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न्यूटन के तीन गति नियम


न्यूटन के तीन  नियम भौतिकी विज्ञान का आधार हैं जो वस्तुओं की गति पर आधारित है । इस नियम की खोज न्यूटन ने सन्न 1668 में की थी। उसी साल ये नियम उन्होंने अपनी किताब ‘Mathematical Principles of Natural Philosophy’ में प्रकाशित की थी।

कई प्रयोगों के हिसाब से ये नियम लगभग सत्य साबित हुई है, अतः इन्हें सत्य साबित करने की आवश्यकता नहीं रही है।

ये गति नियम भारी पिंडों की गति और उनके बीच के मेल-जोल को दर्शाते हैं। पिछले साढ़े तीन सौ वर्षों से ये नियम भौतिकी विज्ञानं के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज करते रहे हैं। इन नियमों कारण वैज्ञानिक कई अत्याधुनिक खोजों को अंजाम देने में सफल रहे हैं।

न्यूटन इस सदी के सबसे महानतम वैज्ञानिकों में से एक रहे हैं। एरिस्टोटल और गैलीलियो जैसे वैज्ञानिकों क विचार को आधार बनाके उन्होंने इन नियमों की खोज की। ऊष्मप्रवैगिकी, खगोल विज्ञान आदि इन्हीं गति नियमों पर आधारित हैं। न्यूटन के ये तीन नियम शास्त्रीय यांत्रिकी (classical mechanics)  की नींव हैं। ये हमारे प्रतिदिन के जीवन में अवतरित उदाहरणों को समझने में काम आती हैं।

इन नियमों के आधार पर न्यूटन  ने गुरुत्वाकर्षण (gravity) और ग्रहों (planets) की  गति के बारे में गहराई से अध्ययन किया और उनसे सम्बंधित नियम दिए। बाह्य शक्तियों (ecternal forces) का ग्रहों की गति  पर क्या प्रभाव पड़ता है  – न्यूटन ने इस तथ्य को बहुत अच्छे से समझाया जिनके आधार पर आधुनिक वैज्ञानिक आज खगोलीय पिंडों के बारे में गहन अध्ययन कर पा रहे हैं।

न्यूटन के गति के नियम (newton law of motion hindi)

अपने तीनों नियमों को तैयार करते वक्त न्यूटन ने सरलीकृत (simplified) तरीके से भारी पिंडों (heavy mass bodies) को गणितीय अंक (mathematical point) मान लिया जिनका न भार था न वे चक्कर (rotation) लगा सकते थे। इस वजह से पिंडों के कई दूसरे कारक जैसे घर्षण (friction), तापमान, हवा प्रतिरोध (air resistance), भौतिक विशेषताएं (material properties)  आदि को मानने की जरुरत नहीं पड़ी और वे उन कारकों पर ध्यान दे पाए जो इस अध्ययन के लिए जरुरी था जैसे कि भार, लम्बाई और समय। इस प्रकार से न्यूटन के गति नियम लगभग हर उदाहरण को सही सिद्ध करने में सफल रहे।

न्यूटन के नियम, जड़त्वीय घर्षण संदर्भ फ्रेम (inertial frameof reference) में पाए जाने वाले भारी पिंडों से सम्बद्ध (pertain) रखते हैं, जिनको न्यूटोनियन घर्षित फ्रेम (Newtonian Inertial frame of reference) भी कहा जाता है। घर्षण संदर्भ फ्रेम को तीन आयामी समन्वय प्रणाली (dimensional coordination system) माना गया है जो स्थिर (stationary) या वर्दी रेखीय गति (uniform linear motion) में होता है।यह तेज गति (acceleration) या घूर्णन (rotation) अवस्था में होता है। इस प्रकार के जड़त्वीय संदर्भ फ्रेम सन्दर्भ में स्थित गति को इन तीन नियमों के द्वारा विस्तार से व्यक्त किया जा सकता है।

न्यूटन की गति का पहला नियम (newton first law of motion in hindi)

पहला नियम इस प्रकार है:

“कोई भी वस्तु स्थिर वेग के साथ तब तक विराम अवस्था में रहती है या गति की अवस्था में तब तक रहती है, जब तक किसी बाह्य बल के द्वारा उस वस्तु की गति में परिवर्तन न किया जाये।”

इसका मतलब यह है की वस्तुएं अपने आप से न तो अपनी गति शुरू कर सकती हैं, न रोक सकती हैं और न ही दिशा बदल सकती हैं। इस प्रकार के बदलाव के लिए बाहरी बलों (force) की आवश्यकता होती है। उदारणस्वरूप जब आप पेड़ की डाली को हिलाते हो तो उसके पत्ते निचे गिरते हैं, कोई वाहन जब अचानक से चल पड़ता है, तो यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं इत्यादि।

भारी पिंडों का यह स्वभाव, जिसमें वे अपनी गति में आने वाले बदलाव को होने से रोकते हैं, उसको विराम की अवस्था (inertia) कहा जाता है।

न्यूटन की गति का दूसरा नियम (newton second law in hindi)

दूसरा नियम इस प्रकार है:

“जब वस्तु का भार m रहता है, उसके वेग का मन a  रहता है, तब उसपर लगने वाले बल यानि की F  का मान इस प्रकार से निकाला जायगा:

F = m*a

यहाँ पर वेग एवं बल वेक्टर हैं यानि इनकी परिमाण और दिशा होगी । इस नियम में बल की दिशा वेग के सामान ही रहेगी। यहाँ बल का मान या तो एक रहेगा या सभी बलों क मान को मिलकर वेक्टर के रूप में दिया रहेगा।”

यह नियम बात को दर्शाता है की भारी पिंडो की गति कैसी होती है जब उन पर बाह्य बलों का क्या असर होगा। तीनों नियमों में यह नियम सबसे अधिक महत्व रखता है क्योंकि इसके आधार पर गतिशीलता के मात्रात्मक गणना (quantitative calculations of dynamics) की जाती है। बल का कुल मान हमेशा आवेग (momentum) के परिवर्तन की दर के बराबर रहता है। उदहारण – दीवार में लगे हुए कील को निकलने के लिए हथौड़े का उपयोग करना, कराटे के खिलाड़ी द्वारा हाथ का उपयोग करके ईंट तोड़ देना इत्यादि।

जब स्थायी बल किसी भारी वस्तु पर अपनी हरकत दिखता है, तो स्थायी रूप से  वस्तु के त्वरण (acceleration) में गति अति है और परिणामस्वरूप वेग (velocity)  में गति आती है। जब किसी स्थिर वस्तु पर बल का प्रयोग किया जाता है, तो वह बल की दिशा में त्वरित होती है। लेकिन अगर वस्तु पहले से ही गति में है  और उस पर बल का प्रयोग होगा तो उसकी गति या तो तेज हो जायगी या धीमी। बल के आधार पर उसकी दिशा भी बदल सकती है।

न्यूटन की गति का तीसरा नियम (newton third law in hindi)

यह इस प्रकार है:

“किसी वस्तु द्वारा की गयी क्रिया (action) के उसके बराबर में और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया (reaction)  होती है।”

इसे क्रिया-प्रतिक्रिया नियम भी कहा गया है। यह नियम इस बात को दर्शाता है की जब एक वस्तु किसी दूसरे वस्तु से से बल ग्रहित करता है तो क्या होता है। जब एक वस्तु दूसरे वस्तु पर बल का प्रयोग करती है, तब दूसरा वस्तु भी सामान बल के द्वारा प्रतिक्रिया करता है। उदहारण के लिए जब आप किसी भरी चीज को धक्का देते हो, तो आपको भी उस चीज की वजह से धक्का लगता है, केवल दिशा का फर्क होता है।

अगर किसी वस्तु का भार किसी दूसरे वस्तु के मुकाबले में ज्यादा है, तो वास्तव में सारा त्वरण दूसरे वस्तु में स्थान्तरित हो जाता है और पहले वस्तु के त्वरण को नहीं माना जाता ।

इस विषय से सम्बंधित सवाल एवं सुझाव आप कमेंट बॉक्स में लिखा सकते हैं।

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गरिमा गुंजन

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