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    दक्षिणी चीनी सागर में थितु द्वीप

    फ़िलीपीन्स के विदेश मंत्रालय ने गुरूवार को बयान जारी कर बताया कि “विवादित दक्षिणी चीनी सागर पर स्थित मनिला के आधिपत्य वाले द्वीप के निकट सैकड़ों चीनी नावों की उपस्थिति साफ़ तौर पर फ़िलीपीन्स की सम्प्रभुता का उल्लंघन हैं। ऐसी कार्रवाई का चीनी सरकार ने खंडन नहीं किया हैं जैसे इसे सोच-समझकर किया गया हो।”

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि “थितु द्वीप के आस पास सिलसिलेवार तरीके से और लम्बे समय तक नावों की मौजूदगी उसके मंसूबों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है और बलपूर्वक उद्देश्य के समर्थन की भूमिका पर चिंताएं जाहिर करती है।” सैन्य आंकड़ों के मुताबिक फ़िलीपीन्स ने थितु द्वीप के पास इस जनवरी से मार्च तक के अंतराल में 200 चीनी नावों को देखा था।

    जाहिर है दो दिन पहले भी फिलीपीन्स नें विवादित इलाके में चीनी जहाज़ों के मौजूद होने पर शिकायत दर्ज की थी

    फ़िलीपीन्स के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने सोमवार को बताया था कि “विवादित दक्षिणी चीनी सागर में मैला द्वारा आधिपत्य द्वीप के नजदीक चीन की 200 से अधिक नाव उपस्थित थी, इस पर फ़िलीपीन्स ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक विरोध व्यक्त किया है।”

    दक्षिण चीनी सागर की सम्प्रभुता पर फ़िलीपीन्स, ब्रूनेई, मलेशिया, चीन, ताइवान और वियतनाम अपने अधिकार का दावा करते हैं। यहां से हर वर्ष 3.4 ट्रिलियन डॉलर के उत्पादन का आयात-निर्यात होता है। चीन के सैकड़ों कृत्रिम द्वीपों की लाइट को थितु के द्वीप से स्पष्ट देखा जा सकता है।

    राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे के चीन के साथ साल 2016 से मधुर सम्बन्ध है, इसके बदले चीन ने अरबो डॉलर के कर्ज व निवेश का संकल्प लिया था।

    हाल ही में फ़िलीपीन्स और अमेरिका ने वार्षिक संयुक्त सैन्य अभियान को खत्म कर दिया था। इसमें ऑस्ट्रेलिया के 50 सैनिकों समेत 7500 सैनिक शामिल होते थे। उनका मकसद प्राकृतिक आपदा के दौरान विस्तृत प्रतिक्रिया देना था।

    फ़िलीपीन्स में नियुक्त चीनी राजदूत ने कहा कि “वह मछुवारों की नावे थी।” ख़बरों के अनुसार नाविकों के पास हथियार मौजूद थे।

    चीन और फिलीपीन्स नें की बैठक

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग नें आज कहा कि चीन और फिलीपीन्स नें दक्षिणी चीन सागर मुद्दे पर बैठक की है और दोनों देशों नें शान्ति से इस मुद्दे को सुलझा लिया है।

    गेंग से जब इस सवाल का जवाब पूछा गया कि फिलीपीन्स नें चीन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, तो उन्होनें कहा कि सभी मसलों को हल कर लिया गया है और दोनों देशों के सम्बन्ध मजबूत हैं।

    गेंग नें कहा, “दोनों देशों नें 2002 में हुए दक्षिणी चीन सागर पर समझौते पर अमल करने का फैसला किया है। उन्होनें कहा कि दोनों देश दक्षिणी चीन सागर में एक शान्ति की स्थिति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    गेंग नें आगे यह भी कहा कि चीन और फिलीपीन्स के बीच सागर विवाद के अलावा भी बहुत कुछ है और सिर्फ इस मुद्दे पर दोनों देशों के रिश्तों को मापना ठीक नहीं होगा।

    दक्षिणी चीन सागर विवाद

    दक्षिणी चीन सागर प्रशांत महासागर का हिस्सा है, जो मुख्य रूप से दक्षिणी एशियाई देशों के इलाके में है। दक्षिणी चीन सागर की सीमा पर चीन, वियतनाम, कम्बोडिया, मलेशिया, फिलिपिन्स, ताइवान और जापान जैसे देश आते हैं।

    south china sea
    दक्षिणी चीन सागर का नक्षा

    यह सागर प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। इस सागर से विश्वभर का लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार होता है। ऐसे में यह सागर किसी भी देश के लिए बहुत जरूरी है।

    चीन पिछले कई दशकों से इस सागर के एक बड़े हिस्से पर अपना कब्ज़ा जमाता आ रहा है। ऐसे में यहाँ मौजूद छोटे देशों नें कई बार विश्व मंच पर चीन के खिलाफ शिकायत दर्ज की है।

    इस सागर पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए चीन नें हाल ही में घोषणा की थी कि वह दक्षिणी चीन सागर में मौजूद एक द्वीप पर एक शहर बसाना चाहता है, जिससे इस इलाके के संचालन में आसानी हो सके।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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