दा इंडियन वायर » विज्ञान » पर्णहरित क्या होता है?
विज्ञान

पर्णहरित क्या होता है?

Chlorophyll in hindi

पर्णहरित क्या है? (What is Chlorophyll)

पर्णहरित यानि क्लोरोफिल एक कंपाउंड है जिसे चिलेट (Chelate) के नाम से जाना जाता है। चिलेट्स में बड़े ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स से बंधे केंद्रीय धातु आयन होते हैं जो हाइड्रोजन, कार्बन या अन्य तत्वों से बने होते हैं। क्लोरोफिल विभिन्न रूपों में हो सकता है और पिग्मेंट है जो पौधों को उनके हरे रंग का रंग देता है।

क्लोरोफिल कुछ प्रकाश तरंगों को अवशोषित करने में सक्षम होता है लेकिन यह हरे रंग को अवशोषित नहीं कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप पौधे का रंग हरा होता है। क्लोरोफिल फोटोसिंथेसिस के लिए भी महत्वपूर्ण है और पौधों के क्लोरोप्लास्ट में पाया जाता है। क्लोरोफिल संरचनाओं के विभिन्न प्रकार होते हैं लेकिन पौधों में केवल क्लोरोफिल ए और बी होता है, जो केवल एक दूसरे से थोड़ा अलग होता है।

पौधों में पर्णहरित की भूमिका (Role of Chlorophyll)

पौधों को उनके हरे रंग के रंग देने के अलावा, क्लोरोफिल फोटोसिंथेसिस के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सूर्य की रोशनी की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलने में मदद करता है।

प्रकाश संश्लेषण के साथ, क्लोरोफिल ऊर्जा को अवशोषित करता है और फिर पानी और कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और कार्बोहाइड्रेट में बदल देता है। फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया सौर ऊर्जा को पौधों के लिए उपयोग करने योग्य रूप में परिवर्तित करती है, और जानवर जो उन्हें खाते हैं, कुछ खाद्य श्रृंखलाओं की नींव बनाते हैं।

प्रकाश संश्लेषण क्या है? (photosynthesis)

प्रकाश संश्लेषण एक प्रतिक्रिया है जो पानी और कार्बन डाइऑक्साइड के बीच होती है, जो ग्लूकोज और ऑक्सीजन का उत्पादन करने के लिए सूरज की रोशनी से उत्प्रेरित होती है। फोटोसिंथेसिस के दौरान, इलेक्ट्रॉनों को पानी से कार्बन डाइऑक्साइड में स्थानांतरित किया जाता है जिसे रिडक्शन प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है।

क्लोरोफिल सौर ऊर्जा को फँसाने के लिए इस प्रक्रिया में सहायता करता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड मॉलिक्यूल्स में इलेक्ट्रॉनों का आसानी से ट्रांसफर हो जाता है।

सबसे पहले पर्णहरित:

1817 में क्लोरोफिल को सबसे पहले अलग किया गया था और जोसेफ़ बिएनएमे कैवेन्टौ और पियरे जोसेफ पेलेटियर द्वारा नामित किया गया था। क्लोरोफिल में मैग्नीशियम की उपस्थिति 1906 में खोजी गई थी, और यह पहली बार था जब लिविंग टिश्यू में मैग्नीशियम का पता चला था।

1905 से 1915 तक जर्मन केमिस्ट रिचर्ड विल्स्टेटर द्वारा किए गए प्रारंभिक काम के बाद, क्लोरोफिल की सामान्य संरचना 1940 में हंस फिशर द्वारा स्पष्ट की गई थी। 1960 तक, क्लोरोफिल की अधिकांश स्टीरियोकेमिस्ट्री का पता था, रॉबर्ट बर्न्स वुडवर्ड ने मॉलिक्यूल का टोटल सिंथेसिस प्रकाशित किया था। 1967 में, आखिरी शेष स्टीरियोकेमिकल व्याख्यान इयान फ्लेमिंग द्वारा पूरा किया गया था। और 1990 में वुडवर्ड और सह-लेखकों ने एक अपडेटिड सिंथेसिस प्रकाशित किया।

पर्णहरित के प्रकार (Types of Chlorophyll)

क्लोरोफिल सेलुलर ऑर्गेनेल है जो जीवों को फोटोसिंथेसिस के माध्यम से अपने स्वयं के भोजन का उत्पादन करने की अनुमति देता है। सभी पौधे और सूक्ष्मजीवों के कई अलग-अलग प्रकार फोटोसिंथेसिस के माध्यम से गुज़रते हैं। एलगी एक व्यापक शब्द है जिसमें कई प्रकार के फ़ोटोसिंथेटिक सूक्ष्मजीव शामिल हैं, और एलगी में कई प्रकार के क्लोरोफिल मौजूद होते हैं।

1. पर्णहरित ए (Chlorophyll A)

क्लोरोफिल ए उन सभी जीवों में पाया जाता है जो फोटोसिंथेसाइज करते हैं, इन्क्लूडिंग एलगी। क्लोरोफिल को बेहद आवश्यक माना जाता है और इसके पीछे का मुख्य कारण है कि यह सूरज की रोशनी के प्रकाश में आने वाली हल्की वेवलेंथ को पकड़ने में सक्षम है।

एक बार जब क्लोरोफिल ए (जो क्लोरोप्लास्ट नामक एक ऑर्गेनेल में स्थित होता है) द्वारा कब्जा कर लिया जाता है, सूरज की रोशनी पानी और कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलती है ताकि एलगी सेल्स के कार्य को शक्ति देने के लिए ऊर्जा और ग्लूकोज मॉलिक्यूल्स का उत्पादन किया जाता है। क्लोरोफिल एक हरा पिग्मेंट है, जो पौधों और कई एलगी को उनके प्राकृतिक हरे रंग का रंग देता है।

2. पर्णहरित बी (Chlorophyll B)

क्लोरोफिल बी पौधों और हरे एलगी में पाया गया एक हरा क्लोरोफिल पिग्मेंट है। क्लोरोफिल बी क्लोरोफिल की सूरज की रोशनी को पकड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। ग्रीन एलगी जीवों का एक व्यापक, अनौपचारिक वर्गीकरण है जिसमें किंगडम मोनेरा (सिंगल-सेल जीव जिनमें न्यूक्लियस नहीं होता है) और किंगडम प्रोटिस्टा (अधिक जटिल सिंगल-सेल जीव जिनमे न्यूक्लियस होते हैं) शामिल हैं। ग्रीन एलगी ताजे पानी और महासागर में पाए जाने वाले सबसे आम जीव हैं, और वे ऑक्सीजन के एक प्रमुख सप्लायर भी हैं, जो फोटोसिंथेसिस के दौरान उत्पादित होते हैं।

3. पर्णहरित सी (Chlorophyll C)

क्लोरोफिल सी कुछ प्रकार की ही एलगी में होता है, जिसमें डिनोफ्लैगेटेट्स (dinoflagellates) भी शामिल हैं। क्लोरोफिल बी के समान, क्लोरोफिल सी क्लोरोफिल को सूर्य की रोशनी एकत्र करने में मदद करता है, लेकिन यह एक प्रारंभिक चरण से परे फोटोसिंथेसिस में भाग नहीं लेता है।

क्लोरोफिल सी एक लाल भूरा पिग्मेंट होता है और डिनोफ्लैगलेट को अपना विशिष्ट रंग देता है। दरअसल, डिनोफ्लैगेटेट्स को बड़ी संख्या में समूह (जिसे “ब्लूम” के नाम से जाना जाता है) में जाना जाता है और यह पानी के पूरे शरीर को लाल कर देता।

4. अन्य पिगमेंट्स

एलगी में पाए जाने वाले अन्य पिगमेंट्स भी होते हैं जो क्लोरोफिल के समान ही होते हैं, हालांकि वे सीधे सूर्य की रोशनी नहीं लेते हैं। इसका एक उदाहरण कैरोटेनोइड है, जो एक भूरा पिग्मेंट है (और ब्राउन एलगी में पाया जाता है, जो डिनोफ्लैगेटेट्स के समान होता है)।

इसके अतिरिक्त, कुछ प्रकार के एलगी में क्लोरोफिलिन और फाइकोबिलिन होते हैं, जो क्लोरोफिल से प्राप्त पानी में घुलने वाला नमक होते हैं जो सूरज की रोशनी को पकड़ने में मदद के लिए उपयोग किए जाते हैं (हालांकि फोटोसिंथेसिस किसी एक में नहीं होता है), और जो क्लोरोप्लास्ट में भी पाए जाते हैं।

यह लेख आपको कैसा लगा?

नीचे रेटिंग देकर हमें बताइये, ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके

औसत रेटिंग 4.7 / 5. कुल रेटिंग : 87

कोई रेटिंग नहीं, कृपया रेटिंग दीजिये

यदि यह लेख आपको पसंद आया,

सोशल मीडिया पर हमारे साथ जुड़ें

हमें खेद है की यह लेख आपको पसंद नहीं आया,

हमें इसे और बेहतर बनाने के लिए आपके सुझाव चाहिए

कृपया हमें बताएं हम इसमें क्या सुधार कर सकते है?

इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

About the author

अपूर्वा सिंह

Add Comment

Click here to post a comment

फेसबुक पर दा इंडियन वायर से जुड़िये!