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    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के साथ गतिरोध के कारण दो परमाणु हथियारबंद पड़ोसी युद्ध के काफी करीब आ गए थे। चरमपंथी समूहों पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को बढ़ती आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए स्थिरता की तत्काल जरुरत है।

    वैश्विक धनशोधन और आतंकी समूहों को वित्तीय मदद मुहैया करने वालो पर निगरानी रखने वाली फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स की काली सूची में शामिल होने से बचने के लिए और वित्तीय संकट से बचने के लिए चरमपंथी समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। इमरान खान ने कहा कि “पाकिस्तान अपने हितो के लिए कार्य कर रहा है।”

    उन्होंने कहा कि “सभी जानते हैं पाकिस्तान में वो हो रहा है जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था।” पाकिस्तान के पीएम विदेशी पत्रकारों के एक समूह को इस्लामाबाद में सम्बोधित कर रहे थे। सरकार ने समस्त पाकिस्तान में 30000 से अधिक मदरसों को सरकारी नियंत्रण में कर लिया और हज़ारो पूर्व चरमपंथियों का पुनर्वास किया था।

    इमरान खान ने कहा कि “हमने निर्णय ले लिया है, देश ने तय कर लिया है। मुल्क के भविष्य के लिए बाहरी दबाव को भुलाकर हम हथियारबंद चरमपंथियों को देश में सक्रिय रहने की अनुमति नहीं देंगे।” पाकिस्तान पर आरोप लगाए गए हैं कि उनका सुरक्षा विभाग चरमपंथी समूहों को अपने पड़ोसियों के खिलाफ प्रॉक्सी के तौर पर इस्तेमाल करता है, इसमें भारत और अफगानिस्तान शामिल है।

    इस्लामाबाद ने निरंतर इन आरोपों का खंडन किया है और कहा कि “किसी दूसरे मुल्क के मुकाबले आतंकियों के हिंसा से पाकिस्तान ने ज्यादा झेला है। बीते दशकों में हमारे हज़ारो नागरिकों की मृत्यु हुई है और अरबो रूपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

    इमरान खान ने कहा कि “जिहाद को उखाड़ फेंकने के बाद हमने कभी उसे वापस नहीं आने दिया। उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया कि वह ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई या सेना के विरोध का सामना कर रहे हैं। आज आतंकियों के ठिकानों को तबाह करने के लिए आईएसआई और सेना को हमारा पूरा समर्थन हैं। आईएसआई इन समूहों का क्या इस्तेमाल करेगी? यह तो अफगान में जिहाद के लिए तैयार किये गए थे।”

    भारत सहित पाकिस्तान के आलोचकों ने इमरान खान के कार्रवाई के संकल्पो को खारीज किया है। यह पूर्व सरकारों की माफिक ही वादे हैं, वह सिर्फ ध्यान भटकाना चाहते हैं। पाकिस्तान के जैश ए मोहममद आतंकी समूह पर पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की है। भारत में हुए पुलवामा हमले की जिम्मेदारी जैश ने ही ली थी।

    पाक पीएम ने कहा कि “पाकिस्तान अदालत में एक कानूनी मामले तैयार करेगा लेकिन मसूद अज़हर अभी अंडरग्राउंड हैं और साथ ही अस्वस्थ व अप्रभावी है। लेकिन इस ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उसके ठिकानों को तबाह किया जा रहा है। आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई पाकिस्तान ने अपने फायदे के लिए की है।

    आर्थिक तंगी से निपटने के लिए पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भी संपर्क में है। साल 1980 के बाद यह पाकिस्तान का 13 वां बैलआउट पैकेज होगा। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे सूची में बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि “हम काली सूची में शामिल होने बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं, जिसका मतलब प्रतिबन्ध है। हमारी प्राथमिकता 100 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर लाना है। यह तभी मुमकिन है जब पाकिस्तान में स्थिरता होगी।”

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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