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    शिनजियांग शिविर

    चीन के पश्चिमी इलाके के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए नजरबंद शिविर बोर्डिंग स्कूल की तरह है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा चीन के नज़रबंदी शिविरों के आलोचना के बाद यहां कैदियों की संख्या घटती जा रही है।

    रायटर्स के मुताबिक चीन अपने शिनजियांग क्षेत्र के उइगर व अन्य अल्पसंख्यक मुस्लिमों को कारावास की सज़ा दे रहा है। इसका विदेशी सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने विरोध किया था।

    तुर्की ने इसके खिलाफ आवाज़ उठायी थी और बीते हफ्ते यूएन मानवधिकार उच्चायुक्त ने इसके लिए जवाब मांगे हैं। विदेशी जानकारों, सॅटॅलाइट तस्वीरों और सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक बिना ट्रायल के लगभग 10 लाख उइगर, कजाख और अन्य मुस्लिमों को यहां बंदी बनाकर रखा गया है, जो चीनी पार्टी के प्रति वफादार बन सके।

    चीनी और विदेशी पत्रकारों के समक्ष शिनजियांग सरकार के चेयरमैन शोहरत ज़ाकिर ने इस आंकलन को खारिज कर दिया है। हालाँकि कितने बंदी वहां मौजूद है इस बाबत कोईजानकारी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई लोग कह रहे हैं कि हम पुनर्प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं। लेकिन यह दावे बिलकुल झूठे है। बल्कि यह शिविर बोर्डिंग स्कूल की तरह है जहां छात्र मुफ्त में खाते और रहते हैं।”

    शिनजिआंग प्रान्त के चीनी अधिकारी (स्त्रोत: रायटर्स)

    ज़ाकिर ने कहा कि “एजुकेशन ट्रेनिंग सेंटर में बहुत ही कम लोग है और एक दिन जब समाज को इसकी जरुरत नहीं होगी तो यह शिविर गायब हो जायेंगे।” एक उइगर मुस्लिम ज़ाकिर बीते वर्ष से चीनी कम्युनिस्ट सरकार की आक्रमक नीतियों का बचाव कर रहे हैं।

    तुर्की के राष्ट्रपति रिचप तैयब एर्डोगन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने चीन के खिलाफ आवाज़ उठायी थी। तुर्की के चीन के साथ करीबी राजनीतिक और आर्थिक सम्बन्ध है। तुर्की ने चीन को मुस्लिमों के लिए बनाये गए नज़रबंदी शिविरों को बंद करने की हिदायत दी है। चीन के शिनजियांग प्रान्त में लाखों उइगर मुस्लिमों को नज़रबंदी जबरन रखा गया है है। तुर्की ने कहा यह बेहद शर्म की बात है।

    शिनजियांग के काश्गर में गश्त करती पुलिस (स्त्रोत: रायटर्स)

    तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामी ऑक्सोय ने कहा कि चीन में जबरन उइगर मुस्लिमों को कैद को कैद करके रखना मानवता के लिए शर्म की की बात है। इन मुस्लिमों में कई तुर्क भाषी शामिल है। उन्होंने कहा कि यह अब गोपनीय नहीं रहेगा कि 10 लाख से अधिक मुस्लिमों को अवैध तरीके से नज़रबंद शिविरों रखा गया है। ताकि उनका उत्पीड़न किया सके और कैदखानों व शिविरों में उनकी राजनीतिक विचारधारा परिवर्तित किया जा सके।

    चीनी कम्युनिस्ट पार्टी लम्बे समय से उइगर मुस्लिमों और उनकी पहचान को मिटाने के लिए आमादा है। साल 1990 के दशक में चीनी सरकार ने शिनजियांग प्रान्त में हान समुदाय के लोगों को भेजना शुरू कर दिया था। साल 2017 से चीनी में अपनी प्रयासों में काफी तीव्रता कर दी, नतीजतन आज लाखों उइगर मुस्लिम चीन की कैद में बंद है। पुनर्प्रशिक्षण का ढोंग रचकर मुस्लिमों को मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी जा रही है।

    कज़ाख़िस्तान के संगठन के संस्थापक सेरिकजहाँ बिलाश को रविवार को अल्माटी में हिरासत में ले लिया था क्योंकि वह शिनजियांग से भागे कज़ाख मुस्लिमों की मदद करते थे। अस्ताना में दो महीनों तक उन्हें घर में नज़रबंद रखा गया था और जातिगत भेदभाव को भड़काने के लिए उन पर जांच जारी है।

    अमेरिका नें की थी निंदा

    जाहिर है हाल ही में अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी नें चीन में मौजूद मुस्लिमों के शिविरों को भयंकर बताया था। चीम में अमेरिका के राजदूत सैम ने बीते सप्ताह हांगकांग में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बनी बीजिंग की नीतियों की आलोचना की और आरोप लगाया की चीन आस्था के साथ जंग लड़ रहा है।

    चीन नें इसका जवाब दिया था। साउथ चाइना मोर्निंग पोस्ट के मुताबिक बीजिंग ने शुरुआत में इन आरोपों को खारिज किया और बाद मे बताया कि उन लोगों को शिविरों में प्रशिक्षण के लिए रखा गया है।

    अमेरिका के अलावा संयुक्त राष्ट्र और कनाडा जैसे देश भी चीन में उइगर मुस्लिम की हालत पर सवाल उठा चुके हैं।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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