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तमाशा: निर्देशक इम्तियाज़ अली ने याद किया रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण का वो आइकोनिक दृश्य

तमाशा: निर्देशक इम्तियाज़ अली ने याद किया रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण का वो आइकोनिक दृश्य

जब हम एक फिल्म देखते हैं तो अक्सर ऐसे कुछ लम्हे होते हैं जो दर्शको के दिलों में एक पक्की जगह बना कर बैठ जाते हैं। ऐसा ही एक दृश्य था इम्तियाज़ अली निर्देशित फिल्म “तमाशा” का जब दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर एक कैफ़े में मिलते हैं।

फिल्म के नायक वेद और तारा के उस दृश्य में, जब दोनों का सामना होता है तो वो दृश्य इतना भावुक और देखने में इतना दिल छू लेने वाला होता है कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जबकि रिलीज़ के चार साल बाद वो दृश्य आइकोनिक बन गया है, निर्देशक इम्तियाज़ अली ने बताया कि उस लम्हे को सजाने के लिए क्या क्या मेहनत लगी।

फिल्म कम्पैनियन को एक साल पहले दिए इंटरव्यू में, अली ने साझा किया कि दृश्य को दो रातों में शूट किया गया था। उन्होंने खुलासा किया कि कभी कभी उन्हें शॉट काटने भी पड़ते थे, ये सुनिश्चित करने के लिए कि तारा रोने ना लगे। क्योंकि अगर वो रो गयी तो वह ठीक नहीं हो पाएगी।

उनके मुताबिक, “यह दृश्य दो रातों में शूट किया गया था। एक बिंदु था जहाँ तारा रोने लगेगी। उसे उस बिंदु पर वापस लाने के लिए जहां वह रो नहीं रही थी, और फिर रोने की कगार पर ले जाने के बीच सुलझाना होगा। इसलिए मैं उसे देख रहा था और मुझे पता था कि वह भावनात्मक रूप से कहां जा रही है। मैं हमेशा एक शॉट काट रहा था, कभी-कभी शानदार शॉट भी क्योंकि अगर वह रो जाती तो ठीक नहीं होती।”

अली ने ये भी बताया कि उन्हें इस दृश्य को निभाने के लिए दीपिका और रणबीर जैसे अभिनेताओं की ही जरुरत थी। जब दृश्य पूरा तैयार भी नहीं था और वह लोग इसे पढ़ रहे थे तो उन्होंने खुद की इसमें काफी चीज़ें जोड़ी जैसे तारा का देव का पीछा करना, तारा का ज़मीन पर बैठना बुरी तरह से सिसकना।

अली के हिसाब से दृश्य निर्दयी थी जिसमे देव को पता था कि वह क्या कर रहा है और जैसे वह तारा के साथ व्यवहार कर रहा था। मगर ये समझने के बाद भी वह खुद को नियंत्रित नहीं कर पा रहा था और इस प्रक्रिया में वेद के दोहरे चरित्र दर्शको के सामने एकदम स्पष्ट हो गए थे। जबकि तारा उसे खोना नहीं चाहती थी और उसे पता था कि वह जो भी कहेगी, वह वेद को ट्रिगर करेगा।

और इस दृश्य में चार चाँद लगाये उस गीत ने जो दर्द से भरा होने के बाद भी दिल को सुकून देता है। वह गीत है ‘अगर तुम साथ हो’ जिसे अलका याग्निक ने गाया है।

 

About the author

साक्षी बंसल

पत्रकारिता की छात्रा जिसे ख़बरों की दुनिया में रूचि है।

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