आतंकियों का पनाहगार बनने पर पाकिस्तान को अलग-थलग कर दें: अमेरिकी सांसद

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अमेरिका की संसद में पेंन्सिल्वेनिया के सांसद स्कॉट पैरी ने धार्मिक और प्रजातीय अल्पसंख्यकों को समर्थन देने की बात को दोहराया है। उन्होंने कहा कि “हम मंगलवार को एकसाथ दक्षिण एशिया, विशेषकर पाकिस्तान में धार्मिक भेदभाव को रोकने के लिए आये थे।”

दक्षिण एशिया के जानकार, अमेरिकी संसद के सदस्य और हाउस के प्रतिनिधियों ने कैपिटोल हिल में मुलाकात की थी और पाकिस्तान से प्रजातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के शोषण रोकने का आग्रह किया था। एएनआई से बातचीत में पैरी ने कहा कि “अगर पाकिस्तान आतंकवाद का पनाहगार बनता है तो उसे राष्ट्रों के समुदाय से अलग-थलग कर देना चाहिए।”

पैरी से सभी जूझते प्रजातीय और धार्मिक समूहों की दुर्दशा को रेखांकित किया और कैसे पाकिस्तान ने अभी तक अपनी सरजमीं से संचालित आतंकवाद के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि “हम कभी कही भी धार्मिक आस्था या अन्य कारणों के लिए अल्पसंख्यकों के शोषण के तथ्य का समर्थन नहीं करेंगे। यही कारण है कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में खटास है क्योंकि हम कभी इसे स्वीकार नहीं करेंगे।”

इस माह की शुरुआत में सांसद ने उच्च सदन में एक प्रस्ताव पेश किया था जिसमे पाकिस्तान से आतंकी की सुरक्षित पनाह को हटाने की मांग की गयी थी। इस प्रस्ताव में पुलवामा आतंकी हमले की भी निंदा की गयी थी जिसे पाकिस्तान में मौजूद आतंकी समूह जैश ए मोहम्मद ने अंजाम दिया था। 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानो की मौत हुई थी।

मोहजिरस के प्रारिनिधियों,  पश्तून और बलोच समुदायों ने मंगलवार को मानव अधिकार उल्लंघन के बाबत बताया था और पाकिस्तान में अन्य समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये के बाबत जानकारी दी थी। इस समूह का प्रतिनिधित्व वॉइस ऑफ़ कराची और दक्षिण एशिया अल्पसंख्यक गठबंधन फाउंडेशन के अध्यक्ष नदीम नुसरत ने किया था।

उन्होंने पाकिस्तान के प्रत्येक प्रजातीय और धार्मिक समूहो द्वारा झेले जा रहे विनाशकारी प्रभावों को साझा किया था। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान पर दबाव बनाने का तरीका है, यह प्रतिबन्ध और यूरोपीय देशो का इसमें शामिल होना है ताकि अल्पसंख्यकों को राहत की सांस मिल सके। नागरिक होने के नाते हमारे अधिकार है लेकिन पाकिस्तान ने इन्हे सिर्फ दस्तावेजों में ही गारंटी दी है।”

उन्होंने कहा कि “हमने कराची के मसलो और पाकिस्तान के शहरो के मुद्दों को उठाया है, जहां बड़े पैमाने पर मानवाधिकारो का उल्लंघन किया जा रहा है। हम धार्मिक अल्पसंख्यकों की दुर्दशा की तरफ रौशनी डालना चाहते हैं, हम पाकिस्तान में प्रजातीय अल्पसंख्यकों के शोषण के बाबत भी बातचीत करते हैं।”

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