दक्षिणी चीन सागर: चीनी जहाजों का विवादित जल पर नौचालन, फ़िलीपीन्स ने जताया विरोध

चीन और फ़िलीपीन्स

दक्षिणी चीन सागर: फ़िलीपीन्स के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि “विवादित दक्षिणी चीनी सागर में मैला द्वारा आधिपत्य द्वीप के नजदीक चीन की 200 से अधिक नाव उपस्थित थी, इस पर फ़िलीपीन्स ने कुनीतिक विरोध व्यक्त की किया है।” राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे के चीन के साथ साल 2016 से मधुर सम्बन्ध है, इसके बदले चीन ने अरबो डॉलर के कर्ज व निवेश का संकल्प लिया था।

200 से अधिक नावे थी मौजूद

रायटर्स के मुताबिक राष्ट्रपति के प्रवक्ता साल्वाडोर पनेलो ने न्यूज़ कांफ्रेंस में बताया कि “विदेश विभाग ने फ़िलीपीन्स के अधिकार वाले थितु द्वीप के नजदीक चीनी जहाजों की उपस्थिति के खिलाफ विरोध जताया है।” हालाँकि इसमें नाव के प्रकार के बाबत जिक्र नहीं किया है। चीनी राजदूत ने बताया कि वे मछुवारो की नावे थी।

पनेलो ने कहा कि “तथ्य यह है कि वह वहां उपस्थित थे और एक हफ्ते तक वही रहे, क्यों, वह वहां क्या कर रहे थे।” हालाँकि यह अस्पष्ट है कि फ़िलीपीन्स ने विरोध की अर्जी कहाँ दायर की है। फ़िलीपीन्स थितु द्वीप के नजदीक 200 नावों को इस साल के जनवरी से मार्च तक मॉनिटर कर रहा था।

फ़िलीपीन्स, चीन, वियतनाम, ताइवान, ब्रूनेई और मलेशिया इस जलमार्ग की सम्प्रभुता पर अपना दावा करते हैं। यहां से 3.4 ट्रिलियन के माल का आयात-निर्यात होता है। चीन के सैकड़ों कृत्रिम द्वीपों की लाइट को थितु के द्वीप से स्पष्ट देखा जा सकता है।

चीन के मछुवारो की नावे थी

फ़िलीपीन्स में नियुक्त चीनी राजदूत ने कहा कि “चीनी और फिलिपिनो दोनों के मछुवारे इस जल पर उपस्थित थे।” मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी मछुवारों के पास हथियार थे, चीनी राजदूत ने इस बात को ख़ारिज किया है। उन्होंने कहा कि “बीजिंग और मनिला की सरकार कूटनीतिक और मैत्रीपूर्ण तरीके से समुन्द्र के मसलों को सुलझा रही है। विवाद उत्पान होने या न होने की किसी भी तरीके के विद्रोह के बाबत आपको घबराने की जरुरत नहीं है।”

हाल ही में फ़िलीपीन्स और अमेरिका ने वार्षिक संयुक्त सैन्य अभियान को खत्म कर दिया था। इसमें ऑस्ट्रेलिया के 50 सैनिकों समेत 7500 सैनिक शामिल होते थे। उनका मकसद प्राकृतिक आपदा के दौरान विस्तृत प्रतिक्रिया देना था।

बीते माह अमेरिकी राज्य सचिव माइक पोम्पिओ ने फ़िलीपीन्स की सुनिश्चित किया कि दक्षिणी चीनी सागर में हमले के दौरान अमेरिका उनके समर्थन में उतरेगा।

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