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जहरीली शराब से मौत (Hooch Tragedy): “नशा और मजा” का “नाश और मौत” में बदल जाना

Hooch Tragedy

जहरीली शराब के सेवन से मौत (Hooch Tragedy)– भारत के किसी ना किसी कोने से हर दूसरे-तीसरे दिन खबरों में आ ही जाती है। एक तो शराब जिसके नशे में इंसान के होश-ओ-हवास यूँ ही खत्म हो जाये… और फिर ऊपर से यह जहरीली हो तो मौत का तांडव तो होना ही है।

बीते दो हफ़्तों में ज़हरीली शराब के सेवन के कारण पहले गुजरात में 60-65 मौत और अब बिहार के सारण जिले में 13-15 मौतें हो चुकीं है और यह आंकड़ा बढ़ने से पूरे आसार हैं। साथ ही कई लोग इन्हीं दुर्घटनाओं में अन्य तरह के शारिरिक विकृतियों जैसे दृष्टि-दोष या मानसिक अस्थिरता के शिकार हैं।

जहरीली शराब के सेवन से हुई मौत: NCRB आँकड़ा

गौरतलब है कि बिहार और गुजरात दोनों जगह शराबबंदी (Ban on Liquor) लागू है तथा इन राज्यों की सरकारें हर दूसरे मंच पर अपने शराबबंदी की नीतियों का डंका पीटते हैं। इन राज्यों में ऐसा नहीं है कि पहली बार जहरीली शराब के सेवन से मौतें हुईं हैं।

बिहार में मई के महीने में गया और औरंगाबाद जिले में 10-12 मौत तथा उस से पहले मार्च के महीने में होली के समय भी लगभग 40 मौतें जहरीली शराब के सेवन के कारण हुईं थी।

फिर शराब पीने से होने वाली मौत सिर्फ बिहार या गुजरात तक ही महदूद है, ऐसा नहीं है। इस साल जनवरी में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में 8-10 जानें इसी वजह से गई है। फरवरी में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में भी लगभग 10 मौत इसी कारण हुई थीं।

19 जुलाई 2022 को लोकसभा में चर्चा के दौरान गृह मंत्रालय द्वारा दिये गए आंकड़ों के मुताबिक 2016 से 2020 के बीच जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों के मामले में मध्यप्रदेश (1214), कर्नाटक(909), पंजाब (775) छत्तीसगढ़ (505), और राजस्थान (279) टॉप 5 में हैं।

दिलचस्प यह है कि इस दौरान बिहार में इन मौतों का आँकड़ा मात्र 21 दर्ज है जबकि सच्चाई इस से इतर है। दरअसल इन राज्यों में ऐसी घटनाओं के रिपोर्ट दर्ज ही नहीं होते।

अगस्त 2020 में जब पूरा देश कोरोना संकट से जूझ रहा था, तब पंजाब में करीब 111 लोगों की जान मेथेनॉल वाली जहरीली शराब पीकर तड़प तड़प के मर गए थे। इसी साल नवंबर 2020 में हरियाणा के सोनीपत में हुई 28 मौतों को कौन भूल सकता है।

कुल मिलाकर देश का कोई भी राज्य इस त्रासदी से अछूता नहीं है। हर साल कुछ ना कुछ मौतें लगभग हर राज्य में होती हैं।
हालांकि सरकार द्वारा जो आँकड़े संसद में रखे गए (NCRB के आँकड़े), उसके मुताबिक महाराष्ट्र, गोआ, लद्दाख, लक्षद्वीप जैसे भी कुछ राज्य व केंद्र शाषित प्रदेश हैं जहां एक भी मौत इस वजह से दर्ज नहीं हुई है

जहरीली शराब का रसायन (Chemistry Of Hooch)

दरअसल “देशी शराब” या “देशी दारू” का गोरखधंधा देश के हर राज्य में होता है। खासकर उन राज्यों में जहां शराबबंदी है, लोग चोरी छुपे देशी दारू का निर्माण करते हैं और उसका व्यापार किया जाता है।

देशी दारू (Cheap Distilled Liquor) अंग्रेजी या ब्रांडेड शराब के तुलना में सस्ता भी होता है। इसलिए वे लोग जिनकी आय बहुत निम्न हैं, उनको दारू का मजा ही ज्यादा भाता है।

देशी दारू का निर्माण महुआ के फूल, गन्ने के रस, फलों के अवशेष या चावल आदि से किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया द्वारा एक निश्चित तापमान पर मिट्टी के बरतन में पकाकर किया जाता है। इस पूरे प्रक्रिया में  1हफ्ते के आस पास का समय लगता है।

कभी कभी मांग ज्यादा होने के कारण दारू निर्माण करने वाले लोग अधपकी शराब ही बेच देते हैं। यह अधपकी देशी दारू जब नुकसानदेह होती है। लेकिन इस स्थिति में तमाम अन्य तरह के विकार उत्पन्न हो सकते हैं, मौत की संभावना थोड़ी कम होती है।

दूसरा अगर देशी दारू (Cheap Distilled Liquor) में एथिल एल्कोहल (Ethanol – C2H5OH) मेथेनॉल (Industrial Alcohol या CH3OH) को मिला दिया जाता है ताकि पीने वाले को ज्यादा टेस्ट (Taste) और नशा महसूस हो। यही मेथेनॉल मिश्रित दारू असल में जहरीली शराब कहलाती है।

रसायन विज्ञान (Chemistry) के नियमों के अनुसार देशी दारू में मेथेनॉल की सांद्रता (Concentration) एक निश्चित अनुपात (5%) से ज्यादा हो जाये तो यह मौत का सौदा बन जाता है। हमारे शरीर के पाचन तंत्र के लिए 40ML मेथेनॉल की मात्रा भी जानलेवा है।

मेथनॉल मिश्रित शराब जब पेट कब अंदर जाता है तो यह पहले फॉर्मलडिहाइड (Formaldehyde) और बाद में फॉर्मिक एसिड (Formic Acid) में बदल जाता है। ये दोनों रसायन शरीर के विभिन्न अंगों को सबसे पहले क्षति पहुंचाते हैं।

जहरीली शराब वाले मामले में आंखों की दृष्टि का हमेशा के लिए खो जाना आम बात है। वहीं कभी-कभी ज्यादा मात्रा में सेवन कर लेने पर व्यक्ति की मौत हो जाती है।

सरकारी तंत्र की विफलता

जहरीली शराब के सेवन से होने वाली त्रासदी और मौत का मंजर कोई नया नहीं है। पिछले 5 सालों की ही बात करें तो NCRB के आँकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 1000 से ज्यादा मौतें देश भर में इस से होती हैं।

इसके पीछे सरकारी तंत्रों की विफलता भी एक बड़ा कारण है। असल मे शराब भट्टी खोलने के लिए या शराब निर्माण कार्य के लिए सरकार से लाइसेंस चाहिए होता है। सरकार के अंतर्गत आबकारी विभाग इसके लिए मुख्यतः जिम्मेदार होता है।

कई राज्यो में जहाँ शराब बंदी (Ban on Liquor) है, वहाँ चोरी छुपे या कहीं कहीं प्रशासन की मिली भगत से शराब निर्माण का अवैध व्यापार चल रहा होता है। शराबबंदी के कारण इन अवैध कारोबारियों पर सप्लाई का भारी दवाब होता है जिसके कारण कई दफ़ा मेथनॉल मिश्रित दारू की सप्लाई कर दी जाती है। भी हाल में घटित बिहार और गुजरात की घटनाएं इसका जीता जागता उदाहरण हैं।

दूसरा जिन राज्यों में शराबबंदी नहीं है, वहाँ शराब के निर्माण से लेकर बिक्री तक सरकार के नियंत्रण में होता है क्योंकि यह सरकार के राजस्व का एक बड़ा स्रोत होता है। इसके बावजूद भी अगर किसी ऐसे राज्य मे अवैध देशी दारू का निर्माण होता है तो यह निःसंदेह प्रशासन की विफलता ही है।

फिर जब कभी शराब के सेवन से हुई मौत जैसी घटनाएं घटती हैं तो छोटे मोटे अधिकारियों पर गाज गिराई जाती है जबकि बड़े अधिकारी जैसे जिले का DM या SSP जैसे लोगों के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होती।

सरकारों की तय हो जिम्मेदारी

चूँकि ज्यादातर राज्यों में शराब राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। इन उत्पादों को पेट्रोल डीजल के तरह ही GST के दायरे से बाहर रखा गया है। ऐसे में सरकार की ही यह जिम्मेदारी बनती है कि वह सुनिश्चित करे कि उसके राज्य सीमा में कोई भी अवैध शराब का निर्माण नहीं हो।

दुकानों पर बिकने वाले दारू या शराब की गुणवत्ता या रासायनिक संयोजन (Chemical Composition) खासकर मेथेनॉल (CH3OH) और एथनॉल (C2H5OH) की सांद्रता (Concentration) निश्चित दायरे के नीचे ही रहे, इस बाबत भी सरकारी एजेंसियों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

जहरीली शराब से हुई मौतों के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या कंपनी को कड़ी से कड़ी सजा मिले जिसे से समाज को एक संदेश पहुंचे।

अव्वल तो यह हो कि 21वीं सदी का भारत जिसके युवा पीढ़ी में समाज निर्माण और देशनिर्माण का नशा होनी चाहिए, वह अन्य किसी शराब या दारू के नशे में ना पड़े। लेकिन दारू या शराब हमारे समाज की एक कड़वी हक़ीक़त है। इसे कई जगहों में संस्कृति का हिस्सा बना लिया गया है।

इसलिये जरूरी है कि जब हम दारू या शराब पियें तो उसे नियंत्रित मात्रा में जरूरी मापदंडों को पढ़ने के बाद ही सेवन करे। वरना “नशा और मौज” कब “नाश और मौत” का तांडव बन जाये, कोई नहीं जानता।

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Saurav Sangam

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