बुधवार, अक्टूबर 23, 2019

ताइवान से अमेरिकी युद्धपोत गुजरने पर चीन का पलटवार

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

अमेरिका के युद्धपोत ने ताइवान के जलमार्ग पर नौचालन किया था और इससे दो वैश्विक ताकतों के बीच तनाव बढ़ गया था। चीन ने अमेरिका की इस हरकत के खिलाफ विरोध व्यक्त किया है। अमेरिकी नौसेना के मुताबिक यूएसएस प्रेबले एक विध्वंशक जहाज और एक मालवाहक जहाज यूएसएनएस वॉल्टेर एस दीहल को नियमित नौचालन के लिए बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत भेजा था।

सेना ने कहा कि “जहाजों का ताइवान के जलमार्ग से नौचालन अमेरिका के मुक्त और खुले इंडो पैसिफिक की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करता है। अंतर्राष्ट्रीय कानून जहां अनुमति देगा अमेरिका की नौसेना वहां, उड़ान, नौचालन और अभियान करेगी।”

अमेरिका के युद्धपोत ने नौचालन की आज़ादी का अभ्यास एक संकरे जलमार्ग पर किया था जो ताइवान को मुख्यभूमि ताइवान से अलग करता है। बीजिंग के मुताबिक अमेरिकी युद्धपोत का जलमार्ग से गुजरने से उनकी सम्प्रभुता का उल्लंघन हुआ था। जबकि अमेरिका और अन्य राष्ट्रों के नजरिए से अंतर्राष्ट्रीय जल सभी देशों के लिए उपलब्ध है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने बताया कि “हमने अमेरिका से इसका विरोध व्यक्त किया है।” इस नौचालन ने  अमेरिका और चीन के बीच तनाव को बढ़ा दिया था। दोनों देशों के बीच इसके आलावा व्यापार युद्ध भी जारी है। अमेरिका सुरक्षा कारणों से चीन की दिग्गज टेलीकॉम हुआवेई को बंद करने का प्रयास कर रहा है।

हाल ही में अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया ने गुआम के नजदीक पैसिफिक वैनगार्ड में एक अभियान किया था। चार देशों से 3000 से अधिक सैनिक इसमें शामिल हुए थे। बीजिंग ने कहा कि ताइवान के जलमार्ग से फ्रांस के युध्दपोत का गुजरना गैरकानूनी है।

ताइवान के घेरे में चीन लगातार जंगी विमान और जहाजों को अभियान के लिए भेजता है। बीते कुछ वर्षों ने चीन ने ताइवान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया है और अब उसके चंद कूटनीतिक साझेदार ही शेष है। पेंटागन के मुताबिक साल 2010 से तायपेई को 15 अरब डॉलर से अधिक के हथियार बेच चुके हैं। द्वीप पर अपनी सम्प्रभुता के लिए चीन काफी दबाव बढ़ा रहा है।

गुआम की नौसैन्य ड्रिल में अमेरिका ने दो युद्धपोतों का योगदान दिया था,जापान ने दो विध्वंशकों एयर दक्षिण कोरिया ने एक विध्वंशक का योगदान दिया था।

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