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    अफ्रीका में चीनी प्रोजेक्ट

    अफ्रीका के समस्त इलाकों में चीन की वित्तीय सहायता से निर्मित ढांचों को देखकर जापान आखिकार इसमें शामिल हो गया है। साल 2016 में टोक्यो इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन अफ्रीकन डेवलपमेंट में जापानी सरकार ने 30 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता का संकल्प लिया था, इसमें 10 अरब का कर्ज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए था। हालाँकि चीन द्वारा प्रस्तावित रकम से जापान की राशि कम थी।

    द डिप्लोमेट के अनुसार, साल 2018 में चीन ने 60 अरब डॉलर की सहायता और कर्ज दिया था। हालाँकि ढांचागत विकास की जरुरत के लिए अफ्रीकी राष्ट्रों के अतिरिक्त चयन अच्छा है। चीनी वित्तीय सहायता पर आशंका के बढ़ने के कारण आज अतिरिक्त चयन का स्वागत किया जा रहा है। लेखक सिओचेन सु ने कहा कि “जैसे मैंने साल 2017 के आर्टिकल में बताया था कि अफ्रीकी राष्ट्रों पर चीन का अंधाधुंध कर्ज उन्हें कर्ज के अन्धकार की तरफ धकेल देगा। नतीजतन, कर्ज का मकड़जाल अफ्रीकी राष्ट्रों की सम्प्रभुता के लिए विनाशकारी बन जायेगा, क्योंकि चीन कर्ज वापसी के लिए नयी रणनीति तैयार करेगा।”

    उन्होंने कहा कि “अफ्रीकी राष्ट्रों को श्रीलंका की हालात देखते हुए चीन से कर्ज लेने से पूर्व दो बार सोचना चाहिए था। यहां तक की मलेशिया और पाकिस्तान भी अब चीनी वित्तीय परियोजना से दूरी बना रहे हैं। कई बुद्धिजीवियों के मुताबिक असतत इंफ्रास्ट्रक्चर कर्ज के लिए पूरी तरह चीन को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। ईस्ट अफ्रीका में चीन का प्रोजेक्ट नैरोबी-मोम्बासा रेलवे अभी 99.4 मिलियन डॉलर कर्ज से जूझ रहा है। अफ्रीका में चीनी समर्थित परियोजना का यह कोई दुर्लभ उदहारण नहीं है।

    अपर्याप्त वसूली के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर के कर्ज को चुकता करना मुश्किल हो रहा है। जापान का अतिरिक्त कर्ज देना इस समस्या का समाधान नहीं करेगा। चीन के मुकाबले जापान का सार्वजानिक ट्रांसपोर्ट का ‘हाइब्रिड बिज़नेस मॉडल’ अधिक कारगे और फायदेमंद है। इस मॉडल को समझने के लिए जापान की प्राइवेट रेलवे कंपनी कैकयू पर एक नजर डालनी होगी। कैकयू रेलवे का नफा और नुकसान यह दिखाता है कि ऋणमुक्ति और मूल्य कम करने से पूर्व कंपनी ने पैसा गंवाया था, लेकिन कंपनी के अन्य कारोबार, रियल स्टेट निर्माण और शॉपिंग सेंटर और अन्य सुविधाओं ने नुकसान की भरपाई कर दी और बेहद फायदा हुआ।

    कैकयू समूह या अन्य कंपनियों जिन्होंने बस, टैक्सी, फ़ूड, किराये पर कार और गोल्फ रिसोर्ट ने फायदे से अधिक कमाया है। ऐसे ही जापान ने सार्वजानिक परिवहन मुहैया करने वालों को एकत्र कर के फायदे में परिवर्तित कर दिया। सार्वजानिक परिवहन का यह कारोबार मॉडल चीन के समक्ष नहीं है। चीन के पास कैकयू जैसी कंपनियां नहीं है जो अपने कारोबार का विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार कर सार्वजानिक परिवहन को फायदेमंद बना रही है। चीनी कंपनियां अफ्रीकी राष्ट्रों को फीस और टिकट बेचने के आलावा वसूली को बढ़ाने का मशविरा देने में असक्षम है।

    इसमें कोई संदेह नहीं है कि अफ्रीकी इंफ्रास्ट्रक्टर कर्ज असतत है और भारी इस्तेमाल के बावजूद विशाल परियोजना नुकसान उठा रही है। कांग्लोमरेट बिज़नेस मॉडल को भेज कर जापान अफ्रीकी राष्ट्रों में चीनी प्रभुत्व को भेद सकता है। कैकयू का बिज़नेस मॉडल अफ्रीका के प्रमुख शहरो में इस्तेमाल होता है। अगर जापान इस कारोबार को अफ्रीका को सौंपता है तो यह चीनी ग्राहकों को छीन सकता है और अफ्रीका को बीजिंग के कर्ज से मुक्ति दे सकता है। चीनी मदद वाली परियोजनाओं में अफ्रीकी राष्ट्र रेवेन्यू के लिए जापान की मदद चाहते हैं, ताकि जल्द कर्ज चुकता किया जा सके। कर्ज के जाल की सार्वजानिक शंकाओ के बाद अफ्रीकी राष्ट्रों को बेहतर विकल्प का चयन कारण चाहिए।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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