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सभी ओटीटी व सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर कसेगा शिकंजा

आजकल सोशल मीडिया और अन्य ओटीटी प्लेटफार्म्स ने लोगों के जीवन के एक बड़े हिस्से को घेर रखा है। इसके जहां कई सारे फायदे हैं तो बहुत से नुकसान भी हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के लिए भारत में अबतक कोई विशेष कानून नहीं थे लेकिन अब भारत सरकार इसके लिए भी कानून लेकर आने वाली है। सरकार ने ओटीटी व सोशल मीडिया के लिए नए कानून बना लिए हैं। संभावना जताई जा रही है कि आगामी तीन महीने में ये कानून लागू भी हो जाएंगे।

नए नियमों के अनुसार यदि कॉन्टेंट आपत्तिजनक पाया जाता है तो शिकायत के तुरंत 24 घंटे बाद उसे प्लेटफॉर्म से हटाना होगा। सरकार आपत्तिजनक और भ्रामक कॉन्टेंट पर एक्शन लेगी। इसके अलावा डिजिटल मीडिया पर भी सामान्य मीडिया वाले नियम लागू होंगे। डिजिटल मीडिया को सेल्फ रेगुलेशन करना होगा। अभी तक डिजिटल मीडिया किसी भी कानून के दायरे से बाहर होता था। और इसके कारण बहुत सी गलत ख़बरें लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बना देती थी। अब ऐसा नहीं होगा और डिजिटल मीडिया भी सामान्य मीडिया की तरह ही अपनी ज़िम्मेदारी निभाएगा। उच्चतम न्यायालय ने समाज में नफरत और भ्रम की स्थिति न फैले इसके लिए यह कदम उठाया है।

सोशल मीडिया पर किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति के नाम से फर्जी अकाउंट आसानी से बनाया जा सकता है और उसका दुरुपयोग करना भी कोई बड़ी बात नहीं है। जो लोग कम पढ़े लिखे या सोशल मीडिया के प्रति कम जागरूक हैं, वो फर्जी और असल अकाउंट्स में भेद नहीं कर पाते और आसानी से गलत खबरों पर यकीन कर लेते हैं। इससे समाज में भ्रम की स्थिति बनती है और इसके खिलाफ सरकार ने अभी तक कोई कठोर नियम नहीं बनाए थे। लेकिन अब सरकार इस तरह की गतिविधियों को रोक सकेगी। नए क़ानूनों के आने के बाद सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों पर भी नकेल कसी जा सकेगी।

नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर अब केवाइसी अनिवार्य होगी। इससे प्लेटफॉर्म यूज़र्स के प्रयोग के लिए सुरक्षित बनेगा। साथ ही इसके दुरुपयोग की संभावना में भी कमी होगी। केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद व प्रकाश जावडेकर ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में इस बात की जानकारी दी है। कुल मिलाकर अब सोशल मीडिया के गलत प्रयोग पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। वहीं क्या सामग्री प्रसारित की जा रही है उसपर भी निगरानी की जाएगी।

अभी तक सोशल मीडिया व ओटीटी प्लेटफार्म्स पर कोई नियम या कानून लागू नहीं होते थे, जिसके चलते इनपर प्रसारित होने वाली सामग्री भड़काऊ व अश्लील होने पर भी इनपर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती थी। इसी के चलते बहुत सी फिल्मों व सीरीज़ का विरोध भी हुआ लेकिन सरकार कोई सख्त कदम नहीं उठा पाई। नए क़ानूनों के तहत अब इनपर तीन स्तर पर निगरानी रखी जाएगी। साथ ही सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलना भी एक बड़ा मुद्दा था, इसपर भी सरकार अब रोक लगा सकेगी। अब इन प्लेटफार्म्स पर प्रसारित सामग्री हिंसा, भाषा व दृश्य के हिसाब से वर्गीकृत की जाएगी। इस तरह से सरकार समाज में गलत चीजों का प्रसार कर रहे प्लेटफॉर्म या कॉन्टेंट पर नकेल कस सकेगी।

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Upasana Kanswal

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