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    मेघालयन काल और पृथ्वी का इतिहास

    मेघालय. ये नाम सुनकर आपके दिमाग में क्या आता है? भारत के उत्तर-पूर्व में बसा एक छोटा सा राज्य। लेकिन ये जानकर आपको हैरानी होगी की अब यही राज्य सिर्फ देश और दुनिया ही नहीं बल्कि पूरी पृथ्वी के इतिहास में एक अहम किरदार निभाएगा। वैज्ञानिकों ने हम जिस काल में अभी रह रहे हैं उसे आधिकारिक रूप से “मेघालयन काल” (Meghalayan Age) नाम दिया है।

    कैसे परिभाषित होते हैं ये “काल”

    ये जानने लायक बात है की पृथ्वी के इतिहास को अलग-अलग समयावधि में घटे महत्वपूर्ण घटनाओं के आधार पर विभिन्न कालों में बांटा गया है। ये घटनाएं कुछ भी हो सकती है, जैसे किसी महाद्वीप का बनना, जलवायु में परिवर्तन होना या किसी नए जीव-जंतु का उत्पन्न होना।

    ऐसे ही हम जिस समय में रह रहे हैं वो “होलोसीने काल” कहलाता है। 11700 वर्षों के इस अवधि की शुरुआत आखिरी हिमयुग के खत्म होने के साथ हुई थी। इसी “होलोसीने काल” के अब तक के अंतिम 4200 वर्षों को इंटरनेशनल कमिशन ऑन स्ट्रेटीग्राफी ने “मेघालयन काल” नाम दिया है।

    आईसीएस ही वो संस्था है जो भूगर्भिक समयावधि का आधिकारिक ब्योरा रखती है।

    मेघालयन काल ही क्यों?

    “मेघालयन काल” की शुरुआत आज से 4200 वर्ष पूर्व 200 वर्षों के भयंकर सूखे के साथ हुई थी जिसके परिणामस्वरूप मिस्र, यूनान, फलस्तीन, मेसोपोटामिया, सिंधु घाटी, यांगत्जे नदी और सीरिया सहित कई जगहों की प्राचीन सभ्यताएं नष्ट हो गई थी।

    इसे यह नाम मेघालय की गुफाओं में मिले स्टलैग्माइट का अध्ययन करने के बाद दिया गया। स्टलैग्माइट छूने के वो खम्भे होते हैं जो गुफाओं में छत से नीचे की तरफ लटके रहते हैं।

    By अनुपम कुमार सिंह

    बीआईटी मेसरा, रांची से कंप्यूटर साइंस और टेक्लॉनजी में स्नातक। गाँधी कि कर्मभूमि चम्पारण से हूँ। समसामयिकी पर कड़ी नजर और इतिहास से ख़ास लगाव। भारत के राजनितिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक इतिहास में दिलचस्पी ।

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