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    generation of computer in hindi

    कंप्यूटर का परिचय

    कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो डेटा एवं निर्देशों को इनपुट के रूप में ग्रहण करके उनका विश्लेषण करता है एवं परिणामों को आउटपुट के रूप में दर्शाता है। यह कामों को बहुत तेज़ गति से एवं त्रुटिरहित करता है। कंप्यूटर को हिंदी में संगणक के नाम से जाना जाता है।

    कंप्यूटर का इतिहास काफी रोमांचक रहा है।

    कंप्यूटर की विशेषताएं है :

    • तेज़ गति
    • स्वचालित
    • त्रुटिरहित
    • गोपनीयता
    • विशाल भण्डारण क्षमता

    कंप्यूटर की विभिन्न पीढियां (generations of computer in hindi)

    शुरूआती दौर में कंप्यूटर आज कि तरह छोटे एवं हल्के नहीं थे। पहले ये बहुत बड़े, भारी एवं मेहेंगे हुआ करते थे। समय के साथ इनमें कई बदलाव आने लगे एवं विभिन्न पीढ़ियों के साथ इनके आकार, कार्यप्रणाली एवं क्षमता में काफी बदलाव आये।

    इस काल चक्र को विभिन्न पीढ़ियों में बानत गया है वे निम्न हैं :

    पहली पीढ़ी – 1946 से 1959 (first generation of computer):

    परिचय :

    1946 से 1959 को कंप्यूटर की पहली पीढ़ी माना जाता है। इस पीढ़ी की एक ही खासियत थी की यह वैक्यूम ट्यूब से बने हुए कम्प्युटर पर चलती थी जो की कम्प्युटर के आंतरिक भाग में काम आते थे। J.P. Ekert एवं J.W. Mauchy ने NIIAC नामक पहले सफल इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का निर्माण किया था।

    पहली पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर के उदहारण

    • ENIAC
    • EDVAC
    • UNIVAC
    • IBM-701
    • IBM-650

    लाभ :

    1. पहली पीढ़ी के कंप्यूटर वैक्यूम ट्यूब के इस्तेमाल से बने थे क्योंकि उस समय यही एक एलेक्ट्रोनिक उत्पाद बाज़ार में उपलब्ध था।
    2. ये कंप्यूटर मिलिसेकंड में ही बड़ी से बड़ी गणनाएं करने में सक्षम थे।

    परिसीमाएं :

    1. ये कंप्यूटर आकर में बहुत बड़े थे एवं इनका भार 30 टन तक होता था।
    2. ये वैक्यूम ट्यूब से चलते थे।
    3. ये बहुत महंगे थे एवं इस वजह से आम आदमी की पहुँच से बाहर थे।
    4. इनके भीतर चुम्बकीय ड्रम के होने की वजह से यह ज्यादा जानकारी अपने अन्दर भंडारण नहीं कर पाते थे।
    5. ये कंप्यूटर बड़ी मात्र में ऊर्जा खपत करते थे।

    कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी- 1959 से 1965 (second generation of computer)

    परिचय :

    1959 से लेकर 1965 के अंतराल को कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी माना जाता है। इस पीढ़ी में वैक्यूम ट्यूब की बजाय ट्रांजिस्टर पर चलने वाले कंप्यूटर का आविष्कार हुआ। इसमें असेंबली भाषा का प्रयोग किया जाता था एवं मेमोरी के लिए चुम्बकीय टेप का प्रयोग किया जाता था। इससे खपत कम हुई एवं भंडारण क्षमता बढ़ी।

    दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के कुछ उदाहरण :

    • Honeywell 400
    • IBM 7094
    • CDC 1604
    • CDC 3600
    • UNIVAC 1108

    लाभ :

    • ट्रांजिस्टर के आविष्कार कि वजह से कंप्यूटर थोड़े छोटे आकर के बन्ने लगे।
    • ऊर्जा कि खपत कम हुई एवं यह जल्दी गरम भी नहीं होते थे।
    • इनपुट के लिए असेंबली लैंग्वेज का प्रयोगक किया जाने लगा।
    • ये कंप्यूटर पहली पीढ़ी एक कंप्यूटर की तुलना में सस्ते थे।
    • पहली पीढ़ी की तुलना में ये तेज़ भी थे एवं गणनाओं को माइक्रोसेकंड में कर देते थे।

    परिसीमाएँ :

    • इन कंप्यूटर को ज्यादा देर तक चलाने के लिए कुलिंग सिस्टम की ज़रुरत पड़ती थी।
    • इन्हें केवल कुछ गणना करने के लिए ही उपयोग किया जा सकता था।
    • समय समय पर रखरखाव की ज़रुरत थी।

    कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी – 1965 से 1971 (third generation of computer)

    परिचय:

    1965 से लेकर 1971 के अंतराल को कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी माना जाता है। इस पीढ़ी में कंप्यूटर में इंटीग्रेटेड सर्किट्स का प्रयोग किया जाने लगा जिसका आविष्कार Robert Noyce एवं Jack Kilby ने किया था। इसमें प्रोग्रामिंग के लिए हाई लेवल भाषा एवं मेमोरी के लिए चुम्बकीय डिस्क का प्रयोग किया जाता था।

    तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के कुछ उदाहरण :

    • PDP-8
    • PDP-11
    • ICL 2900
    • IBM 360
    • IBM 370

    लाभ :

    • ये कंप्यूटर दूसरी पीढ़ी की तुलना में सस्ते थे एवं आकार में छोटे एवं हलके थे।
    • ये पिछली पीढ़ियों के कंप्यूटर के मुकाबले तेज़ एवं विश्वसनीय थे।
    • इंटीग्रेटेड सर्किट्स के प्रयोग से न सिर्फ उनका आकर छोटा हुआ बल्कि उनकी कार्य क्षमता में भी बढ़ावा हुआ।
    • इनपुट के लिए पुच कार्ड की जगह माउस एवं कीबोर्ड प्रयोग किये जाने लगे।
    • इन कंप्यूटर का गणना करने का समय माइक्रोसेकंड्स से नैनोसेकंड्स हो गया।

    परिसीमाएं :

    • इंटीग्रेटेड सर्किट्स की चिप का रखरखाव बहुत मुश्किल था। ये जल्दी ही खराब हो जाती थी।
    • इन चिप के निर्माण के लिए अत्यधिक उन्नत टेक्नोलॉजी की ज़रूरत थी।
    • कंप्यूटर को ज्यादा देर चलाने एवं चिप को ठंडा रखने के लिए वातानुकूलन की ज़रुरत थी।

    कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी -1971 से 1980 (fourth generation of computer)

    परिचय :

    1971 से लेकर 1980 के अंतराल को कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी के रूप में जाना जाता है। इस समय तक हजारों इंटेग्रटेड सर्किटों को एक ही छोटी सी सिलिकॉन चिप में जोड़ा जाने लगा। इसने फिर कम्प्युटर की क्षमता बढ़ा दी और कम्प्युटर का आकार और कीमत को कम कर दिया।

    इस समय तक कम्प्युटर का माइक्रोप्रोसेसर एक ही चिप पर बनने लग गया था। सीपीयू भी एक ही चिप पर लगना चालू हो गया था। इस तरह की चिप काफी शक्तिशाली होती थी और काम करने के सक्षम भी होती थी।

    चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर के कुछ उदाहरण :

    • IBM 4341
    • DEC 10
    • STAR 1000
    • PUP 11

    लाभ:

    • ये कंप्यूटर गणना करने में सबसे तेज़ थे एवम पिछली पीढ़ियों की तुलना में इनका आकर बहुत छोटा हो गया था।
    • ये बहुत कम ऊष्मा छोड़ते थे जिससे इन्हें लम्बे समय तक चलाया जा सकता था।
    • इन कंप्यूटर में सभी हाई लेवल की भाषाओं का प्रयोग किया जा सकता था।

    परिसीमाएं:

    • माइक्रोप्रोसेसर का निर्माण एवं फेब्रिकेशन करना एक बहुत जटिल एवं पेचीदा प्रक्रिया है।
    • कही कहीं IC रहने की वजह से वातानुकूलन की ज़रुरत थी।
    • इनके प्रोसेसर को बनाने के लिए बहुत ही उन्नत तकनीक की ज़रुरत थी।

    कंप्यूटर की पांचवी पीढ़ी-1980 के बाद (fifth generation of computer)

    परिचय :

    इस पीढ़ी की शुरुआत 1980 से मानी जाती है एवं इस पीढ़ी का अंत निर्धारित नहीं है। इस पीढ़ी के कंप्यूटर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस पर आधारित हैं। ये कंप्यूटर जल्द ही प्राकृतिक भाषाओं को समझ सकेंगे एवं इनके हिसाब से काम कर सकेंगे।

    पांचवी पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर के उदाहरण :

    • डेस्कटॉप
    • लैपटॉप
    • नोटबुक
    • अल्ट्राबुक
    • क्रोमबुक

    लाभ:

    • ये कंप्यूटर ज्यादा विश्वसनीय हैं एवं बहुत अधिक कार्यक्षमता रखते हैं।
    • ये अलग अलग आकारों में उपलब्ध हैं।
    • यह कंप्यूटर मल्टीमीडिया सुविधाएं प्रदान करता है एवं इसका इंटरफ़ेस उपयोगकर्ताओं के अनुरूप है।

    परिसीमाएँ :

    • मानव ज्यादा से ज्यादा कंप्यूटर पर निर्भर होते जा रहे हैं।

    इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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