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ग्लूकोज़ क्या हैं? परिभाषा, रासायनिक सूत्र, जानकारी

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ग्लूकोज़ क्या हैं?(Definition of glucose in Hindi)

ग्लूकोज़ यह एक सरल शर्करा श्रेणी का एक कार्बोहायड्रेट हैं, जिसका रासायनिक सूत्र C6H12O6 हैं। यह एक मोनोसैकराइड(सरल कार्बोहायड्रेट) हैं, जिसमें एक –CHO ग्रुप(Aldehyde Group)  का अणु भी होता हैं, इसी कारन उसे अल्डोहेक्सोज(Aldehexose) भी कहा जाता हैं।

हेक्सोज का मतलब छह कार्बन अणु वाला सरह कार्बोहायड्रेट होता हैं और अगर हेक्सोज के किसी एक छोर पर एल्डिहाइड ग्रुप को जोड़ा जाए तो उसे अल्डोहेक्सोज कहा जात हैं।

ग्लूकोज़ का रासायनिक सूत्र और स्ट्रक्चर (Chemical Formula and structure of Glucose in Hindi)

ग्लूकोज़ का रासायनिक सूत्र C6H12O6 हैं।

ग्लूकोज़ में कार्बन के चार विषम अणु और होते हैं, इसके अलावा ग्लूकोज़ के एक छोर पर एल्डिहाइड ग्रुप का अणु और अल्कोहल ग्रुप का एक प्राथमिक(प्राइमरी) अणु दुसरे छोर पर होता हैं, अन्य चार कार्बन के अणुओं को सेकेंडरी अल्कोहल एटम कहा जाता हैं।

एक एल्डिहाइड ग्रुप के अनु के साथ एक प्राइमरी अल्कोहल ग्रुप और चार सेकेंडरी अल्कोहलिक ग्रुप के अनु होने की वजह से ग्लूकोज़ को पेंटाहाइड्रोक्सी एल्डिहाइड कहा जाता हैं। पेंटाहाइड्रोक्सी एल्डिहाइड कहे जाने के कारन ग्लूकोज़ में एल्डिहाइड, प्राइमरी और सेकेंडरी अल्कोहल के गुण पाए जाते हैं।

(फिशर मॉडल के अनुरूप ग्लूकोज़ का स्ट्रक्चर)

ग्लूकोज़ को कैसे प्राप्त किया जाता हैं (How glucose is prepared?)

बहुतांश जीवित प्राणियों में उर्जा का स्रोत होने की वजह से, सभी प्राणी अपने खाए हुए अन्न का रूपान्तर ग्लूकोज़ में पाचनक्रिया के दौरान करते हैं। ग्लूकोज़ को अन्य पद्धति से भी बनाया जा सकता हैं।

1. गन्ने के रस से(सुक्रोज से) [लेबोरेटरी मेथड]

जब गन्ने के रस पर जब डैल्युट हाइड्रोक्लोरिक एसिड(Dil.  Hydrochloric Acid) या सुल्फुरिक एसिड (Sulphuric Acid) के सानिध्य में हाइड्रोलैसीस अभिक्रिया की जाती हैं, तब अभिक्रिया के अंत में ग्लूकोज़ और फ्रुक्टोस प्राप्त होते हैं।

अभिक्रिया के अंत में प्राप्त ग्लूकोज़ और फ्रुक्टोज के मिश्रण से ग्लूकोज़ को अलग करने के लिए उसमें अल्कोहोल मिलाया जाता हैं। क्योंकि फ्रुक्टोज अल्कोहोल में पूरी तरह से पिघल जाता हैं, लेकिन ग्लूकोज़ नहीं पिघलता, ग्लूकोज़ को बाद में अल्कोहोल निकाल कर अलग किया जाता हैं।

2. स्टार्च से [कमर्शियल मेथड]

जब स्टार्च पर डैल्युट सुल्फुरिक एसिड के सानिध्य में, 393 केल्विन के तापमान पर हाइड्रोलैसीस अभिक्रिया की जाती हैं, तब अभिक्रिया के अंत में ग्लूकोस प्राप्त होता हैं।

सुल्फुरिक एसिड को न्यूट्रलाइज करने के लिए हाइड्रोलैसीस अभिक्रिया के बाद चाक पाउडर तयार मिश्रण में मिलाया जाता हैं। अन्य पदार्थों को ग्लूकोज़ से अलग करने के लिए एक्तिवेटेड कार्बन का इस्तेमाल किया जाता हैं।

जीवशास्त्र में ग्लूकोज़ का महत्त्व (Importance of Glucose in Biology in hindi)

ग्लूकोज़ का इस्तेमाल हर जीवित प्राणी उर्जा के प्रमुख स्रोत के रूप में करता हैं। बैक्टीरिया से इंसानों तक हर प्राणी वायवीय श्वसन(Aerobic  Respiration) , अवायवीय श्वसन(Anaerobic Respiration) या किण्वन (Fermentation) (बैक्टीरिया इस प्रकार का इस्तेमाल कर, उर्जा प्राप्त करते हैं) का उपयोग कर ग्लूकोज़ से उर्जा निर्मिती करते हैं। और निर्मित उर्जा का इस्तेमाल अपने दैनंदिन कार्यों के लिए करते हैं।

मानव शरीर के लिए ग्लूकोज़, उर्जा का एक प्रमुख साधन हैं। वायवीय श्वसन के जरिए, मानव शरीर- अन्न के प्रति ग्राम से 3.75 किलोकैलोरी(16 किलोज्युल) उर्जा प्राप्त करता हैं। हमारे द्वारा खाए गए अन्न का प्रमुख हिस्सा कार्बोहाइड्रेट्स का होता हैं, पाचनक्रिया के दौरान अन्न का विघटन मोनोसैकराइड और डाईसैकराइड में होता हैं। तयार सैकराइड अधिकतर ग्लूकोज़ होते हैं।

ग्लायकोसिस और सिट्रिक एसिड साइकिल, ओक्सिडेटिव फोस्फोरायलेशन अभिक्रियाओं के कारन ग्लूकोज़ का रूपान्तर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में होता हैं। ग्लूकोज़ पर किए गयी इन अभिक्रियाओं के दौरान तयार उर्जा को ऐटीपी(ATP) में संग्रहित किया जाता हैं।

मानव शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा का नियंत्रण इन्सुलिन द्वारा किया जाता हैं। हमारे मष्तिष्क के सुचार कार्यान्वयन के लिए जरुरी उर्जा ग्लूकोज़ से मिलती हैं। शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा कम होने से दिमाग को सारी जरुरी क्रियाएं करने में अधिक श्रम करना पड़ता हैं।

(रक्त में सामन्य एवं आतिरिक्त ग्लूकोज़ की मात्रा दर्शाने वाला प्रतिनिधिक चित्र)

शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा कम होने से स्व-नियंत्रण, निर्णय लेने में परेशानी का सामना करना, चक्कर आना ऐसी परेशानियां हो सकती हैं। शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा बड जाती हैं, तब मधुमेह जैसी परिस्थितियां उत्त्पन्न हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा रक्त की जांच करना जरुरी हैं।

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About the author

प्रशांत पंद्री

प्रशांत, पुणे विश्वविद्यालय में बीबीए(कंप्यूटर एप्लीकेशन्स) के तृतीय वर्ष के छात्र हैं। वे अन्तर्राष्ट्रीय राजनीती, रक्षा और प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज में रूचि रखते हैं।

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