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    पानी की समस्या और समाधान

    पानी की कमी के महत्वपूर्ण कारण (reasons for water scarcity in hindi)

    1. पानी का अत्यधिक दुरुपयोग

    पानी का दोहन एक ऐसा कारण है जो कि पानी की कमी के प्रमुख कारणों में माना जाता है यह सिर्फ लोगों के नहाते-धोने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, जानवरों फैक्ट्रियों आदि के द्वारा भी पानी का बड़े पैमाने पर दोहन हो रहा है। इसके अलावा भी बहुत सारे क्षेत्रों में पानी का आना बनाया सदुपयोग होना भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।

    2. जल प्रदूषण

    जल प्रदूषण एक बड़ी समस्या है खासकर अगर हम विश्व के उन हिस्सों की बात करें, जहां पर कचरा निकासी का कोई मजबूत ढाँचा नहीं है। ये कचरे कुछ भी हो सकते हैं, जैसे कि किसी तेल फैक्ट्री के कचरा, रासायनिक फैक्ट्री का कचरा, आम आदमी के जीवन शैली से उत्पन्न कचरा, तथा पशुओं के मृत शरीरों से उत्पन्न कचरा आदि।

    इससे कोई फर्क नही पड़ता कि ये कचरे क्या हैं, किस रूप में हैं, लेकिन ये जरूर समझा जाना चाहिए कि इन सभी से पानी बुरी तरह से प्रदूषित होता है।

    3. सूखा

    पानी की कमी की बात कर रहे हो तो सूखे का नाम आना लाजमी है। भारत ही नहीं विश्व के कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बराबर बनी रहती है। जब पानी बरसेगा नहीं, तो भू जल का स्तर इतना नीचे हो जाएगा कि लोगों के लिए पानी निकालना लगभग असंभव हो जाएगा। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि इस स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास ज्यादा कुछ खास होता भी नहीं है।

    4. पानी के स्त्रोत की कमी

    भौगोलिक तौर पर देखा जाए तो दुनिया के बहुत सारे क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर पानी के स्रोत ही नहीं है अगर है भी तो कई किलोमीटर दूर पर है इन परिस्थितियों में भी लोगों को जीवन जीने के लिए पानी तो चाहिए ही होता है।

    पानी की कमी के प्रभाव (effects of water scarcity in hindi)

    1. पीने के पानी की भारी कमी

    अगर आदमी दो-चार दिन में एक बार ही नहायेगा तो चल जाएगा, अगर आदमी अपने कपड़ों को बार-बार नहीं धोएगा तभी भी चल जाएगा लेकिन अगर आदमी पानी नहीं पी पाएगा तो बिल्कुल नहीं चल पाएगा। सबसे बड़ा प्रभाव यही पड़ता है कि लोगों को पीने तक कि पानी के लिए दर-ब-दर भटकना पड़ता है।

    स्वच्छ और साफ पानी की तो बात छोड़िए, बहुत सारे क्षेत्र तो ऐसे भी हैं जहाँ नदियों, जलाशयों तक के पानी के लिए लोगों को कई किलोमीटर तक भटकना पड़ता है।

    2. अशिक्षा

    पानी की कमी से अशिक्षा जैसी बड़ी समस्या भी भयंकर रुप ले लेती है। दरासल वो बच्चे जिन्हें स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई करनी चाहिए थी, वह अपने माता पिता या बड़ो के साथ पानी खोजने में और उसके घर तक लाने में ही रह जाते हैं। स्कूल जाने तक का उन्हें मौका नहीं मिल पाता है।

    3. भुखमरी

    जरा सोचिए अगर पानी नहीं होगा अगर पानी नहीं होगा तो अन्न कैसे उगेंगे? अगर अन्न नही उगेंगे तो खाया क्या जाएगा? जिन लोगों के पास पीने का पानी नहीं हो पाता, वो अन्न नही उगा पाते। और वो इतने सक्षम भी नहीं होते हैं, कि वो अन्न खरीद सकें। इस स्थिति में वो भुखमरी का शिकार हो जाते हैं।

    4. गरीबी

    जो लोग अपना सारा समय पानी खोजने और उसको अपने घर में ही लगा देते हैं उनको दूसरी चीजों के लिए समय नहीं मिल पाता। फलस्वरूप वो दिन-प्रतिदिन गरीब होते चले जाते हैं।

    5. बीमारियाँ

    पानी आदमी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन अगर यही पानी स्वक्ष ना हो और फिर भी पिया जाए जो की अक्सर पानी की कमी के क्षेत्र वाले में किया जाता है तो पानी काफी नुकसान भी पहुंचाता है नतीजा यह निकलता है कि उन लोगों को तमाम तरह की बीमारियां घेर लेती हैं।

    जब भी समस्याएं होती हैं तो उनका उपाय भी होता है लेकिन जरूरत होती है उसको समझने और लागू करने कि यहां पर भी सारे बहुत सारे उपाय हैं जिन पर अगर ध्यान दिया जाए तो आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाने में आसानी हो जाएगी।

    पानी की समस्या का समाधान (water problem and solution in hindi)

    1. शिक्षा-जागरूकता

    शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा बड़ी से बड़ी समस्या को हल करने में आसानी हो जाती जिसके पास पानी खोजने तथा उस को घर लाने का ही समय होता है उनको तो शिक्षित कर पाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन बाकी की दुनिया जिसके पास फिलहाल पानी है उन को जागरुक करना बेहद जरूरी है उनके दिमाग में पानी की अनावश्यक उपयोग आने वाली पीढ़ी के लिए घातक हो सकता है पानी बचाने में मददगार हो सकता है

    2. पानी पुनर्चक्रण के द्वारा

    आज के इस टेक्नोलॉजी वाली युग में बहुत सारी तकनीकी जन्म ले रही है, जो पानी के पुनर्चक्रण (रीसाइकिल) यानी दोबारा उपयोग में लाने वाले लायक बदलने में सक्षम है। यह भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस्राइल इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। लेकिन यह जरूर देखा जाना चाहिए कि पानी को पीने लायक बनाने के चक्कर में प्रकृति के दूसरे तत्वों को नुकसान ना पहुंचे।

    3. कृषि सिंचाई पद्धति में बदलाव करके

    कृषि में सिंचाई में काफी सारा पानी थक जाता है लेकिन जिस से उस क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार गिरता जाता है लेकिन अगर इससे किसान ड्रिप पद्धति या झूम पद्धति अपनाए तो पानी को बचाया जा सकता है। फिर जब खेतों में पानी की खपत कम होगी तो पीने लायक पानी की बचत होगी।

    4. कचरा निकालने का व्यवस्था करके

    स्वच्छ पीने लायक जल की शुरुआत होती है एक व्यवस्थित कचरा निकासी के ढांचे से। क्योंकि बिना स्वच्छ वातावरण के हम स्वच्छ पानी की कल्पना भी नहीं कर सकते। इसीलिए कचरा निकासी के लिए एक व्यवस्थित ढांचा बनाना बहुत जरूरी होता है।

    5. जल संरक्षण करके

    जल संरक्षण की दिशा में काफी कुछ किया जा सकता है जब बारिश होती है तो जल संरक्षण में कोई खास व्यवस्था ना होने की वजह से सारा पानी नालियों और नदियों के जरिए होते हुए समुद्र में चला जाता है। जिससे भूजल स्तर नही बढ़ पाता।

    गांवों के बाहर बड़े- तालाब बनवाकर अगर उसी पानी को एकत्रित कर लिया जाय तो उससे भूजल स्तर सुधारने में काफी मदद तो मिलेगी ही साथ में उस पाने को सिंचाई में भी प्रयोग कर सकेंगे।

    By मनीष कुमार साहू

    मनीष साहू, केंद्रीय विश्वविद्यालय इलाहाबाद से पत्रकारिता में स्नातक कर रहे हैं और इस समय अंतिम वर्ष में हैं। इस समय हमारे साथ एक ट्रेनी पत्रकार के रूप में इंटर्नशिप कर रहे हैं। इनकी रुचि कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी में भी है।

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