह

चाहबार बन्दरगाह के परिचालन में ईंधन, कस्टम और दस्तावेजों और सीमा नियमों  के कारण देरी हो रही है। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने चाहबार बंदरगाह के जल्द परिचालन की उम्मीद जताई है।

इस मसले से संबंधित व्यक्ति ने बताया कि कस्टम मसला, सीमा पर शोषण सहित कई मसलों को उठाया था। भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने साल 2016 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। चाहबार बंदरगाह का इस्तेमाल तीनों देशों में व्यापार के लिए किया जाएगा।

ईरान ने चाहबार बंदरगाह का विकास के लिए आधिकारिक नियंत्रण की कंपनी इंडिया पोर्ट ग्लोबल लिमिटेड को सौंप दिया था। कंपनी ने सोमवार को चाहबार पर अपना दफ्तर शुरू कर दिया और चाहबार में स्थित शाहीद बहेस्ती बंदरगाह का नियंत्रण भी ले लिया है। सालों की इस मशक्कत के बाद भारत इस बंदरगाह के जरिये अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस के भागों में पंहुच सकेगा।

भारत की यूरेशिया से कनेक्टिविटी के लिए ईरान एक महत्वपूर्ण भाग है और यही कारण है कि भारत ने अमेरिका के फरमान को निभाने के लिए जरा भी उत्सुक नहीं था। भारत ने ईरान से तेल निर्यात करने की रियायत अमेरिका से मांगी थी और साथ ही प्रतिबंधों से चाहबार बंदरगाह को भी मुक्त रखा था। भारत ईरान पर अपनी रणनीति में बदलाव करने के मूड में जरा भी नहीं है।

भारत और रूस को सबसे कम समय में जोड़ने वाले आईएनएसटीसी में ईरान एक महत्वपूर्व पड़ाव है। कजाखस्तान ने गुजरात को ईरान के माध्यम से जोड़ने की योजना बनायीं है और रूस ईरान से होते हुए भारत व ओमान को जोड़ते हुए एक कनेक्टिविटी गलियारे का निर्माण करना चाहता है।

ईरान के विदेश मंत्री दो दिवसीय भारत यात्रा पर है, जिसमे उन्होंने कई मसलों पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि मैं बेहद खुश हूं कि यूको और बीपीआई बैंक ने अपनी सर्विस शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के अवैध प्रतिबंधों के इतर दोनो देश अपनी जनता के लिए फायदेमंद समझौता करेंगे।

नितिन गडकरी ने ईरानी विदेश मंत्री के साथ बातचीत को फायदेमंद बताया था और कहा कि मसलों को सुलझा लिया गया है।

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