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    कंप्यूटर का इतिहास history of computer in hindi

    कम्प्युटर का इतिहास (history of computer in hindi)

    बहुत पहले लोगों को गणना करने के लिए जो उपकरण बनाया गया था उसे हम अबैकस बोलते थे। यह उपकरण 5000 साल बाद आज भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

    1642 में ब्लैसे पास्कल ने एक मशीन का निर्माण किया था मैकानिकल औजारों को इस्तेमाल करके जिसमे की अंक उसके पहिये के दाँतो पर होते थे। उसके बाद चार्ल्स बाबेज ने 1830 में एक नया इंजिन बनाया पीतल और कुछ औजारों की मदद से जिसे हम एनालिटिकल इंजिन बोलते थे। उसके डिज़ाइन मे कुछ विशेषताएँ थी वह कुछ इस प्रकार हैं–

    • इनपुट डिवाइस
    • अंको को हम स्टोर कर सकते थे
    • एक प्रॉसेसर या फिर अंको की गणना करने वाला
    • एक प्रोग्राम के द्वारा कैलक्युलेशन को करना
    • एक आउटपुट डिवाइस

    ऑगस्टा अड़ा बायरन जो थे वह बाबेज के साथी थे जोकि विश्व के पहले कम्प्युटर प्रोग्रामर के रूप में जाने गए। अमेरिका के हेरमान होललेरिथ ने 1890 के करीब एक बिजली से चलने वाला उपकरण बनाया था जो की पंच कार्ड और धातु की रोड को इस्तेमाल करता था और इलैक्ट्रिकल सर्किट से जुड़ा हुआ होता था। इस मशीन की मदद से ही अमेरिका की 1890 की जनगणना की गणना 6 हफ्तों में हो पायी थी जबकि इससे पहले 1880 की जो जनगणना थी उसकी गणना गिन के की गई थी उसको पूरा करने में साढ़े साथ साल लगे थे।

    1936 में हावर्ड विश्वविद्यालय के हॉवर्ड आइकेन ने आईबीएम के थॉमस वॉटसन को 1 मिल्यन लगाने के लिए राजी किया जिससे की वह बाबेज के इंजिन को बिजली से चलने वाला उत्पाद बना सकें। हावर्ड मार्क प्रथम 1944 में पूरा हुआ और वह 8 फीट ऊंचा और 55 फीट लंबा था।

    इसी समय आईओवा स्टेट विश्वविद्यालय के जॉन अटनसोफ़्फ और उनके सहायक क्लिफ़्फ़ोर्ड बेरी ने पहला डिजिटल कम्प्युटर एबीसी बनाया जो की बिजली से चलता था। यह एक छोटा कैल्कुलेटर था। 1943 में ब्रिटिश युद्ध में वैक्युम ट्यूब से बनाए हुए कम्प्युटर को बनाया गया जिससे की जर्मन के कोड को तोड़ा जा सके। कोलोसूस मार्क 2 सिरीज़ में 2400 वैक्यूम ट्यूब थी।

    इसके बाद पेनिसिलवेनिया विश्वविद्यालय के जॉन मौचली और जे.प्रेसपेर एक्केर्ट ने इसके बारे में और अच्छे से सोचा और 18000 वैक्यूम ट्यूब की मदद से एक बड़ी मशीन का निर्माण किया। एनियाक (एलेक्ट्रोनिक न्यूमेरिकल इंटेग्रेटर और कम्प्युटर) 1946 में बना था। यह एक काफी बड़ी मशीन थी जिसमे की काफी ऊर्जा की जरूरत पड़ती थी और इसके कुछ नुकसान भी थे। इसको सही से रखना काफी मुश्किल था क्यूंकी इसके ट्यूबस टूटते रहते थे और इसमे ज्यादा तप्त होने जैसी बड़ी समस्या भी थी। इसकी एक कमी यह भी थी की इसको हर नया काम करने के लिए दुबारा नए तारों की जरूरत पड़ती थी कनैक्शन करने के लिए।

    1940 मे जॉन वॉन नेयुमान ने ईडीवीएसी (एलेक्ट्रोनिक डिस्क्रीट वरिएबल ऑटोमैटिक कम्प्युटर) का निर्माण किया जिसमे की प्रोग्राम डाले हुए होते थे। इस तकनीकी ने फिर समान्य कम्प्युटर को भी जन्म दिया।

    कंप्यूटर की पीढ़ी (generation of computer in hindi)

    जैसा की हमें पता है कम्प्युटर कई पीढ़ियों में नई नई तकनीक से बनाया गया था।

    पहली पीढ़ी (1943-1958) (first generation of computer)

    यह पहले बिकने वाले कम्प्युटर की पीढ़ी थी। 1951 तक यूनिवैक के अपने उत्पाद काफी बिके थे। यह पीढ़ी 1950 तक खतम हो गयी थी। इस पीढ़ी की एक ही खासियत थी की यह वैक्यूम ट्यूब से बने हुए कम्प्युटर पर चलती थी जो की कम्प्युटर के आंतरिक भाग में काम आते थे। वैक्यूम ट्यूब 5 से 10 सेंटिमीटर तक लंबी होती थी और काफी तरह के औज़ार इस तरह की मशीन को बनाने में काम आते थे।

    दूसरी पीढ़ी (1959-1964) (second generation of computer)

    1950 के मध्य में बेल लैब ने ट्रंजिस्टर का निर्माण किया था। ट्रंजिस्टर भी उसी तरह के सारे काम करते थे जो की वैक्यूम ट्यूब करती थी। पहला ट्रंजिस्टर से चलने वाला कम्प्युटर 1959 में बना था। ट्रंजिस्टर केवल छोटे नहीं थे, कम्प्युटर के साइज़ को भी उन्होने कम कर दिया था और कम्प्युटर के काम करने की गति बढ़ाने के साथ साथ बिजली की खपत भी कम थी।

    इस समय एक यह भी अच्छा काम हुआ की कम्प्युटर भाषा का निर्माण हो गया। असेंबलर और सिम्बल की भाषा को शब्दों में बदलने के लिए भी कम्प्युटर विशेषज्ञों द्वारा काफी प्रयास किए गए। बड़े दर्जे की भाषा का भी निर्माण किया गया जिनहे आम मशीन न समझ पाएँ। इस समय में दो भाषाओं का निर्माण हुआ जिनका नाम था फोर्टन और कोबोल जो की आज के समय में भी काफी इस्तेमाल हो रहीं है।

    तीसरी पीढ़ी (1965-1970) (third generation of computer)

    1965 में पहले इंटेग्रटेड सर्किट का निर्माण हुआ जिसमे की एक ही सर्किट में सैकड़ों कॉम्पोनेंट लगाए गए एक ही चिप पर जो की 2 से 3 एमएम की थी। कम्प्युटर में इस तरह की आईसी का इस्तेमाल होने लगा और उसने ट्रंजिस्टर का मशीनो में इस्तेमाल को रोक दिया।

    इससे यह फायदा हुआ की कम्प्युटर काफी शक्तिशाली हो गए और इसके आकार में भी काफी तरह के परिवर्तन आ गए। कम्प्युटर का इस्तेमाल इस समय तक काफी लोग करने लग गए थे। इसके छोटे आकार की मदद से इसकी क्षमता और गति काफी बढ़ गयी थी।

    एक और फायदा यह हुआ की कम्प्युटर के सॉफ्टवेयर काफी शक्तिशाली हो गए और एक ही प्रोग्राम अब एक से ज्यादा कम्प्युटरो में इस्तेमाल हो सकता था। ज़्यादातर प्रोग्रामिंग भाषा जो आज भी इस्तेमाल होती हैं वह भी तीसरी पीढ़ी की ही है।

    चौथी पीढ़ी (1971 से अब तक) (fourth generation of computer)

    इस समय तक हजारों इंटेग्रटेड सर्किटों को एक ही छोटी सी सिलिकॉन चिप में जोड़ा जाने लगा। इसने फिर कम्प्युटर की क्षमता बढ़ा दी और कम्प्युटर का आकार और कीमत को कम कर दिया।

    इस समय तक कम्प्युटर का माइक्रोप्रोसेसर एक ही चिप पर बनने लग गया था। सीपीयू भी एक ही चिप पर लगना चालू हो गया था। इस तरह की चिप काफी शक्तिशाली होती थी और काम करने के सक्षम भी होती थी।

    पाँचवी पीढ़ी (भविष्य) (fifth generation of computer)

    हालांकि हमे पता है चौथी पीढ़ी अभी पूरी नहीं हुई है लेकिन कम्प्युटर की पाँचवी पीढ़ी जापान की सरकार द्वारा 1980 में ही बता दी गयी थी की आने वाले सालों में किस तरह के कम्प्युटर होंगे।

    आने वाले कम्प्युटर आर्टिफ़िश्यल इंटेलिजेंस, एक्सपेर्ट सिस्टम और नैचुरल भाषा की मदद से काम करेंगे। आने वाली मशीन मनुष्य के समान ही काम करेगी और मनुष्य की तरह ही हर काम में सक्षम होगी।

    इस लेख से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल या विचार है, तो आप उसें नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

    One thought on “कम्प्युटर का इतिहास, विकास, परिचय”
    1. Pehli baar banaaye gaye computer mein kitni ram and storage thi
      Us computer mein kya kya functions the?

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